भोजपुर में आशा कार्यकर्ताओं और फैसिलिटेटरों ने बकाया मानदेय-प्रोत्साहन राशि के भुगतान की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। जिला स्तर DPM कार्यालय के पास एक दिवसीय धरना दिया और जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने विभाग पर भुगतान में देरी करने और सही जानकारी नहीं देने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि वे दिन-रात स्वास्थ्य विभाग के कार्यों में लगी रहती हैं, लेकिन समय पर राशि नहीं मिलने के कारण अब परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। स्कूल की फीस तक जमा नहीं हो पा रही है, जिससे बच्चों का नाम काटने की नौबत आ गई है। ‘सही से जानकारी भी नहीं दी जा रही’ आशा कार्यकर्ता आशा देवी ने बताया कि मार्च 2024 से राज्य मद एवं एनएचएम मद की राशि का भुगतान लंबित है। वहीं जून 2026 से अब तक एनएचएम मद की राशि और फरवरी 2026 से अब तक राज्य मद की राशि नहीं मिली है। फैसिलिटेटरों का फाइलेरिया कार्यक्रम से संबंधित भुगतान और सात दिवसीय इंडक्शन ट्रेनिंग की राशि भी लंबित बताई गई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि भुगतान के संबंध में विभागीय स्तर पर स्पष्ट जानकारी भी नहीं दी जा रही है। संस्थान में आवंटन नहीं होने की बात कहकर उन्हें वापस कर दिया जाता है, जबकि अन्य स्टाफ का भुगतान होने की जानकारी मिलती है। त्योहार से पहले पेमेंट की मांग आशा एवं फैसिलिटेटरों ने कहा कि होली-ईद जैसे त्योहार भी बिना भुगतान के गुजर गए। अब दुर्गा पूजा, दीपावली और छठ जैसे बड़े त्योहार सामने हैं। ऐसे में यदि समय पर बकाया राशि का भुगतान नहीं हुआ तो परिवारों के सामने आर्थिक संकट और गहरा जाएगा। जिला मुख्यालय तक पहुंचने में भी उन्हें अपनी जेब से करीब 100 रुपए किराया खर्च करना पड़ा। यदि प्रखंड स्तर पर भुगतान की स्थिति की सही जानकारी मिल जाती तो इतनी दूर आने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने विभाग से मांग की कि लंबित राशि के भुगतान की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए और त्योहारों से पहले सभी बकाए का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही स्कूल फीस समेत घरेलू जरूरतों को देखते हुए नियमित भुगतान की व्यवस्था की जाए। उग्र प्रदर्शन की चेतावनी आशा एवं फैसिलिटेटरों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे कार्य बहिष्कार कर हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होंगी। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि काम करने के साथ-साथ अपने मेहनताने के लिए बार-बार कार्यालयों का चक्कर लगाना उचित नहीं है। भोजपुर में आशा कार्यकर्ताओं और फैसिलिटेटरों ने बकाया मानदेय-प्रोत्साहन राशि के भुगतान की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। जिला स्तर DPM कार्यालय के पास एक दिवसीय धरना दिया और जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने विभाग पर भुगतान में देरी करने और सही जानकारी नहीं देने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि वे दिन-रात स्वास्थ्य विभाग के कार्यों में लगी रहती हैं, लेकिन समय पर राशि नहीं मिलने के कारण अब परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। स्कूल की फीस तक जमा नहीं हो पा रही है, जिससे बच्चों का नाम काटने की नौबत आ गई है। ‘सही से जानकारी भी नहीं दी जा रही’ आशा कार्यकर्ता आशा देवी ने बताया कि मार्च 2024 से राज्य मद एवं एनएचएम मद की राशि का भुगतान लंबित है। वहीं जून 2026 से अब तक एनएचएम मद की राशि और फरवरी 2026 से अब तक राज्य मद की राशि नहीं मिली है। फैसिलिटेटरों का फाइलेरिया कार्यक्रम से संबंधित भुगतान और सात दिवसीय इंडक्शन ट्रेनिंग की राशि भी लंबित बताई गई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि भुगतान के संबंध में विभागीय स्तर पर स्पष्ट जानकारी भी नहीं दी जा रही है। संस्थान में आवंटन नहीं होने की बात कहकर उन्हें वापस कर दिया जाता है, जबकि अन्य स्टाफ का भुगतान होने की जानकारी मिलती है। त्योहार से पहले पेमेंट की मांग आशा एवं फैसिलिटेटरों ने कहा कि होली-ईद जैसे त्योहार भी बिना भुगतान के गुजर गए। अब दुर्गा पूजा, दीपावली और छठ जैसे बड़े त्योहार सामने हैं। ऐसे में यदि समय पर बकाया राशि का भुगतान नहीं हुआ तो परिवारों के सामने आर्थिक संकट और गहरा जाएगा। जिला मुख्यालय तक पहुंचने में भी उन्हें अपनी जेब से करीब 100 रुपए किराया खर्च करना पड़ा। यदि प्रखंड स्तर पर भुगतान की स्थिति की सही जानकारी मिल जाती तो इतनी दूर आने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने विभाग से मांग की कि लंबित राशि के भुगतान की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए और त्योहारों से पहले सभी बकाए का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही स्कूल फीस समेत घरेलू जरूरतों को देखते हुए नियमित भुगतान की व्यवस्था की जाए। उग्र प्रदर्शन की चेतावनी आशा एवं फैसिलिटेटरों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे कार्य बहिष्कार कर हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होंगी। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि काम करने के साथ-साथ अपने मेहनताने के लिए बार-बार कार्यालयों का चक्कर लगाना उचित नहीं है।

