“मेरे बेटे ने गलती की है तो कानून के मुताबिक सजा दें, मुझे मंजूर है। उसे जेल में रखें, लेकिन उसकी जान नहीं जानी चाहिए। सरकार से मेरी यही मांग है कि मेरे बेटे की जिंदगी बचाई जाए और मुझे उसकी हालत और इलाज की जानकारी दी जाए।” ये कहना है जमुई छेड़खानी के मुख्य आरोपी नंदन यादव की मां का। वो अपने बेटे से एक बार मिलना चाह रही है, लेकिन उनका आरोप है कि पुलिस उन्हें अपने बेटे से न मिलने दे रही है, न ही उसकी तस्वीर दिखा रही है। दरअसल, जमुई में नाबालिग छात्रा से बदसलूकी और उसका वीडियो बनाए जाने के मामले में पुलिस कार्रवाई के बाद भास्कर की टीम मुख्य आरोपी नंदन यादव और आरोपी हरेराम यादव के गांव पहुंची। गांव में घटना को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं हैं। एक तरफ ग्रामीण और परिवार के लोग पुलिस की कार्रवाई के बाद नंदन की स्थिति को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस पूरे मामले में आरोपियों की भूमिका और वायरल वीडियो के आधार पर कार्रवाई की बात कह रही है। पहले घटना से जुड़ी तस्वीरें देखिए… परिवार ने जाति के आधार पर भेदभाव का आरोप लगाया है- पुलिस इस आरोप पर क्या कहती है? नंदन की मां पुलिस से क्या मांग कर रही हैं? 21 सितंबर को पुलिस नंदन के गांव क्यों पहुंची थी? नंदन की भाभी का पुलिस से क्या है सवाल? इन सारे सवालों का जवाब दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में पढ़िए… दैनिक भास्कर की टीम जिला मुख्यालय से 15KM और घटनास्थल से सिर्फ एक किमी दूर मुख्य आरोपी नंदन यादव और हरेराम यादव के गांव पहुंची। इस दौरान नंदन के परिवार और गांव वालों ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कच्ची सड़कों से होते हुए हमारी टीम नंदन के घर पहुंची, जहां हमें उसकी मां और भाभी निशा कुमारी मिली। इस दौरान दोनों ने पुलिस कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठाए हैं।परिवार की सबसे बड़ी चिंता फिलहाल नंदन की हालत को लेकर है। मां का कहना है कि वह अपने बेटे से मिलना चाहती हैं, उसकी चोट देखना चाहती हैं और यह जानना चाहती हैं कि उसका इलाज किस स्थिति में चल रहा है। ‘मेरे बेटे के साथ कुछ हुआ तो पुलिस जिम्मेदार होगी’ नंदन की मां से जब भास्कर की टीम ने बात की तो उनकी सबसे पहली चिंता बेटे की सुरक्षा को लेकर थी। उन्होंने कहा, हमें अपने बेटे से मिलना है। उसकी हालत जाननी है। उसे देखना चाहते हैं कि उसका इलाज हो रहा है या नहीं। चोट कहां लगी है, यह भी देखना चाहते हैं। वहीं, मां ने पुलिस के गांव पहुंचने की पूरी घटना भी बताई। कहा- 21 सितंबर की दोपहर पुलिस हमारे गांव पहुंची थी। इस दौरान अपने घर में कमरे में सो रही थी। पुलिस आई और अचानक से पूछना शुरू कर दिया, आपका बेटा नंदन कहां है? जब मैंने उनसे पूछा- क्यों क्या हुआ है? इसके बाद मैंने पुलिस को बताया कि वह गांव में कहीं गया होगा। दोस्तों के साथ घूम रहा होगा। इसके बाद पुलिस ने कथित तौर पर कहा कि बेटे को जल्दी बुलाओ, नहीं तो परिवार के लोगों को थाने ले जाया जाएगा। जब मैंने पुलिस से पूछा कि आखिर मामला क्या है, तब पुलिस ने मुझे घटना से जुड़ा वीडियो दिखाया। इस दौरान मैं कुछ बोलने लायक नहीं रही। मैं फोन नहीं चलाती हूं, इसी वजह से मुझे घटना के बारे नहीं पता चल सका। करीब आधे घंटे तक पुलिस मेरे घर पर मौजूद रही। फिर उनलोगों ने मेरी प्रेग्नेंट बहू और मुझे अपने साथ थाना ले गई। हम दोनों को करीब 10 घंटे से ज्यादा समय तक पुलिस थाने में रखा गया। भाभी निशा बोलीं- ‘नंदन के साथ बहुत गलत किया गया’ नंदन की भाभी निशा कुमारी ने कहा, परिवार को नंदन की हालत की पूरी जानकारी नहीं दी जा रही है। