मधेपुरा- रेल इंजन कारखाना से सुविधाएं नहीं मिलने पर नाराजगी:ग्रामीण बोले-जमीन गई, नौकरी नहीं मिली; 12 हजार HP इंजन बनते हैं, फिर भी सड़क-पानी की कमी

मधेपुरा- रेल इंजन कारखाना से सुविधाएं नहीं मिलने पर नाराजगी:ग्रामीण बोले-जमीन गई, नौकरी नहीं मिली; 12 हजार HP इंजन बनते हैं, फिर भी सड़क-पानी की कमी

मधेपुरा में विद्युत रेल इंजन कारखाना क्षेत्र के आसपास रहने वाले ग्रामीण अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिलने से नाराज हैं। रविवार को चकला में ग्रामीणों की बैठक हुई। इसमें कारखाना से प्रभावित परिवारों की समस्याओं और सीएसआर के तहत होने वाले विकास कार्यों पर चर्चा की गई। ग्रामीणों ने कहा कि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो कारखाना प्रबंधन के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। प्रबंध निदेशक को सौंपेंगे मांगों का पत्र बैठक में कारखाना के प्रबंध निदेशक को मांगों से जुड़ा पत्र देने का निर्णय लिया गया। ग्रामीणों ने पत्र में कहा है कि कारखाना क्षेत्र के आसपास रहने वाले लोगों को सीएसआर और जनकल्याणकारी योजनाओं का पर्याप्त लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने सीएसआर के काम में पारदर्शिता की मांग भी की है। ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय समस्याओं को लेकर कई बार कारखाना प्रबंधन का ध्यान आकृष्ट कराया गया, लेकिन अब तक उनका समाधान नहीं हुआ। सड़क, सिंचाई और पीने के पानी की मांग ग्रामीणों ने चकला चौक से नहर तक सड़क की मरम्मत कराने की मांग की है। चकला और श्रीपुर के प्रभावित परिवारों के खेतों की सिंचाई के लिए सोलर पंप से पानी की व्यवस्था कराने और गांव में साफ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए आरओ लगाने की मांग भी रखी गई। इसके अलावा ग्रामीणों ने योग्यता के अनुसार स्थानीय लोगों को रोजगार देने, चकला और श्रीपुर में विवाह भवन बनाने और गोद लिए गए गांव के सभी परिवारों तक बिजली की सुविधा पहुंचाने की मांग की है। चकला और श्रीपुर के बीच पूर्वी और पश्चिमी नहर पर छठ घाट बनाने, ईदगाह की चारदीवारी कराने और जिन घरों में सोलर लाइट नहीं है, वहां सोलर प्रकाश की व्यवस्था करने की मांग भी की गई। जमीन के बदले नौकरी का वादा पूरा नहीं होने का आरोप पूर्व मुखिया देवराज अर्श ने कहा कि फैक्ट्री निर्माण से पहले प्रभावित परिवारों के एक सदस्य को जमीन के बदले नौकरी देने की बात कही गई थी। उनका आरोप है कि जमीन देने वाले कई परिवारों को अब तक नौकरी नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि सीएसआर के तहत कंपनी के लाभ का 2 प्रतिशत क्षेत्र के विकास में खर्च किया जाना चाहिए, लेकिन स्थानीय लोगों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगे जाने के बावजूद जवाब नहीं मिलने का भी आरोप लगाया। जमीन चली गई, अब रोजगार और आय का संकट बालम गढ़िया के मुखिया रंजीत कुमार ने कहा कि कई लोगों की पूरी जमीन कारखाना के लिए चली गई। मुआवजे की राशि भी धीरे-धीरे खत्म हो गई। ऐसे परिवारों के सामने अब रोजगार और आय का संकट है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को नौकरी मिली भी है तो उन्हें कम वेतन वाली फोर्थ ग्रेड की नौकरी दी गई है। सीएसआर की राशि के इस्तेमाल पर भी सवाल पूर्व पैक्स अध्यक्ष भूषण कुमार ने कहा कि कारखाना से प्रभावित परिवारों के लिए सीएसआर की राशि खर्च होनी चाहिए। उनका आरोप है कि राशि का सही जगह इस्तेमाल नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि निगरानी कमेटी के सदस्यों से भी विकास कार्यों को लेकर राय नहीं ली जाती है। मांगें पूरी नहीं हुईं तो होगा आंदोलन ग्रामीणों ने कहा कि उनकी मांगों का समाधान नहीं होने पर कारखाना प्रबंधन के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। मांगों से संबंधित पत्र की प्रतिलिपि जिलाधिकारी और रेल मंत्री को भी भेजने की बात कही गई है। बैठक में सुधीर कुमार, पूर्व मुखिया अनिल अनल, अरविंद यादव, विनोद कुमार विमान, चंदन कुमार सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे। 12 हजार हॉर्स पावर का इंजन बनता है कारखाने में दरअसल, मधेपुरा में इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव कारखाना 12 हजार हॉर्स पावर का इलेक्ट्रिक रेल इंजन तैयार करता है। यह कारखाना भारतीय रेलवे और फ्रांस की कंपनी एल्सटॉम का संयुक्त उपक्रम है। 