साल 1996। महीना- अप्रैल। वोटिंग के बाद विधान परिषद के चुनाव की गहमागहमी शांत हो गई थी। सबके जेहन में एक ही सवाल था? क्या बिहार के सबसे शिक्षित इलाके पटना से कांग्रेस के दिग्गज डॉ. पीएन शर्मा (डॉ. पद्मदेव नारायण शर्मा) का किला ढह जाएगा। क्या लालू के सिपाही नवल किशोर यादव अपने सुप्रीमो को जीत की सौगात दे पाएंगे। 30 अप्रैल 1996 को नतीजे आए। नवल किशोर यादव ने 30 साल बाद डॉ. पीएन शर्मा को 870 वोट से हरा दिया। राजनीति के नौसिखिए नवल किशोर यादव को 3,414 वोट मिले, जबकि सियासत के धुरंधर कांग्रेस के पीएन शर्मा 2,544 वोटों पर सिमट गए। विधान परिषद के पटना शिक्षक सीट की सियासत पूरी तरह बदल चुकी थी। कहानी जीत-हार पर खत्म नहीं हुई। यहां से शुरू हुआ एक नया विवाद। इसकी शुरुआत वोटर लिस्ट तैयार करने के दौरान ही हो गई थी। पीएन शर्मा ने आरोप लगाए कि फर्जी वोटर्स बनाकर चुनाव में धांधली की गई। 1625 फर्जी वोटर्स के सहारे उन्हें हराया गया। मामला चुनाव आयोग से लेकर हाईकोर्ट के रास्ते सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। यहां भी पीएन शर्मा की हार हुई। 30 साल बाद एक बार फिर से नवल किशोर यादव पर फर्जी वोटर्स बनाने के आरोप लग रहे हैं। MLC चुनाव के किस्से में आज पढ़िए, कैसे MLC चुनाव में वोट चोरी (फर्जी वोटर्स) की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई थी। वीमेंस कॉलेज में फर्जी मेल प्रोफेसर को वोटर बनाया कांग्रेस के एक ऐसे दिग्गज नेता की हार हुई थी, जिनकी छवि एक कड़क कॉमर्स प्रोफेसर की थी। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की थी। बिहार सरकार में मंत्री रह चुके थे। पूरे इलाके के वोटर्स के बीच अपनी एक छवि थी। हार के बाद पीएन शर्मा के सपोर्ट में बड़ी संख्या में स्कूल-कॉलेज के टीचर्स सामने आ गए। वोटर लिस्ट में 1625 नाम ऐसे थे, जिनकी कोई पहचान नहीं हो पा रही थी। स्कूल-कॉलेज अपने संस्थान के शिक्षकों की डिटेल जारी करने लगे। पीएन शर्मा की तरफ से लगाए गए आरोप के मुताबिक कई ऐसे स्कूल-कॉलेज के नाम सामने आए, जिन्हें बिहार सरकार की मान्यता नहीं मिली थी। इनका नाम भी किसी ने नहीं सुना था। इन स्कूलों के ऐसे टीचर्स को वोटर बनाया गया जो जरूरी योग्यता नहीं रखते थे। इसी क्रम में एक महिला कॉलेज की प्रिंसिपल सामने आईं। उन्होंने बताया कि उनके कॉलेज में 72 मेल प्रोफेसर को वोटर बना दिया गया है। ये कौन हैं वो नहीं जानती हैं। प्रिंसिपल ने इसकी शिकायत चुनाव आयोग से भी की। ऐसी कई शिकायतें की गईं। अब सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट से विवाद की पूरी कहानी पढ़िए.. शिकायत के बाद भी अधिकारी ने फर्जी वोटर्स के नाम नहीं हटाए लोअर कोर्ट में नहीं बनी बात तो सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला कांग्रेस का किला ढाहने के लिए लालू यादव ने किया था प्रयोग 1996 के चुनाव को कवर करने वाले सीनियर जर्नलिस्ट अरुण कुमार पांडेय ने कहा, ‘आज अनंत सिंह की एंट्री से MLC चुनाव में जिस तरह की गहमागहमी है, उस वक्त भी यही माहौल था। लालू यादव की सरकार बन गई थी। पटना शिक्षक की सीट पर लालू यादव ने भूमिहार के खिलाफ पहली बार यादव का प्रयोग किया था।’ ‘अभी तक इस सीट पर सवर्ण वर्सेज कुर्मी का प्रयोग किया जा रहा था। कुर्मी को चुनाव लड़ाने का हर प्रयोग फेल हो रहा था। लालू प्रसाद ने यहां बड़े भूमिहार लीडर के खिलाफ यादव का प्रयोग किया था।’ लालू प्रसाद यादव अपने प्रयोग में सफल रहे। कांग्रेस के दिग्गज हार गए। अब नवल किशोर यादव पीएन शर्मा से ज्यादा स्थापित लीडर हो गए हैं। वे लगातार 30 साल से इस सीट पर चुनाव जीतते आ रहे हैं। साल 1996। महीना- अप्रैल। वोटिंग के बाद विधान परिषद के चुनाव की गहमागहमी शांत हो गई थी। सबके जेहन में एक ही सवाल था? क्या बिहार के सबसे शिक्षित इलाके पटना से कांग्रेस के दिग्गज डॉ. पीएन शर्मा (डॉ. पद्मदेव नारायण शर्मा) का किला ढह जाएगा। क्या लालू के सिपाही नवल किशोर यादव अपने सुप्रीमो को जीत की सौगात दे पाएंगे। 30 अप्रैल 1996 को नतीजे आए। नवल किशोर यादव ने 30 साल बाद डॉ. पीएन शर्मा को 870 वोट से हरा दिया। राजनीति के नौसिखिए नवल किशोर यादव को 3,414 वोट मिले, जबकि सियासत के धुरंधर कांग्रेस के पीएन शर्मा 2,544 वोटों पर सिमट गए। विधान परिषद के पटना शिक्षक सीट की सियासत पूरी तरह बदल चुकी थी। कहानी जीत-हार पर खत्म नहीं हुई। यहां से शुरू हुआ एक नया विवाद। इसकी शुरुआत वोटर लिस्ट तैयार करने के दौरान ही हो गई थी। पीएन शर्मा ने आरोप लगाए कि फर्जी वोटर्स बनाकर चुनाव में धांधली की गई। 1625 फर्जी वोटर्स के सहारे उन्हें हराया गया। मामला चुनाव आयोग से लेकर हाईकोर्ट के रास्ते सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। यहां भी पीएन शर्मा की हार हुई। 30 साल बाद एक बार फिर से नवल किशोर यादव पर फर्जी वोटर्स बनाने के आरोप लग रहे हैं। MLC चुनाव के किस्से में आज पढ़िए, कैसे MLC चुनाव में वोट चोरी (फर्जी वोटर्स) की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई थी। वीमेंस कॉलेज में फर्जी मेल प्रोफेसर को वोटर बनाया कांग्रेस के एक ऐसे दिग्गज नेता की हार हुई थी, जिनकी छवि एक कड़क कॉमर्स प्रोफेसर की थी। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की थी। बिहार सरकार में मंत्री रह चुके थे। पूरे इलाके के वोटर्स के बीच अपनी एक छवि थी। हार के बाद पीएन शर्मा के सपोर्ट में बड़ी संख्या में स्कूल-कॉलेज के टीचर्स सामने आ गए। वोटर लिस्ट में 1625 नाम ऐसे थे, जिनकी कोई पहचान नहीं हो पा रही थी। स्कूल-कॉलेज अपने संस्थान के शिक्षकों की डिटेल जारी करने लगे। पीएन शर्मा की तरफ से लगाए गए आरोप के मुताबिक कई ऐसे स्कूल-कॉलेज के नाम सामने आए, जिन्हें बिहार सरकार की मान्यता नहीं मिली थी। इनका नाम भी किसी ने नहीं सुना था। इन स्कूलों के ऐसे टीचर्स को वोटर बनाया गया जो जरूरी योग्यता नहीं रखते थे। इसी क्रम में एक महिला कॉलेज की प्रिंसिपल सामने आईं। उन्होंने बताया कि उनके कॉलेज में 72 मेल प्रोफेसर को वोटर बना दिया गया है। ये कौन हैं वो नहीं जानती हैं। प्रिंसिपल ने इसकी शिकायत चुनाव आयोग से भी की। ऐसी कई शिकायतें की गईं। अब सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट से विवाद की पूरी कहानी पढ़िए.. शिकायत के बाद भी अधिकारी ने फर्जी वोटर्स के नाम नहीं हटाए लोअर कोर्ट में नहीं बनी बात तो सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला कांग्रेस का किला ढाहने के लिए लालू यादव ने किया था प्रयोग 1996 के चुनाव को कवर करने वाले सीनियर जर्नलिस्ट अरुण कुमार पांडेय ने कहा, ‘आज अनंत सिंह की एंट्री से MLC चुनाव में जिस तरह की गहमागहमी है, उस वक्त भी यही माहौल था। लालू यादव की सरकार बन गई थी। पटना शिक्षक की सीट पर लालू यादव ने भूमिहार के खिलाफ पहली बार यादव का प्रयोग किया था।’ ‘अभी तक इस सीट पर सवर्ण वर्सेज कुर्मी का प्रयोग किया जा रहा था। कुर्मी को चुनाव लड़ाने का हर प्रयोग फेल हो रहा था। लालू प्रसाद ने यहां बड़े भूमिहार लीडर के खिलाफ यादव का प्रयोग किया था।’ लालू प्रसाद यादव अपने प्रयोग में सफल रहे। कांग्रेस के दिग्गज हार गए। अब नवल किशोर यादव पीएन शर्मा से ज्यादा स्थापित लीडर हो गए हैं। वे लगातार 30 साल से इस सीट पर चुनाव जीतते आ रहे हैं।