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा, परिवार को यह जानना चाहिए कि नंदन को गोली कैसे लगी और उसकी वर्तमान स्थिति क्या है। नंदन के साथ बहुत गलत किया गया। उसे नदी के पास गोली मार दी गई। उसके बाद से उसकी कोई तस्वीर तक सामने नहीं आई है। पुलिस जो बोल रही है कि नंदन भाग रहा था, इसी वजह से पुलिस ने गोली चलाई है, ये बिल्कुल गलत है। नंदन को पुलिस ने पहले पकड़ा और उसके बाद गोली मार दी। निशा ने कहा, इस कांड में अगर कई आरोपी हैं तो जांच और कार्रवाई सभी के खिलाफ होनी चाहिए। कार्रवाई में जाति के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है। अगर सात लोग आरोपी हैं तो सातों पर गोली चलनी चाहिए, सिर्फ मेरे परिवार के लोगों पर ही कार्रवाई क्यों? एक आरोपी को नाबालिग बताया जा रहा है, जबकि हमारे समाज के आरोपियों के खिलाफ अलग तरह से कार्रवाई की जा रही है। यह परिवार का आरोप है। ‘वीडियो वायरल करने वाले पर भी कार्रवाई हो’ नंदन के परिवार का एक बड़ा सवाल घटना के वीडियो को वायरल करने वालों को लेकर भी है। निशा का कहना है, वीडियो किसने बनाया, किस मोबाइल से बनाया गया और किसने उसे सोशल मीडिया पर वायरल किया, इसकी भी जांच होनी चाहिए। सिर्फ वीडियो में दिख रहे लोगों को लेकर ही पूरी बात नहीं होनी चाहिए। पुलिस का कहना है कि वीडियो वायरल करने वालों के खिलाफ भी अलग से कार्रवाई की गई है। पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया और यूट्यूब समेत अन्य प्लेटफॉर्म पर वीडियो प्रसारित करने वालों के खिलाफ साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। नंदन का परिवार: ‘वह घर चलाने के लिए काम करता था’ नंदन की मां ने बताया, मेरा बेटा ज्यादातर समय घर से बाहर रहता था। वह ट्रक में खलासी का काम करता था। खेती-बाड़ी और मजदूरी के काम में भी परिवार की मदद करता था। करीब एक महीने पहले धान कटाई के समय नंदन घर आया था। कुछ समय बाद उसे फिर काम के लिए बाहर जाना था, लेकिन इसी बीच यह मामला सामने आ गया। नंदन के दोस्तों और उसके साथ उठने-बैठने वाले लोगों के बारे में मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है। घर की आर्थिक स्थिति सामान्य है और नंदन भी काम करके परिवार की मदद करता था। मेरे बेटे का बालू के अवैध कारोबार से संबंध नहीं है। हरेराम के गांव में भी सन्नाटा, परिवार के सामने कई सवाल नंदन के साथ आरोपी बनाए गए हरेराम यादव के घर भी भास्कर की टीम पहुंची। इस दौरान उसके घर में सिर्फ बूढ़े दादा थे। हरेराम की जिंदगी के बारे में बात करें तो वह घर से ठीक-ठाक है। उसका बड़ा भाई आर्मी में जवान है। पिता किसान है और माता की पहले ही मौत हो चुकी है। हरेराम का खुद का ट्रैक्टर है। वो गांव में ही चलाता था। हरेराम पहले शराब तस्करी के मामले में 2-3 बार जेल जा चुका है। हरेराम और नंदन बचपन के साथी है। दोनों दोस्तों पर बालू माफिया होने का भी आरोप है। साथ ही दोनों सोशल मीडिया पर रील्स बनाते हैं। बता दें कि 19 सितंबर की शाम 7 बजे कुछ लड़कों ने नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ बदसलूकी की। छात्र के साथ मारपीट की, वहीं छात्रा के साथ नंदन ने अभद्रत व्यवहार किया। उसके साथ छेड़खानी के आरोपी में पुलिस ने उसका एनकाउंटर किया। पुलिस एनकाउंटर में नंदन को पैर में गोली लगी है। वहीं, हरेराम का पैर टूट गया है। इस मामले में पुलिस ने अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें दो आरोपियों की उम्र 35 से 40 साल है, जबकि तीन नाबालिग हैं। इसके अलावा वीडियो वायरल करने वाले 3 आरोपी हैं। नंदन का 3 दिन से मेडिकल चल रहा है। फिलहाल, पुलिस ने हरेराम को कोट में पेश कर 14 दिन के लिए जेल भेज दिया है। वहीं, नंदन को इलाज के बाद जेल में पेश किया जाएगा। “मेरे