10 अप्रैल 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कारखाने का उद्घाटन किया था। मधेपुरा में विद्युत रेल इंजन कारखाना क्षेत्र के आसपास रहने वाले ग्रामीण अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिलने से नाराज हैं। रविवार को चकला में ग्रामीणों की बैठक हुई। इसमें कारखाना से प्रभावित परिवारों की समस्याओं और सीएसआर के तहत होने वाले विकास कार्यों पर चर्चा की गई। ग्रामीणों ने कहा कि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो कारखाना प्रबंधन के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। प्रबंध निदेशक को सौंपेंगे मांगों का पत्र बैठक में कारखाना के प्रबंध निदेशक को मांगों से जुड़ा पत्र देने का निर्णय लिया गया। ग्रामीणों ने पत्र में कहा है कि कारखाना क्षेत्र के आसपास रहने वाले लोगों को सीएसआर और जनकल्याणकारी योजनाओं का पर्याप्त लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने सीएसआर के काम में पारदर्शिता की मांग भी की है। ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय समस्याओं को लेकर कई बार कारखाना प्रबंधन का ध्यान आकृष्ट कराया गया, लेकिन अब तक उनका समाधान नहीं हुआ। सड़क, सिंचाई और पीने के पानी की मांग ग्रामीणों ने चकला चौक से नहर तक सड़क की मरम्मत कराने की मांग की है। चकला और श्रीपुर के प्रभावित परिवारों के खेतों की सिंचाई के लिए सोलर पंप से पानी की व्यवस्था कराने और गांव में साफ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए आरओ लगाने की मांग भी रखी गई। इसके अलावा ग्रामीणों ने योग्यता के अनुसार स्थानीय लोगों को रोजगार देने, चकला और श्रीपुर में विवाह भवन बनाने और गोद लिए गए गांव के सभी परिवारों तक बिजली की सुविधा पहुंचाने की मांग की है। चकला और श्रीपुर के बीच पूर्वी और पश्चिमी नहर पर छठ घाट बनाने, ईदगाह की चारदीवारी कराने और जिन घरों में सोलर लाइट नहीं है, वहां सोलर प्रकाश की व्यवस्था करने की मांग भी की गई। जमीन के बदले नौकरी का वादा पूरा नहीं होने का आरोप पूर्व मुखिया देवराज अर्श ने कहा कि फैक्ट्री निर्माण से पहले प्रभावित परिवारों के एक सदस्य को जमीन के बदले नौकरी देने की बात कही गई थी। उनका आरोप है कि जमीन देने वाले कई परिवारों को अब तक नौकरी नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि सीएसआर के तहत कंपनी के लाभ का 2 प्रतिशत क्षेत्र के विकास में खर्च किया जाना चाहिए, लेकिन स्थानीय लोगों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगे जाने के बावजूद जवाब नहीं मिलने का भी आरोप लगाया। जमीन चली गई, अब रोजगार और आय का संकट बालम गढ़िया के मुखिया रंजीत कुमार ने कहा कि कई लोगों की पूरी जमीन कारखाना के लिए चली गई। मुआवजे की राशि भी धीरे-धीरे खत्म हो गई। ऐसे परिवारों के सामने अब रोजगार और आय का संकट है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को नौकरी मिली भी है तो उन्हें कम वेतन वाली फोर्थ ग्रेड की नौकरी दी गई है। सीएसआर की राशि के इस्तेमाल पर भी सवाल पूर्व पैक्स अध्यक्ष भूषण कुमार ने कहा कि कारखाना से प्रभावित परिवारों के लिए सीएसआर की राशि खर्च होनी चाहिए। उनका आरोप है कि राशि का सही जगह इस्तेमाल नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि निगरानी कमेटी के सदस्यों से भी विकास कार्यों को लेकर राय नहीं ली जाती है। मांगें पूरी नहीं हुईं तो होगा आंदोलन ग्रामीणों ने कहा कि उनकी मांगों का समाधान नहीं होने पर कारखाना प्रबंधन के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। मांगों से संबंधित पत्र की प्रतिलिपि जिलाधिकारी और रेल मंत्री को भी भेजने की बात कही गई है। बैठक में सुधीर कुमार, पूर्व मुखिया अनिल अनल, अरविंद यादव, विनोद कुमार विमान, चंदन कुमार सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे। 12 हजार हॉर्स पावर का इंजन बनता है कारखाने में दरअसल, मधेपुरा में इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव कारखाना 12 हजार हॉर्स पावर का इलेक्ट्रिक रेल इंजन तैयार करता है। यह कारखाना भारतीय रेलवे और फ्रांस की कंपनी एल्सटॉम का संयुक्त उपक्रम है। 10 अप्रैल 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कारखाने का उद्घाटन किया था।  

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