वृंदावन के दावानल कुंड स्थित उड़िया बाबा आश्रम में द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज से श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष और मामले में हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने मुलाकात की। इस दौरान शंकराचार्य ने कहा कि जिन मंदिरों को नष्ट किया गया, वे हिंदुओं को वापस मिलने चाहिए। उन्होंने हिंदू समाज से एकजुट होकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। शंकराचार्य ने महेंद्र प्रताप सिंह से उच्च न्यायालय में मंगलवार को होने वाली सुनवाई की कार्रवाई की जानकारी लौटकर देने को भी कहा। ‘श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर को चार बार किया गया खंडित’ मुलाकात के दौरान महेंद्र प्रताप सिंह ने शंकराचार्य को श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद में हिंदू पक्ष के दावों और अदालत में चल रही कानूनी कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग कालखंडों में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर को चार बार क्षतिग्रस्त किया गया। महेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, वर्ष 1670 में औरंगजेब के शासनकाल में मंदिर तोड़ा गया और मूल गर्भगृह स्थल पर शाही ईदगाह का निर्माण कराया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि भगवान के विग्रह आगरा ले जाकर जामा मस्जिद की सीढ़ियों में लगवा दिए गए थे। ये हिंदू पक्ष की ओर से किए गए दावे हैं। मूल गर्भगृह पर मंदिर निर्माण की मांग महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मूल गर्भगृह स्थल पर भव्य मंदिर निर्माण और आगरा से भगवान के विग्रह वापस लाने की मांग को लेकर उच्च न्यायालय में दो वाद दायर किए गए हैं। उन्होंने कहा कि मुकदमों की पैरवी के लिए देश-विदेश की लाइब्रेरियों से ऐतिहासिक दस्तावेज, पुस्तकें और अन्य प्रमाण जुटाकर साक्ष्य तैयार किए गए हैं। ‘भगवान कृष्ण का प्राकट्य स्थल आस्था का केंद्र’ शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य स्थल हिंदुओं की श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने कहा कि जिन धर्मस्थलों को नष्ट किया गया, उन्हें वापस मिलना चाहिए। अपनी बात समझाने के लिए शंकराचार्य ने कौए और घड़े के पानी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह कौआ घड़े के पानी को दूषित करने का प्रयास करता है, उसी तरह उनके अनुसार विधर्मियों ने हिंदू धर्म को दूषित करने का काम किया। उन्होंने हिंदू समाज से एकजुट होकर आगे बढ़ने की अपील की।

