मुंबई में CJP के प्रदर्शन पर सौरव दास का बड़ा आरोप, बोले- ‘विरोध के लिए BJP ने भेजे कार्यकर्ता’

मुंबई में CJP के प्रदर्शन पर सौरव दास का बड़ा आरोप, बोले- ‘विरोध के लिए BJP ने भेजे कार्यकर्ता’

Mumbai Protest: मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास ने दावा किया है कि उनके प्रदर्शन का विरोध करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े कुछ लोगों को भेजा गया था। उन्होंने कहा कि इस संबंध में संगठन की ओर से तस्वीरें भी उपलब्ध कराई गई हैं, जिनमें कुछ स्थानीय लोगों के साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पूर्व OSD के भी दिखाई देने का दावा किया गया है।

सौरव दास ने कहा कि शिवाजी पार्क में हो रहे प्रदर्शन का स्थानीय लोगों की ओर से विरोध किए जाने को लेकर उन्हें संदेह है। उनके मुताबिक, तस्वीरों में कुछ ऐसे लोग नजर आ रहे हैं, जिन्हें वह प्रदर्शन का विरोध करने के लिए भेजे गए BJP कार्यकर्ता बता रहे हैं।

‘किसी का वोट नहीं छीना जाना चाहिए’

कॉकरोच जनता पार्टी के नेता ने कहा कि कोई भी स्थानीय निवासी या देश का नागरिक अपने वोट और अधिकारों को लेकर समझौता नहीं करना चाहता। उन्होंने कहा कि लोगों के मताधिकार और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाना जरूरी है। सौरभ दास ने आरोप लगाते हुए कहा कि लोग अपने वोट को लेकर चिंतित हैं और इसी वजह से CJP चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रही है। हालांकि, BJP की ओर से प्रदर्शन के विरोध में कार्यकर्ताओं को भेजे जाने के उनके दावे पर इस बयान में पार्टी की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

शिवाजी पार्क में प्रदर्शन को लेकर विवाद

मुंबई के शिवाजी पार्क में CJP की ओर से चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान संगठन की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी नारेबाजी और इस्तीफे की मांग की गई है। वहीं, पार्क के आसपास रहने वाले कुछ स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन को लेकर अपनी आपत्ति जताई । स्थानीय निवासियों का कहना है कि बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से इलाके में भीड़ बढ़ जाती है, जिससे यातायात प्रभावित होने के साथ-साथ आम लोगों की आवाजाही में भी परेशानी होती है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि पार्क में रोजाना बड़ी संख्या में लोग घूमने और मॉर्निंग वॉक के लिए आते हैं, ऐसे में लगातार होने वाले प्रदर्शनों से उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ता है। इसको लेकर प्रदर्शनकारियों और स्थानीय निवासियों के बीच मतभेद की स्थिति देखने को मिली।

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