बैतूल में गांवों की बदहाली पर युवाओं की डिजिटल मुहिम:पोहर से मांडवी तक कीचड़ भरी सड़कें दिखाकर रील्स में समाधान और आंदोलन की तारीख बता रहे युवा

बैतूल में गांवों की बदहाली पर युवाओं की डिजिटल मुहिम:पोहर से मांडवी तक कीचड़ भरी सड़कें दिखाकर रील्स में समाधान और आंदोलन की तारीख बता रहे युवा

बैतूल जिले में ग्रामीण अब अपनी समस्याओं को उठाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। गांव की बदहाल सड़कों और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर युवा इंस्टाग्राम और फेसबुक पर रील बना रहे हैं। इन वीडियो के जरिए वे अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से समाधान की मांग कर रहे हैं। मुल्ताई के पोहर और आठनेर के मांडवी जैसे कई गांवों में यह तरीका अपनाया जा रहा है। इन वीडियो में बारिश के बाद कीचड़ से भरी सड़कें दिखाई जाती हैं। कई ग्रामीण खुद कैमरे के सामने आकर अपनी परेशानी बताते हैं। कुछ युवा तो सोशल मीडिया के जरिए आंदोलन और प्रदर्शन की तारीखें भी बता रहे हैं, ताकि ज्यादा लोग उनसे जुड़ सकें। बारिश के दिनों में गांवों की खराब सड़कों की समस्या और बढ़ जाती है। कच्चे और टूटे रास्तों पर पानी और कीचड़ जमा होने से पैदल चलना मुश्किल हो जाता है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को इन रास्तों से निकलने में काफी परेशानी होती है। कीचड़ के कारण चलना तक मुश्किल हुआ
ग्रामीण बताते हैं कि कीचड़ इतना ज्यादा हो जाता है कि चलना मुश्किल होता है। बाजार में दुकान लगाना भी आसान नहीं रहता। बारिश के समय रोजमर्रा के कामों के लिए गांव से बाहर निकलना भी कठिन हो जाता है। ग्रामीणों की मुख्य नाराजगी यह है कि पंचायत स्तर पर सड़क और अन्य सुविधाओं के लिए पैसा खर्च होने के बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो रहा है। युवा अब कैमरे के सामने यही सवाल उठा रहे हैं कि जब सड़क पर पैसा खर्च होता है, तो बारिश आते ही वह फिर से कीचड़ में क्यों बदल जाती है? शिकायत से आगे बढ़ा सोशल मीडिया का इस्तेमाल
सोशल मीडिया पर गांव की समस्या उठाने का यह तरीका केवल वीडियो बनाने तक सीमित नहीं है। युवा रील के जरिए समस्या दिखाने के साथ लोगों को जोड़ रहे हैं और अधिकारियों का ध्यान खींचने की कोशिश कर रहे हैं। आंदोलन की तारीख घोषित करना और ग्रामीणों से उसमें शामिल होने की अपील करना भी इसी डिजिटल मुहिम का हिस्सा बन रहा है। जंतर-मंतर पर ग्रामीण और जनसमस्याओं को लेकर हुए आंदोलनों के बाद सोशल मीडिया के जरिए स्थानीय मुद्दों को संगठित तरीके से सामने रखने की प्रवृत्ति पर भी चर्चा हुई है। अब इसका स्थानीय असर बैतूल के गांवों में दिखाई दे रहा है, जहां मोबाइल कैमरा ग्रामीणों के लिए शिकायत और दबाव बनाने का नया माध्यम बनता जा रहा है। पोहर से मांडवी तक उठ रही ये डिजिटल आवाजें यह भी दिखा रही हैं कि गांव का युवा अब समस्या को सिर्फ अधिकारियों तक पहुंचाना नहीं चाहता, बल्कि उसे सार्वजनिक मंच पर दिखाकर जवाब और समाधान की मांग कर रहा है।

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