पवन खंडेलवाल जिले में पंचायतों के पुनर्गठन और नई ग्राम पंचायत बनने के बाद पंचायतीराज चुनाव में ग्रामीण क्षेत्रों का राजनीतिक और प्रशासनिक गणित पूरी तरह बदलने वाला है। जिले में 40 नई ग्राम पंचायतों के गठन से इन पंचायतों में पहली बार सरपंच और पंचों का चुनाव होगा। वहीं नई पंचायत समिति वजीरपुर के गठन के बाद पंचायत समिति स्तर पर भी पहली बार प्रधान और पंचायत समिति सदस्यों का चुनाव होगा। इससे एक ओर जहां ग्रामीणों को अपने पंचायत मुख्यालय पर ही सरपंच और पंचायत स्तर की व्यवस्था उपलब्ध होगी, वहीं दूसरी ओर गांवों में स्थानीय विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। नई ग्राम पंचायतों के गठन का सबसे बड़ा असर यह होगा कि जिन गांवों को अब तक किसी दूसरी ग्राम पंचायत के अधीन रहकर काम करना पड़ता था, वहां अब अपना पंचायत मुख्यालय होगा। ग्रामीणों को पंचायत संबंधी कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। स्थानीय स्तर पर सरपंच, पंच और पंचायत का कोरम बनने से विकास कार्यों की प्राथमिकता भी गांव की जरूरतों के अनुसार तय होने की संभावना है। बदलाव… गांवों में बढ़ेगी स्थानीय भागीदारी, विकास की उम्मीद नई ग्राम पंचायतों के गठन का सीधा फायदा ग्रामीणों को मिलने की उम्मीद है। अब ग्रामीणों को पंचायत से जुड़े प्रमाण-पत्र, विकास कार्यों की मांग, सरकारी योजनाओं से संबंधित कार्य और अन्य पंचायत स्तरीय कामों के लिए दूसरी पंचायत के मुख्यालय पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। नई पंचायत में सरपंच, पंच और कोरम बनने के बाद स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया मजबूत होगी। पंचायतीराज चुनाव में बढ़ेगा दावेदारों का दायरा नई ग्राम पंचायतों के गठन का असर आगामी पंचायतीराज चुनाव पर भी देखने को मिलेगा। नई पंचायतों में पहली बार सरपंच पद के लिए दावेदार सामने आएंगे। इसके साथ ही पंच पदों के लिए भी ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक सक्रियता बढ़ेगी। नई पंचायत समिति वजीरपुर में प्रधान और पंचायत समिति सदस्यों के पदों को लेकर भी चुनावी समीकरण बनेंगे। कुल मिलाकर पंचायत पुनर्गठन से जिले के ग्रामीण राजनीतिक नक्शे में बड़ा बदलाव आया है। नई पंचायतों में पहली बार सरपंच और कोरम बनने तथा वजीरपुर में पहली बार पंचायत समिति का गठन होने से ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर प्रतिनिधित्व मिलेगा। तुलनात्मक रूप से देखें तो नई ग्राम पंचायतों के गठन में बामनवास सबसे आगे है। यहां पहले 39 ग्राम पंचायतें थीं। अब 10 नई पंचायतों के गठन के बाद इनकी संख्या बढ़कर 49 हो गई है। बौंली में पहले 24 ग्राम पंचायतें थीं। 8 नई पंचायतों के गठन के बाद यहां 32 ग्राम पंचायतें हो गई हैं। खंडार में पहले 31 पंचायतें थीं, जहां 4 नई पंचायतें जुड़ने के बाद संख्या 35 हो गई। चौथ का बरवाड़ा में पहले 23 ग्राम पंचायतें थीं। 4 नई पंचायतें बनने के बाद यहां 27 पंचायतें हो गई हैं। मलारना डूंगर में पहले 27 ग्राम पंचायतें थीं। 3 नई पंचायतें जुड़ीं, जबकि फलसावटा के विलोपन के बाद अब कुल 29 ग्राम पंचायतें रह गई हैं। सवाई माधोपुर पंचायत समिति में पहले 37 ग्राम पंचायतें थीं। 5 नई पंचायतें जुड़ीं, जबकि दोंदरी पंचायत के विलोपन के बाद अब कुल 41 ग्राम पंचायतें हैं। गंगापुर सिटी से अलग होकर वजीरपुर बना नया पंचायत समिति क्षेत्र : पंचायत पुनर्गठन का सबसे बड़ा बदलाव गंगापुर सिटी क्षेत्र में हुआ। गंगापुर सिटी में पहले 43 ग्राम पंचायतें थीं। नई पंचायतों के गठन के बाद यह संख्या बढ़कर 49 हो गई थी। इसके बाद वजीरपुर को नई पंचायत समिति बनाए जाने पर गंगापुर सिटी की 49 में से 22 ग्राम पंचायतें वजीरपुर पंचायत समिति में शामिल कर दी गईं। इस पुनर्गठन के बाद अब गंगापुर सिटी पंचायत समिति में 27 ग्राम पंचायतें रह गई हैं, जबकि नवसृजित वजीरपुर पंचायत समिति में 22 ग्राम पंचायतें हैं। वजीरपुर जिले की नई पंचायत समिति के रूप में अलग प्रशासनिक ढांचा लेकर सामने आया है।