बेटे ने गलती की है तो कानून के मुताबिक सजा दें, मुझे मंजूर है। उसे जेल में रखें, लेकिन उसकी जान नहीं जानी चाहिए। सरकार से मेरी यही मांग है कि मेरे बेटे की जिंदगी बचाई जाए और मुझे उसकी हालत और इलाज की जानकारी दी जाए।” ये कहना है जमुई छेड़खानी के मुख्य आरोपी नंदन यादव की मां का। वो अपने बेटे से एक बार मिलना चाह रही है, लेकिन उनका आरोप है कि पुलिस उन्हें अपने बेटे से न मिलने दे रही है, न ही उसकी तस्वीर दिखा रही है। दरअसल, जमुई में नाबालिग छात्रा से बदसलूकी और उसका वीडियो बनाए जाने के मामले में पुलिस कार्रवाई के बाद भास्कर की टीम मुख्य आरोपी नंदन यादव और आरोपी हरेराम यादव के गांव पहुंची। गांव में घटना को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं हैं। एक तरफ ग्रामीण और परिवार के लोग पुलिस की कार्रवाई के बाद नंदन की स्थिति को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस पूरे मामले में आरोपियों की भूमिका और वायरल वीडियो के आधार पर कार्रवाई की बात कह रही है। पहले घटना से जुड़ी तस्वीरें देखिए… परिवार ने जाति के आधार पर भेदभाव का आरोप लगाया है- पुलिस इस आरोप पर क्या कहती है? नंदन की मां पुलिस से क्या मांग कर रही हैं? 21 सितंबर को पुलिस नंदन के गांव क्यों पहुंची थी? नंदन की भाभी का पुलिस से क्या है सवाल? इन सारे सवालों का जवाब दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में पढ़िए… दैनिक भास्कर की टीम जिला मुख्यालय से 15KM और घटनास्थल से सिर्फ एक किमी दूर मुख्य आरोपी नंदन यादव और हरेराम यादव के गांव पहुंची। इस दौरान नंदन के परिवार और गांव वालों ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कच्ची सड़कों से होते हुए हमारी टीम नंदन के घर पहुंची, जहां हमें उसकी मां और भाभी निशा कुमारी मिली। इस दौरान दोनों ने पुलिस कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठाए हैं।परिवार की सबसे बड़ी चिंता फिलहाल नंदन की हालत को लेकर है। मां का कहना है कि वह अपने बेटे से मिलना चाहती हैं, उसकी चोट देखना चाहती हैं और यह जानना चाहती हैं कि उसका इलाज किस स्थिति में चल रहा है। ‘मेरे बेटे के साथ कुछ हुआ तो पुलिस जिम्मेदार होगी’ नंदन की मां से जब भास्कर की टीम ने बात की तो उनकी सबसे पहली चिंता बेटे की सुरक्षा को लेकर थी। उन्होंने कहा, हमें अपने बेटे से मिलना है। उसकी हालत जाननी है। उसे देखना चाहते हैं कि उसका इलाज हो रहा है या नहीं। चोट कहां लगी है, यह भी देखना चाहते हैं। वहीं, मां ने पुलिस के गांव पहुंचने की पूरी घटना भी बताई। कहा- 21 सितंबर की दोपहर पुलिस हमारे गांव पहुंची थी। इस दौरान अपने घर में कमरे में सो रही थी। पुलिस आई और अचानक से पूछना शुरू कर दिया, आपका बेटा नंदन कहां है? जब मैंने उनसे पूछा- क्यों क्या हुआ है? इसके बाद मैंने पुलिस को बताया कि वह गांव में कहीं गया होगा। दोस्तों के साथ घूम रहा होगा। इसके बाद पुलिस ने कथित तौर पर कहा कि बेटे को जल्दी बुलाओ, नहीं तो परिवार के लोगों को थाने ले जाया जाएगा। जब मैंने पुलिस से पूछा कि आखिर मामला क्या है, तब पुलिस ने मुझे घटना से जुड़ा वीडियो दिखाया। इस दौरान मैं कुछ बोलने लायक नहीं रही। मैं फोन नहीं चलाती हूं, इसी वजह से मुझे घटना के बारे नहीं पता चल सका। करीब आधे घंटे तक पुलिस मेरे घर पर मौजूद रही। फिर उनलोगों ने मेरी प्रेग्नेंट बहू और मुझे अपने साथ थाना ले गई। हम दोनों को करीब 10 घंटे से ज्यादा समय तक पुलिस थाने में रखा गया। भाभी निशा बोलीं- ‘नंदन के साथ बहुत गलत किया गया’ नंदन की भाभी निशा कुमारी ने कहा, परिवार को नंदन की हालत की पूरी जानकारी नहीं दी जा रही है। