संतकबीर नगर के खलीलाबाद में ब्रिटिश नागरिक मौलाना शमशुलहुदा खान से जुड़ी शैक्षिक संस्था के नाम खरीदी गई 640 वर्गमीटर कृषि भूमि का बैनामा एसडीएम कोर्ट ने निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने भूमि को राज्य सरकार में निहित करने का आदेश दिया है। गाटा संख्या 154 मि. की इस जमीन पर किए गए निर्माण को भी सरकारी संपत्ति घोषित किया गया है। मामला वर्ष 2014 में संस्था के नाम कृषि भूमि के बैनामे से जुड़ा है। कोर्ट के अनुसार, भूमि खरीदने से पहले उत्तर प्रदेश सरकार से आवश्यक अनुमति लिए जाने का कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया। न्यायालय ने इसे उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 90 के प्रावधानों का उल्लंघन मानते हुए बैनामे को शून्य कर दिया। अब राजस्व अभिलेखों से संस्था का नाम हटाकर राज्य सरकार का नाम दर्ज किया जाएगा। 2013 में ब्रिटिश नागरिकता लेने के बाद 2014 में कराया बैनामा अभियोजन पक्ष के अनुसार, शमशुलहुदा खान ने 19 दिसंबर 2013 को ब्रिटेन की नागरिकता प्राप्त की थी। ब्रिटिश पासपोर्ट और देशीकरण प्रमाण पत्र से इसकी पुष्टि हुई। इसके बाद 2 सितंबर 2014 को उनकी सरपरस्ती वाली कुल्लियातुल बनातिर रजविया एजूकेशनल एंड वेलफेयर सोसायटी, रजानगर, गोश्त मंडी रोड, खलीलाबाद के नाम कृषि भूमि का बैनामा कराया गया। मामले की सुनवाई के दौरान संस्था के प्रबंधक तौसीफ रजा खान और सरपरस्त शमशुलहुदा खान की ओर से बैनामे से पहले राज्य सरकार से लिखित अनुमति लेने का कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया जा सका। कोर्ट ने संबंधित कानूनी प्रावधानों और न्यायिक निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि कानून के विपरीत किया गया ऐसा हस्तांतरण शून्य है। पहले डीएम के आदेश पर भी हुई थी कार्रवाई, हाईकोर्ट पहुंचा मामला इस जमीन को लेकर पहले भी प्रशासनिक कार्रवाई हो चुकी है। जिलाधिकारी ने 12 फरवरी 2024 को भूमि को राज्य सरकार में निहित करने का आदेश दिया था। बाद में मंडलायुक्त बस्ती के स्तर से मामला रिमांड किए जाने के बाद डीएम ने 14 नवंबर 2025 को उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 104 के तहत बैनामे को शून्य मानते हुए भूमि को सरकार में निहित कर दिया था। इसके बाद जमीन पर बने निर्माण को ध्वस्त करने की कार्रवाई भी शुरू की गई थी। संस्था ने इन आदेशों के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने 15 मई 2026 को संबंधित आदेशों को क्षेत्राधिकार के आधार पर निरस्त करते हुए मामले के निस्तारण के लिए एसडीएम खलीलाबाद को सक्षम प्राधिकारी माना था। इसके बाद एसडीएम कोर्ट में धारा 104/105 के तहत वाद दर्ज कर सुनवाई की गई। 640 वर्गमीटर जमीन और निर्माण सरकार में निहित होगा सुनवाई के दौरान संस्था या विक्रेता की ओर से बैनामे से पहले राज्य सरकार से आवश्यक अनुमति लिए जाने का कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका। न्यायालय ने हल्का लेखपाल की 26 मई 2026 की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए खतौनी फसली 1427-1432 में दर्ज संस्था का नाम हटाने का निर्देश दिया है। आदेश के अनुसार, गाटा संख्या 154 मि. की 640 वर्गमीटर भूमि और उस पर किया गया निर्माण, यदि कोई है, 2 सितंबर 2014 की क्रय तिथि से सभी भारों से मुक्त होकर राज्य सरकार में निहित होगा। राजस्व अभिलेखों में आवश्यक प्रविष्टियां करने के लिए आदेश की प्रति तहसीलदार खलीलाबाद को भेजी जाएगी। एसडीएम बोले- हाईकोर्ट को आदेश से कराया जाएगा अवगत एसडीएम खलीलाबाद हृदयराम तिवारी ने बताया कि आदेश से हाईकोर्ट को अवगत कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि रिट याचिका संख्या 17032/2026 में हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। हाईकोर्ट से मिलने वाले अग्रिम आदेश के परिप्रेक्ष्य में प्रशासन कार्रवाई पूरी करेगा।

