शिव आराधना ही जीव की मुक्ति का सबसे सरल और श्रेष्ठ मार्ग : आचार्य लोकेन्द्र दास

शिव आराधना ही जीव की मुक्ति का सबसे सरल और श्रेष्ठ मार्ग : आचार्य लोकेन्द्र दास

पवित्र श्रावण मास के अवसर पर श्री शिवाला स्वरूप ट्रस्ट की ओर से कच्चा टोबा स्थित शिव मंदिर में 12 अगस्त तक श्री शिव महापुराण कथा का दिव्य आयोजन किया जा रहा है। कथा का वाचन आचार्य लोकेन्द्र दास द्वारा किया जा रहा है। कथा के दौरान आचार्य लोकेन्द्र दास ने शिव महापुराण की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि सतयुग और अन्य युगों में ब्रह्मा सहित देवताओं द्वारा हजारों वर्षों तक यज्ञ करने से जो पुण्य प्राप्त होता था, वही फल कलियुग में भगवान शिव की कथा सुनने और उनकी आराधना करने से सहज रूप में प्राप्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव ही ऐसे देव हैं जिनकी शिवलिंग और शिव मूर्ति, दोनों रूपों में पूरे विश्व में पूजा की जाती है। इस दौरान कथा में बताया कि जब भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर भयंकर युद्ध छिड़ गया था, तब भगवान शिव अनंत ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए। दोनों देवता शिवलिंग का आदि और अंत नहीं खोज सके। अंततः उन्होंने भगवान शिव की शरण ग्रहण कर उनकी पूजा-अर्चना की। आचार्य ने कहा कि भगवान महाकाल ही समस्त ब्रह्मांड का संचालन करते हैं और प्रत्येक जीव को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। इसलिए शिव आराधना ही जीव की मुक्ति का सबसे सरल और श्रेष्ठ मार्ग है। इस अवसर पर सुभाष चंद्रा, आशा रानी, राहुल शर्मा, पूजा शर्मा, केशव शर्मा और रूद्रांश शर्मा, श्री शिवाला स्वरूप ट्रस्ट के चेयरमैन राकेश उम्मट, वीरेंद्र उम्मट, दिनेश उम्मट, हर्षित उम्मट, नीना उम्मट, नमिता उम्मट, पिंकी दुआ, कृष्ण दुआ, राकेश तनेजा, रिंकी, पंडित हरिओम, बनारसी दास सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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शिव आराधना ही जीव की मुक्ति का सबसे सरल और श्रेष्ठ मार्ग : आचार्य लोकेन्द्र दास

शिव आराधना ही जीव की मुक्ति का सबसे सरल और श्रेष्ठ मार्ग : आचार्य लोकेन्द्र दास

पवित्र श्रावण मास के अवसर पर श्री शिवाला स्वरूप ट्रस्ट की ओर से कच्चा टोबा स्थित शिव मंदिर में 12 अगस्त तक श्री शिव महापुराण कथा का दिव्य आयोजन किया जा रहा है। कथा का वाचन आचार्य लोकेन्द्र दास द्वारा किया जा रहा है। कथा के दौरान आचार्य लोकेन्द्र दास ने शिव महापुराण की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि सतयुग और अन्य युगों में ब्रह्मा सहित देवताओं द्वारा हजारों वर्षों तक यज्ञ करने से जो पुण्य प्राप्त होता था, वही फल कलियुग में भगवान शिव की कथा सुनने और उनकी आराधना करने से सहज रूप में प्राप्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव ही ऐसे देव हैं जिनकी शिवलिंग और शिव मूर्ति, दोनों रूपों में पूरे विश्व में पूजा की जाती है। इस दौरान कथा में बताया कि जब भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर भयंकर युद्ध छिड़ गया था, तब भगवान शिव अनंत ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए। दोनों देवता शिवलिंग का आदि और अंत नहीं खोज सके। अंततः उन्होंने भगवान शिव की शरण ग्रहण कर उनकी पूजा-अर्चना की। आचार्य ने कहा कि भगवान महाकाल ही समस्त ब्रह्मांड का संचालन करते हैं और प्रत्येक जीव को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। इसलिए शिव आराधना ही जीव की मुक्ति का सबसे सरल और श्रेष्ठ मार्ग है। इस अवसर पर सुभाष चंद्रा, आशा रानी, राहुल शर्मा, पूजा शर्मा, केशव शर्मा और रूद्रांश शर्मा, श्री शिवाला स्वरूप ट्रस्ट के चेयरमैन राकेश उम्मट, वीरेंद्र उम्मट, दिनेश उम्मट, हर्षित उम्मट, नीना उम्मट, नमिता उम्मट, पिंकी दुआ, कृष्ण दुआ, राकेश तनेजा, रिंकी, पंडित हरिओम, बनारसी दास सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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