गाजीपुर के गोरा बाजार स्थित महर्षि विश्वामित्र स्वशासी मेडिकल कॉलेज में दवा वितरण व्यवस्था पर सवाल उठ गए हैं। ओपीडी में इलाज कराने पहुंचे मरीजों ने आरोप लगाया है कि उन्हें लिखी गई कई दवाएं निशुल्क काउंटर से नहीं मिलीं, जिसके बाद उन्हें जन औषधि केंद्र या बाहर से दवाएं खरीदने को कहा गया। हालांकि, मेडिकल कॉलेज प्रशासन का दावा है कि अस्पताल में शासन की निर्धारित सूची के अनुसार दवाओं का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और मरीजों को परिसर में ही दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।रामपुर माझा शेखपुर निवासी रविंद्र यादव ने बताया कि वे पेट दर्द और शुगर की समस्या के इलाज के लिए ओपीडी आए थे। उन्हें डॉक्टर द्वारा लिखी गई कई दवाओं में से निशुल्क काउंटर से केवल एक दवा मिली। बाकी दवाओं के लिए उन्हें पुरानी बिल्डिंग स्थित जन औषधि केंद्र भेजा गया, जहां उन्हें भुगतान कर दवाएं खरीदनी पड़ीं। रविंद्र ने सवाल उठाया कि जब सरकार निशुल्क दवा की व्यवस्था का दावा करती है, तो मरीजों को दवा के लिए अलग-अलग काउंटरों पर क्यों भेजा जा रहा है। रेवतीपुर निवासी संतोष कुमार अपने पिता के घुटनों के दर्द और सूजन का इलाज कराने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि डॉक्टर ने सात दवाएं लिखी थीं, जिनमें से केवल दो दवाएं निशुल्क मिलीं। इसके बाद उन्हें जन औषधि केंद्र भेजा गया, जहां से दो और दवाएं मिलीं। संतोष के अनुसार, शेष दवाओं को बाहर से खरीदने के लिए कहा गया। उन्होंने पूछा कि यदि अस्पताल में दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था है, तो मरीजों को सभी दवाएं एक ही स्थान पर क्यों नहीं मिलतीं। कुंडेश्वर से आए गणेश गुप्ता ने भी ऐसी ही शिकायत की। उन्होंने बताया कि उन्हें निशुल्क काउंटर से केवल एक दवा मिली, जबकि अन्य दवाओं के लिए उन्हें जन औषधि केंद्र से भुगतान कर दवाएं लेनी पड़ीं। इसी तरह एक अन्य मरीज रविंद्र ने बताया कि गैस की समस्या को लेकर उन्होंने डॉक्टर साकेत अहमद को दिखाया था। उनके मुताबिक ओपीडी के नीचे निशुल्क काउंटर से एक दवा मिली और बाकी के लिए जन औषधि केंद्र जाने को कहा गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अस्पताल में कोई दवा उपलब्ध नहीं है तो उसे पर्चे पर लिखे जाने की जरूरत क्यों पड़ती है। प्राचार्य बोले- अस्पताल में दवाओं की कमी नहीं
मरीजों के आरोपों पर महर्षि विश्वामित्र स्वशासी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य आनंद मिश्रा ने कहा कि अस्पताल में शासन की निर्धारित सूची के अनुसार दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने बताया कि मरीजों को दवा उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल में फार्मेसी, जन औषधि केंद्र और अमृत फार्मेसी की व्यवस्था है और दवाएं अस्पताल परिसर में ही उपलब्ध कराई जाती हैं। प्राचार्य ने कहा कि हाल ही में दवाओं का पूरा स्टॉक आया है और उन्होंने स्वयं स्टॉक की जांच की है। उनके मुताबिक अस्पताल में उपलब्ध दवाओं की सूची डॉक्टरों के सामने रहती है और डॉक्टरों को उसी के अनुसार दवा लिखने के निर्देश दिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों को समय-समय पर नोटिस देकर जेनेरिक दवाएं लिखने और अस्पताल में उपलब्ध दवाओं को ही पर्चे पर लिखने के निर्देश दिए जाते हैं। कुछ मामलों में किसी दवा का साल्ट लिखना पड़ता है, लेकिन प्राचार्य के अनुसार संबंधित दवा अमृत फार्मेसी में उपलब्ध कराई जाती है। बाहर की दवा लिखी तो प्राचार्य खुद कराएंगे जांच मरीजों के उस आरोप पर कि उन्हें अस्पताल की दवा उपलब्ध कराने के बजाय बाहर से दवा खरीदने को कहा गया, प्राचार्य आनंद मिश्रा ने स्पष्ट कहा कि यदि डॉक्टर अस्पताल में उपलब्ध दवा के बजाय बाहर की दवा लिख रहे हैं तो वह इसकी जांच कराएंगे। यानी अब सवाल सिर्फ दवा उपलब्ध होने या न होने का नहीं, बल्कि पर्चे पर लिखी दवा और अस्पताल के वास्तविक स्टॉक के बीच तालमेल का भी है।

