वृंदावन से सहरसा पहुंचे श्रीश्री तुलसीदास महाराज ने मंगलवार को पटुआहा स्थित द आम गाछी में प्रेस वार्ता की। यह वार्ता आठ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दौरान हुई। उन्होंने बताया कि सहरसा में भागवत कथा करने का उनका संकल्प करीब सात साल पुराना है। कथा का मकसद लोगों को श्रीमद्भागवत के आध्यात्मिक रस का अनुभव कराना और इसका संदेश हर किसी तक पहुंचाना है। महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा सिर्फ सुनने के लिए नहीं है, बल्कि इसे जीवन में उतारना भी जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि जब तक इंसान जीवित है, उसे भागवत कथा के ज्ञान और संदेश को अपनाते रहना चाहिए। सहरसा पहुंचने पर तुलसीदास महाराज ने शहर में जलजमाव और कई जगहों पर सड़कों की खराब हालत देखी। उन्होंने कहा कि आम लोगों को इन परेशानियों से जल्द छुटकारा मिलना चाहिए। जागरूकता और आपसी एकता होनी चाहिए उन्होंने बिहार सरकार से सड़क व्यवस्था और जलजमाव की समस्या का स्थायी हल निकालने की अपील की। उन्होंने देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाले रास्ते की हालत सुधारने की बात भी कही। महाराज के अनुसार, किसी भी राज्य में अच्छी स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क व्यवस्था आम लोगों की जिंदगी आसान बनाने के लिए जरूरी है। सनातन धर्म पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि लोगों में धर्म के प्रति जागरूकता और आपसी एकता होनी चाहिए। विद्वानों और धर्माचार्यों से अपील भी की उन्होंने अलग-अलग धर्मों के लोगों से आपसी भाईचारा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज को बंटवारे से बचाकर एकजुटता की तरफ बढ़ना चाहिए। उन्होंने भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का भी जिक्र किया। महाराज ने कहा कि बिहार की धरती का इतिहास बहुत गौरवशाली रहा है। सम्राट अशोक और चाणक्य जैसे महान लोग इसी भूमि से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को समझना और उसे आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। तुलसीदास महाराज ने मीडिया के जरिए देश के विद्वानों और धर्माचार्यों से एक अपील भी की। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं कथा सुनने उन्होंने कहा कि देश के प्रमाणित धार्मिक ग्रंथों, 18 पुराणों और चारों वेदों सहित सभी जरूरी साहित्य को एक जगह इकट्ठा करने की पहल होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शंकराचार्यों और अन्य विद्वानों के बीच चर्चा के बाद 52 शक्तिपीठ और चार धाम जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने नए मंदिरों के निर्माण के बजाय जरूरत के अनुसार स्कूल और कॉलेज स्थापित करने की बात कही, ताकि आने वाली पीढ़ी को बेहतर शिक्षा मिल सके। वहीं ध्रुव कुमार झा (मामाजी) ने कहा कि वृंदावन से आए विश्वविख्यात श्रीश्री तुलसीदास महाराज की भागवत कथा सुनने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। चार घंटे तक चलने वाली कथा में श्रोता मंत्रमुग्ध होकर आध्यात्मिक संदेश ग्रहण कर रहे हैं। वृंदावन से सहरसा पहुंचे श्रीश्री तुलसीदास महाराज ने मंगलवार को पटुआहा स्थित द आम गाछी में प्रेस वार्ता की। यह वार्ता आठ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दौरान हुई। उन्होंने बताया कि सहरसा में भागवत कथा करने का उनका संकल्प करीब सात साल पुराना है। कथा का मकसद लोगों को श्रीमद्भागवत के आध्यात्मिक रस का अनुभव कराना और इसका संदेश हर किसी तक पहुंचाना है। महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा सिर्फ सुनने के लिए नहीं है, बल्कि इसे जीवन में उतारना भी जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि जब तक इंसान जीवित है, उसे भागवत कथा के ज्ञान और संदेश को अपनाते रहना चाहिए। सहरसा पहुंचने पर तुलसीदास महाराज ने शहर में जलजमाव और कई जगहों पर सड़कों की खराब हालत देखी। उन्होंने कहा कि आम लोगों को इन परेशानियों से जल्द छुटकारा मिलना चाहिए। जागरूकता और आपसी एकता होनी चाहिए उन्होंने बिहार सरकार से सड़क व्यवस्था और जलजमाव की समस्या का स्थायी हल निकालने की अपील की। उन्होंने देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाले रास्ते की हालत सुधारने की बात भी कही। महाराज के अनुसार, किसी भी राज्य में अच्छी स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क व्यवस्था आम लोगों की जिंदगी आसान बनाने के लिए जरूरी है। सनातन धर्म पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि लोगों में धर्म के प्रति जागरूकता और आपसी एकता होनी चाहिए। विद्वानों और धर्माचार्यों से अपील भी की उन्होंने अलग-अलग धर्मों के लोगों से आपसी भाईचारा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज को बंटवारे से बचाकर एकजुटता की तरफ बढ़ना चाहिए। उन्होंने भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का भी जिक्र किया। महाराज ने कहा कि बिहार की धरती का इतिहास बहुत गौरवशाली रहा है। सम्राट अशोक और चाणक्य जैसे महान लोग इसी भूमि से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को समझना और उसे आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। तुलसीदास महाराज ने मीडिया के जरिए देश के विद्वानों और धर्माचार्यों से एक अपील भी की। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं कथा सुनने उन्होंने कहा कि देश के प्रमाणित धार्मिक ग्रंथों, 18 पुराणों और चारों वेदों सहित सभी जरूरी साहित्य को एक जगह इकट्ठा करने की पहल होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शंकराचार्यों और अन्य विद्वानों के बीच चर्चा के बाद 52 शक्तिपीठ और चार धाम जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने नए मंदिरों के निर्माण के बजाय जरूरत के अनुसार स्कूल और कॉलेज स्थापित करने की बात कही, ताकि आने वाली पीढ़ी को बेहतर शिक्षा मिल सके। वहीं ध्रुव कुमार झा (मामाजी) ने कहा कि वृंदावन से आए विश्वविख्यात श्रीश्री तुलसीदास महाराज की भागवत कथा सुनने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। चार घंटे तक चलने वाली कथा में श्रोता मंत्रमुग्ध होकर आध्यात्मिक संदेश ग्रहण कर रहे हैं।

