भागलपुर के पुरानी रामनगर में कटाव से स्कूल बंद:बच्चे NH क्रॉस कर दूसरे गांव पढ़ने जाते, हादसे का डर; करोड़ों खर्च के बाद सुधार नहीं

भागलपुर के पुरानी रामनगर में कटाव से स्कूल बंद:बच्चे NH क्रॉस कर दूसरे गांव पढ़ने जाते, हादसे का डर; करोड़ों खर्च के बाद सुधार नहीं

भागलपुर मे गंगा कटाव से पुरानी रामनगर गांव के बच्चे परेशान है। पढ़ाई जारी रखने के लिए छोटे-छोटे बच्चों को दूसरे गांव जाना पड़ रहा है। रास्ते में नेशनल हाईवे पार करना पड़ता है, जहां तेज रफ्तार वाहनों के बीच हर दिन हादसे का खतरा बना रहता है। वापसी में कटाव से जर्जर बांध और कच्चे रास्ते से गुजरना पड़ता है। सबौर प्रखंड की मामलखा पंचायत के इस गांव में बच्चों की पढ़ाई के साथ उनकी सुरक्षा भी बड़ी चिंता बन गई है। कटाव के मुहाने पर पहुंचा स्कूल, पढ़ाई पर असर पुरानी रामनगर में गंगा का कटाव लगातार जमीन को अपनी चपेट में ले रहा है। गांव के कई पक्के मकान और उपजाऊ खेत नदी में समा चुके हैं। अब सरकारी विद्यालय भी कटाव के मुहाने पर पहुंच गया है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल बंद करना पड़ा। इसके बाद विद्यार्थियों को दूसरे गांव के विद्यालय में पढ़ने जाना पड़ रहा है। दूरी और रास्ते की मुश्किलों के कारण उनकी नियमित पढ़ाई प्रभावित होने का खतरा है। हाईवे पार करते समय हादसे का डर दूसरे गांव के स्कूल जाने के लिए बच्चों को पैदल लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। रास्ते में नेशनल हाईवे पड़ता है, जहां तेज रफ्तार वाहनों के बीच सड़क पार करना उनके लिए जोखिम भरा है। कम उम्र के बच्चों के लिए यातायात के बीच सुरक्षित तरीके से सड़क पार करना आसान नहीं है। अभिभावकों को भी बच्चों को रोज इस रास्ते से भेजने की चिंता बनी रहती है। करोड़ों खर्च के बाद भी कटाव की चुनौती सरकार की ओर से करोड़ों रुपए खर्च कर कटावरोधी कार्य कराए गए हैं, लेकिन पुरानी रामनगर में हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। कटाव से घर, खेत और अब स्कूल पर संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा के साथ उनकी पढ़ाई जारी रखने के लिए स्थायी व्यवस्था की जरूरत है। अब सवाल ये है कि जब गांव का स्कूल ही सुरक्षित नहीं रहा, तो बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन संभालेगा? भागलपुर मे गंगा कटाव से पुरानी रामनगर गांव के बच्चे परेशान है। पढ़ाई जारी रखने के लिए छोटे-छोटे बच्चों को दूसरे गांव जाना पड़ रहा है। रास्ते में नेशनल हाईवे पार करना पड़ता है, जहां तेज रफ्तार वाहनों के बीच हर दिन हादसे का खतरा बना रहता है। वापसी में कटाव से जर्जर बांध और कच्चे रास्ते से गुजरना पड़ता है। सबौर प्रखंड की मामलखा पंचायत के इस गांव में बच्चों की पढ़ाई के साथ उनकी सुरक्षा भी बड़ी चिंता बन गई है। कटाव के मुहाने पर पहुंचा स्कूल, पढ़ाई पर असर पुरानी रामनगर में गंगा का कटाव लगातार जमीन को अपनी चपेट में ले रहा है। गांव के कई पक्के मकान और उपजाऊ खेत नदी में समा चुके हैं। अब सरकारी विद्यालय भी कटाव के मुहाने पर पहुंच गया है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल बंद करना पड़ा। इसके बाद विद्यार्थियों को दूसरे गांव के विद्यालय में पढ़ने जाना पड़ रहा है। दूरी और रास्ते की मुश्किलों के कारण उनकी नियमित पढ़ाई प्रभावित होने का खतरा है। हाईवे पार करते समय हादसे का डर दूसरे गांव के स्कूल जाने के लिए बच्चों को पैदल लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। रास्ते में नेशनल हाईवे पड़ता है, जहां तेज रफ्तार वाहनों के बीच सड़क पार करना उनके लिए जोखिम भरा है। कम उम्र के बच्चों के लिए यातायात के बीच सुरक्षित तरीके से सड़क पार करना आसान नहीं है। अभिभावकों को भी बच्चों को रोज इस रास्ते से भेजने की चिंता बनी रहती है। करोड़ों खर्च के बाद भी कटाव की चुनौती सरकार की ओर से करोड़ों रुपए खर्च कर कटावरोधी कार्य कराए गए हैं, लेकिन पुरानी रामनगर में हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। कटाव से घर, खेत और अब स्कूल पर संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा के साथ उनकी पढ़ाई जारी रखने के लिए स्थायी व्यवस्था की जरूरत है। अब सवाल ये है कि जब गांव का स्कूल ही सुरक्षित नहीं रहा, तो बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन संभालेगा?  

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