बैतूल में मंगलवार को जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) ने चिचोली नगर परिषद के गठन के खिलाफ प्रदर्शन किया। संगठन के सैकड़ों कार्यकर्ता और आदिवासी समाज के लोग तहसील कार्यालय पहुंचे। उन्होंने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर नगर परिषद को शून्य घोषित कर चिचोली को फिर से ग्राम पंचायत बनाने की मांग की। ज्ञापन में जयस ने चिचोली को भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत अधिसूचित आदिवासी क्षेत्र बताया है। संगठन ने नगर परिषद के गठन पर सवाल उठाए हैं। जयस का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 243ZC के अनुसार, पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों में नगर निकायों का गठन संसद के विशेष कानून के प्रावधानों के अधीन होता है। संगठन ने दावा किया है कि 2009-10 में ग्राम सभा की स्वायत्तता को नजरअंदाज कर आदिवासी सदस्यों पर दबाव बनाकर ग्राम पंचायत चिचोली को नगर परिषद में शामिल किया गया था। जयस ने यह भी कहा कि नगर परिषद बनने के बाद पारंपरिक ग्राम सभाओं के अधिकारों पर असर पड़ा है। संगठन ने दावा किया कि पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम यानी पेसा कानून, 1996 के तहत जल, जंगल और जमीन से जुड़े पारंपरिक अधिकारों पर भी असर पड़ा है। इसके अलावा, नगर निकाय व्यवस्था लागू होने से स्थानीय ग्रामीणों पर अतिरिक्त कर का बोझ बढ़ा है और उनकी पारंपरिक सामाजिक व प्रशासनिक व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। ज्ञापन में मांग की गई है कि पांचवीं अनुसूची के संवैधानिक प्रावधानों का पालन करते हुए चिचोली नगर परिषद को तुरंत शून्य घोषित किया जाए। साथ ही, इस क्षेत्र को फिर से पंचायत राज व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायत बनाया जाए। जयस ने पेसा कानून के प्रावधानों के अनुसार पारंपरिक ग्राम सभाओं को उनके अधिकार वापस देने की भी मांग की है।

