बारां | शहर में चल रहे डोल मेले के रंगमंच पर गुरुवार रात को आयोजित स्थानीय कवि सम्मेलन में शहर के उभरते और स्थापित कवियों ने अपनी रचनाओं से ऐसा रंग जमाया कि देर रात तक श्रोता डटे रहे। कभी ठहाके गूंजे तो कभी संवेदनशील रचनाओं ने श्रोताओं को भावुक कर दिया। तेजपाल पटवारी ने सरस्वती वंदना से कवि सम्मेलन की शुरुआत की। इसके बाद कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को बांधे रखा। कवि सुनील शर्मा ने लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं को अपनी कविता में पिरोते हुए सड़क की आत्मकथा प्रस्तुत की। उनकी पंक्तियां- “मैं सड़क हूं भोली, पर कड़क हूं…ने श्रोताओं को खूब प्रभावित किया। हरिओम राठौर ने वीररस की रचना “म्हूं चाहूं तो झंडो गाड़ दूं दुश्मन की छाती प, पग मल्यो चेतक न, जो मानसिंह का हाथी प…सुनाकर माहौल में जोश भर दिया। हास्य कवि मनोज मस्त ने युवा वर्ग और बदलते प्रेम के अर्थ पर चुटीले अंदाज में कटाक्ष किया। उनकी रचना “आजकल छोरा-छोरी प्यार में अंधा हो रया छ…सुनाकर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। शायर वाहिद बारानवी ने “परिंदे हुए सयाने, उड़ गए आशियाने से…सुनाकर बदलते दौर में माता-पिता की पीड़ा और घरों से दूर होते बच्चों की संवेदनाओं को सामने रखा। मेवाराम चौधरी ने “सपने पूरे करने हों तो मेहनत करनी पड़ती है…सुनाई। राजेश तिरंगा ने “कितने सांचों में ढलकर आए हैं, ख्वाब की तरह पलकर आए हैं…सुनाकर कवि सम्मेलन को ऊंचाई दी। वहीं राजेश पंकज रंगीला ने भी काव्य पाठ किया। कवि सूरजमल मियाड़ा ने किसान की व्यथा को अपनी रचना में आवाज दी। “करसान भोला, कुण जाणे रे थारी पीड़ा..सुनाकर श्रोताओं के मन को छू लिया। कवि सम्मेलन का प्रभावी संचालन बछराज राजस्थानी ने किया, जबकि अध्यक्षता राधेश्याम राष्ट्रवादी ने की। कवि सम्मेलन में रमन अजमेरा, जितेंद्र साहू, हरिशंकर शर्मा, राज प्रमोद राज, ओमप्रकाश शास्त्री, गिर्राज भारतवासी, हरिश्चंद्र सेन, बृजराज प्रजापति, सुरेश चक्रधारी, रोहित दाधीच, हेमराज बंसल, महेंद्र कुमार बैरवा, सत्यनारायण शर्मा, गजेंद्र यादव, हीरालाल कुमोलिया, मुकेश गौतम, हरिओम राठौर, ओमप्रकाश केवट और देवीशंकर गुर्जर ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में डोल मेला अध्यक्ष नीरज नागर ने वार्ड पार्षदों के साथ सरस्वती पूजन किया। इसके बाद नगर परिषद थर्ड फ्रंट के पार्षद नरेश सुमन, गजेंद्र नागर, गिरीश मेहरा, प्रशांत गौतम सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने आमंत्रित कवियों और 24 से अधिक प्रबुद्धजनों का स्वागत किया। शनिवार को राजस्थानी कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।