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा, परिवार को यह जानना चाहिए कि नंदन को गोली कैसे लगी और उसकी वर्तमान स्थिति क्या है। नंदन के साथ बहुत गलत किया गया। उसे नदी के पास गोली मार दी गई। उसके बाद से उसकी कोई तस्वीर तक सामने नहीं आई है। पुलिस जो बोल रही है कि नंदन भाग रहा था, इसी वजह से पुलिस ने गोली चलाई है, ये बिल्कुल गलत है। नंदन को पुलिस ने पहले पकड़ा और उसके बाद गोली मार दी। निशा ने कहा, इस कांड में अगर कई आरोपी हैं तो जांच और कार्रवाई सभी के खिलाफ होनी चाहिए। कार्रवाई में जाति के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है। अगर सात लोग आरोपी हैं तो सातों पर गोली चलनी चाहिए, सिर्फ मेरे परिवार के लोगों पर ही कार्रवाई क्यों? एक आरोपी को नाबालिग बताया जा रहा है, जबकि हमारे समाज के आरोपियों के खिलाफ अलग तरह से कार्रवाई की जा रही है। यह परिवार का आरोप है। ‘वीडियो वायरल करने वाले पर भी कार्रवाई हो’ नंदन के परिवार का एक बड़ा सवाल घटना के वीडियो को वायरल करने वालों को लेकर भी है। निशा का कहना है, वीडियो किसने बनाया, किस मोबाइल से बनाया गया और किसने उसे सोशल मीडिया पर वायरल किया, इसकी भी जांच होनी चाहिए। सिर्फ वीडियो में दिख रहे लोगों को लेकर ही पूरी बात नहीं होनी चाहिए। पुलिस का कहना है कि वीडियो वायरल करने वालों के खिलाफ भी अलग से कार्रवाई की गई है। पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया और यूट्यूब समेत अन्य प्लेटफॉर्म पर वीडियो प्रसारित करने वालों के खिलाफ साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। नंदन का परिवार: ‘वह घर चलाने के लिए काम करता था’ नंदन की मां ने बताया, मेरा बेटा ज्यादातर समय घर से बाहर रहता था। वह ट्रक में खलासी का काम करता था। खेती-बाड़ी और मजदूरी के काम में भी परिवार की मदद करता था। करीब एक महीने पहले धान कटाई के समय नंदन घर आया था। कुछ समय बाद उसे फिर काम के लिए बाहर जाना था, लेकिन इसी बीच यह मामला सामने आ गया। नंदन के दोस्तों और उसके साथ उठने-बैठने वाले लोगों के बारे में मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है। घर की आर्थिक स्थिति सामान्य है और नंदन भी काम करके परिवार की मदद करता था। मेरे बेटे का बालू के अवैध कारोबार से संबंध नहीं है। हरेराम के गांव में भी सन्नाटा, परिवार के सामने कई सवाल नंदन के साथ आरोपी बनाए गए हरेराम यादव के घर भी भास्कर की टीम पहुंची। इस दौरान उसके घर में सिर्फ बूढ़े दादा थे। हरेराम की जिंदगी के बारे में बात करें तो वह घर से ठीक-ठाक है। उसका बड़ा भाई आर्मी में जवान है। पिता किसान है और माता की पहले ही मौत हो चुकी है। हरेराम का खुद का ट्रैक्टर है। वो गांव में ही चलाता था। हरेराम पहले शराब तस्करी के मामले में 2-3 बार जेल जा चुका है। हरेराम और नंदन बचपन के साथी है। दोनों दोस्तों पर बालू माफिया होने का भी आरोप है। साथ ही दोनों सोशल मीडिया पर रील्स बनाते हैं। बता दें कि 19 सितंबर की शाम 7 बजे कुछ लड़कों ने नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ बदसलूकी की। छात्र के साथ मारपीट की, वहीं छात्रा के साथ नंदन ने अभद्रत व्यवहार किया। उसके साथ छेड़खानी के आरोपी में पुलिस ने उसका एनकाउंटर किया। पुलिस एनकाउंटर में नंदन को पैर में गोली लगी है। वहीं, हरेराम का पैर टूट गया है। इस मामले में पुलिस ने अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें दो आरोपियों की उम्र 35 से 40 साल है, जबकि तीन नाबालिग हैं। इसके अलावा वीडियो वायरल करने वाले 3 आरोपी हैं। नंदन का 3 दिन से मेडिकल चल रहा है। फिलहाल, पुलिस ने हरेराम को कोट में पेश कर 14 दिन के लिए जेल भेज दिया है। वहीं, नंदन को इलाज के बाद जेल में पेश किया जाएगा।

