रायपुर में दक्षिण-भारतीय शैली के अनोखे गणपति,21 दिन चलेगा गणेशोत्सव:लड्डू की होगी नीलामी, उद्योगपति-श्रद्धालु लगाते हैं लाखों की बोली, काले पत्थर से बनी मूर्ति

रायपुर में दक्षिण-भारतीय शैली के अनोखे गणपति,21 दिन चलेगा गणेशोत्सव:लड्डू की होगी नीलामी, उद्योगपति-श्रद्धालु लगाते हैं लाखों की बोली, काले पत्थर से बनी मूर्ति

रायपुर के खमतराई स्थित शिवानंद नगर के श्री वरसिद्धि विनायक गणेश मंदिर में 21 दिवसीय गणेशोत्सव मनाया जाता है। यहां पर दक्षिण भारतीय शैली में गणेश भगवान की स्थापना की गई है और पूजा पद्धति उत्तर और दक्षिण भारत दोनों की परंपराओं को मिलाकर की जाती है। मंदिर में भगवान गणेश के लिए विशेष लड्डू बनाया जाता है, जिसकी नीलामी होती है। कई बार इसकी बोली लाखों रुपए तक पहुंच चुकी है। खास बात यह है कि सबसे अधिक बोली लगाने वाला श्रद्धालु लड्डू को घर नहीं ले जाता, बल्कि पूजा के बाद इसे मंदिर में प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में बांटा जाता है। लड्डू की नीलामी की यह परंपरा मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के समय वर्ष 2008 में शुरू हुई थी। मंदिर समिति के अनुसार इसका उद्देश्य लोगों को आपस में जोड़ना और धर्म-संस्कृति से जोड़कर सामूहिक रूप से उत्सव मनाना है। हर साल व्यापारी, उद्योगपति और बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस बोली में शामिल होते हैं। 1 लाख रुपए से ऊपर जाएगी बोली मंदिर के सचिव मुकुंद बाबू ने बताया कि पिछले साल टी. श्रीनिवास रेड्डी ने सबसे अधिक बोली लगाकर लड्डू अपने नाम किया था। इसके बाद पूजा कर लड्डू को मंदिर में आए श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में बांट दिया गया था। इस बार लड्डू की नीलामी 4 अक्टूबर को होगी। समिति के अनुसार इस साल बोली 1 लाख रुपए से ऊपर पहुंचने की संभावना है। आंध्रप्रदेश से लाई गई काले पत्थर की मूर्ति मंदिर में स्थापित भगवान गणेश की प्रतिमा भी यहां की खास पहचान है। करीब 5 फीट ऊंची यह प्रतिमा आंध्रप्रदेश से लाई गई काले पत्थर की है। प्रतिमा का स्वरूप दक्षिण भारत की मंदिर परंपरा से प्रभावित है। पूरे 21 दिनों में भगवान का अलग-अलग तरीके से शृंगार किया जाता है। हल्दी, कुमकुम, चंदन सहित कई सामग्री से प्रतिमा का शृंगार होता है। रोज शाम होता है हवन मंदिर में गणेश चतुर्थी से 4 अक्टूबर तक रोज सुबह अभिषेक किया जा रहा है। इसमें पंचामृत के साथ अलग-अलग औषधियों का भी उपयोग किया जाता है। वहीं 14 सितंबर से रोज शाम 6 बजे हवन का आयोजन किया जा रहा है। मंदिर समिति के अनुसार पूजा और हवन 21 दिवसीय उत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। दक्षिण भारतीय शैली में हुआ श्रृंगार पुरोहित सोमदत्त ओझा ने बताया इस बार 17 सितंबर को श्री सुब्रह्मण्य स्वामी का कल्याणम और 20 सितंबर को श्री रिद्धि-सिद्धि गणपति कल्याणम हुआ। गणपति कल्याणम में भगवान गणेश का रिद्धि और सिद्धि के साथ दक्षिण भारतीय पद्धति से विवाह कराया गया। इस दौरान भगवान का शृंगार दक्षिण भारतीय शैली की पट्टू साड़ी और धोती-कुर्ते से किया गया। अब 25 सितंबर को श्री चक्रम पूजा एवं श्री ललिता सहस्रनाम पारायण होगा। इसके बाद 28 सितंबर को शाम श्री शिव-पार्वती कल्याणम और 30 सितंबर को शाम 56 भोग का आयोजन किया जाएगा। 4 अक्टूबर को सुबह 10 बजे पूर्णाहुति होगी। इसके बाद दोपहर 12 बजे से महाप्रसाद और भंडारे का आयोजन किया जाएगा। बड़ी संख्या में पहुंचते हैं श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने पहुंची अमला देवी ने बताया कि मंदिर में साल भर भीड़ रहती है लेकिन गणेश उत्सव और नवरात्र के समय यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मान्यता है कि यहां पर जो भक्त भगवान से जो भी मांगता है वह पूरा होता है। अमला ने बताया कि वह भी अपने परिवार के साथ मंदिर में भगवान के दर्शन के लिए आती है। 4 अक्टूबर को होगी लड्डू की नीलामी मंदिर समिति के अध्यक्ष जी. स्वामी ने बताया कि 21 दिवसीय उत्सव में अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठानों के जरिए श्रद्धालुओं को जोड़ा जाता है। प्रतिदिन पूजा, अभिषेक और हवन के साथ विशेष कार्यक्रम रखे गए हैं। उत्सव के अंतिम दिन 4 अक्टूबर को लड्डू की नीलामी भी होगी। नीलामी के बाद लड्डू को प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में बांटना यहां की पुरानी परंपरा है। 4 अक्टूबर को नीलामी, पूर्णाहुति और महाप्रसाद के साथ इस वर्ष का 21 दिवसीय गणेशोत्सव संपन्न होगा।

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