श्रद्धा और आस्था से मनाएंगे आईमाता का 611वां अवतरण दिवस एवं भादवी बीज

श्रद्धा और आस्था से मनाएंगे आईमाता का 611वां अवतरण दिवस एवं भादवी बीज

गोकुल रोड स्थित केएसआरटीसी डिपो के सामने नानकी कन्वेंशन सेंटर में शनिवार को आयोजित जागरण में राजस्थान से आने वाली भजन मंडली आईमाता की महिमा और भक्ति पर आधारित भजनों की प्रस्तुतियां देगी। जागरण के दौरान समाजबंधु भक्ति में सराबोर होकर आईमाता का स्मरण करेंगे। रविवार को विभिन्न धार्मिक आयोजनों के साथ आईमाता का पूजन-अर्चन किया जाएगा। समाजबंधु परिवार सहित आयोजन में शामिल होकर सुख-शांति, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करेंगे।

आईमाता के अवतरण दिवस के रूप में मनाते हैं भादवी बीज

आईपंथ की आराध्य आईमाता के अवतरण दिवस के रूप में भादवी बीज का विशेष धार्मिक महत्व है। आईपंथ की मान्यता के अनुसार विक्रम संवत 1472 में भादवा सुदी बीज के दिन मां आईमाता का प्राकट्य हुआ था। इसी स्मृति में भादवी बीज को आईमाता के अवतरण दिवस के रूप में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। हुब्बल्ली-धारवाड़ सहित आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले सीरवी समाजबंधु इस अवसर पर एकत्र होकर अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का स्मरण करेंगे। दो दिवसीय आयोजन के माध्यम से समाज में एकजुटता और धार्मिक भावनाओं को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।

नारलाई और बिलाड़ा से जुड़ी है परंपरा

आईमाता की धार्मिक परंपरा में राजस्थान के नारलाई और बिलाड़ा का विशेष महत्व माना जाता है। समाज की मान्यता के अनुसार नारलाई में भादवी बीज के शुभ अवसर पर अखंड केसर ज्योत प्रज्वलित की गई थी। वहीं विक्रम संवत 1525 में बिलाड़ा में प्रथम अखंड ज्योत की स्थापना से जुड़ी परंपरा का विशेष महत्व है। राजस्थान से दूर कर्नाटक में बसे सीरवी समाजबंधु भी इन परंपराओं को श्रद्धा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। भादवी बीज के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों के जरिए समाज की नई पीढ़ी को आईमाता की शिक्षाओं, धार्मिक आस्था और गौरवशाली परंपराओं से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा।

नई पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने का अवसर

आयोजकों के अनुसार धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य केवल पर्व मनाना ही नहीं, बल्कि समाज की युवा पीढ़ी को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना भी है। जागरण और धार्मिक कार्यक्रमों में बच्चों एवं युवाओं की सहभागिता से उन्हें आईमाता की परंपराओं और समाज की सांस्कृतिक पहचान के बारे में जानने का अवसर मिलेगा। दो दिनों तक होने वाले आयोजनों को लेकर सीरवी समाजबंधुओं में उत्साह है। शनिवार रात भक्ति संगीत और जागरण से माहौल भक्तिमय होगा, वहीं रविवार को धार्मिक अनुष्ठानों और पूजन-अर्चन के साथ भादवी बीज का पर्व श्रद्धा एवं आस्था से मनाया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *