अजीत ही संभालता था दरोगा पुष्पा का ‘धंधा’:’सिपाही पर फायरिंग करने वाला जवान नशे में था; मर्डर का प्लान पहले से था, गोलियां भी खरीदी थीं

अजीत ही संभालता था दरोगा पुष्पा का ‘धंधा’:’सिपाही पर फायरिंग करने वाला जवान नशे में था; मर्डर का प्लान पहले से था, गोलियां भी खरीदी थीं

नालंदा में एक्साइज डिपार्टमें के ईआईबी यानी इकोनॉमिक इंटेलिजेंस ब्यूरो के सिपाही अजीत कुमार पर फायरिंग के दौरान आरोपी होमगार्ड जवान नशे में धुत्त था। मुख्य आरोपी सब इंस्पेक्टर पुष्पा कुमारी के सहयोगियों के मुताबिक, ये सिर्फ एक मुठभेड़ या अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि इसकी स्क्रिप्ट काफी पहले ही लिखी जा चुकी थी। नाम न छापने की शर्त पर पुष्पा के सहयोगियों ने बताया कि उसके अवैध शराब के कारोबार, सौदेबाजी, सरकारी हथियारों का अवैध इस्तेमाल के साथ-साथ अन्य काले कारनामों की देखरेख अजीत कुमार ही संभालता था। ये भी दावा किया गया कि वारदात के पहले ही ताबड़तोड़ फायरिंग के लिए पुष्पा और अन्य आरोपियों की ओर से अवैध तरीके से गोलियों का जुगाड़ कर लिया गया था। पुष्पा के सहयोगियों ने दैनिक भास्कर से बातचीत में और क्या-क्या बताया? जेल जाने से पहले पुष्पा ने अपने गुर्गों के लिए क्या मैसेज भिजवाया? अजीत और पुष्पा के बीच का रिश्ता कैसा था? पढ़िए, एक्सक्लूसिव रिपोर्ट। सबसे पहले पढ़िए, पुष्पा के सहयोगियों ने दैनिक भास्कर से बातचीत में और क्या-क्या बताया? दैनिक भास्कर के पड़ताल में सामने आया है कि गिरफ्तारी और जेल की सलाखों के पीछे जाने से ठीक पहले पुष्पा कुमारी ने अपने पूरे नेटवर्क को एक्टिवर कर दिया था। उसने फोन और गुर्गों के जरिए अपने गैंग के सभी सदस्यों और बिचौलियों से सीधा संपर्क किया था। पुष्पा का सभी को क्लियर मैसेज था कि फिलहाल कुछ दिनों के लिए सभी लोग पूरी तरह अंडरग्राउंड हो जाओ। किसी भी तरीके से किसी का फोन ऑन नहीं रहना चाहिए, न कोई फोन से एक दूसरे से संपर्क करेगा और न कोई पुराने ठिकाने पर दिखेगा। पुष्पा के करीबी सूत्र का दावा है कि कानून की गिरफ्त में आने के बावजूद उसका हौसला जरा भी नहीं डगमगाया। उसने अपने नेटवर्क को आश्वस्त करते हुए यहां तक कहा था कि ये तूफान चंद दिनों का है। सूत्र के मुताबिक, पुष्पा का दावा था कि वो तीन महीने के अंदर जमानत पर बाहर आ जाएगी और अगले छह महीने के अंदर पैरवी, रसूख के बल पर दोबारा किसी मलाईदार थाने या जिले में अपनी पोस्टिंग भी करवा लेगी। सूत्र ने व्यवस्था पर तंज कसते हुए कहा कि सिस्टम में बैठे लोगों को ‘रिझाना’ पुष्पा के लिए कोई नई बात नहीं है; वो अक्सर कहा करती थी कि सही कीमत चुकाकर किसी भी फाइल का रुख मोड़ा जा सकता है। नवादा में वसूली के दौरान रंगेहाथों पकड़ाई थी, कोई आंच नहीं आई दरअसल, पुष्पा कुमारी का ट्रैक रिकॉर्ड शुरू से ही दागदार और विवादों से घिरा रहा है। नालंदा में पदस्थापना से पहले वह नवादा जिले में तैनात थी। नवादा में पोस्टिंग के दौरान शराब तस्करों से मोटी रकम और घूस की वसूली करते हुए उसे रंगे हाथों पकड़ा गया था। उस वक्त विभाग में उसकी भारी किरकिरी हुई थी और निलंबन तय माना जा रहा था। मगर, राजनीतिक रसूख और सफेदपोश आकाओं से सीधी पैठ के चलते उसके ऊपर कोई आंच तक नहीं आई। जांच फाइलों को दबा दिया गया और उसे किसी सजा या विभागीय दंड के बजाय उल्टे नालंदा जैसे महत्वपूर्ण जिले में ट्रांसफर कर दिया गया। यह ट्रांसफर इस बात का सीधा सबूत था कि विभाग के भीतर पुष्पा की जड़ें कितनी गहरी थीं। नवादा में उसने शराब तस्करों, मुखबिरों और स्थानीय बदमाशों का जो कॉकस बनाया था, नालंदा पहुंचते ही उसने उसी पुराने ब्लूप्रिंट पर काम शुरू कर दिया। वहां भी उसने अपने वफादार गुर्गों की एक नई फौज खड़ी कर ली थी, जो उसके इशारे पर अवैध वसूली का सिंडिकेट चलाते थे। घटना की रात: नशे में धुत था रिशु, दीनानाथ की राइफल से चलाई गोली वारदात वाली रात के घटनाक्रम को लेकर भी चौंकाने वाली बातें सामने आई है। सूत्र बताते हैं कि जिस वक्त उत्पाद विभाग की टीम शराब तस्करों की गाड़ी का पीछा कर रही थी, उस समय पुष्पा की गाड़ी में मौजूद रिशु पूरी तरह नशे की हालत में धुत था। जब स्थिति तनावपूर्ण हुई, तो रिशु ने सिपाही दीनानाथ की सरकारी राइफल अपने कब्जे में ले ली और तबाड़तोड़ फायरिंग करने लगा। ये पूरी कार्रवाई पुष्पा कुमारी के ही इशारे पर हुई थी। इस खुलासे में सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि सरकारी राइफल के लिए गोलियों का अवैध जुगाड़ पहले ही सुनियोजित तरीके से कर लिया गया था। यानी सरकारी हथियारों का इस्तेमाल निजी रंजिश, दबाव बनाने और अवैध वसूली के लिए करने का खाका पहले से तैयार था। पटना में ही तय हो चुकी थी जब्ती और शराब खपाने की ‘डील’ जांच की कड़ियां जोड़ते हुए ये बात भी पुख्ता हुई है कि शराब तस्करों को पकड़ने की ये कार्रवाई अचानक हुई कोई छापेमारी नहीं थी। दरअसल, शराब की खेप को पकड़ने, उसे कागजों पर कम दिखाने या नहीं दिखाने और जब्त माल को गुप्त रूप से बाजार में खपाने की पूरी स्क्रिप्ट पटना में ही लिख दी गई थी। रेड करने से ठीक पहले सिपाही अजीत कुमार और एसआई पुष्पा कुमारी के बीच लंबी बातचीत हुई थी। दोनों के बीच इस बात की पूरी ‘डील’ फाइनल हो चुकी थी कि तस्करों को किस जगह घेरा जाएगा, कितना माल दिखाया जाएगा और बाकी बची शराब को किस सिंडिकेट के जरिए ठिकाने लगाकर मोटी रकम बनाई जाएगी। अजीत पूरी तरह पुष्पा के दिशा-निर्देशों पर ही फील्ड में मोहरे की तरह काम कर रहा था।
अजीत ही संभाल रहा था पूरा ‘दो नंबर’ का धंधा पुष्पा और मृतक सिपाही अजीत कुमार के रिश्तों की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि दोनों पिछले करीब तीन वर्षों से एक-दूसरे के बेहद करीबी संपर्क में थे। वे न केवल पेशेवर तौर पर बल्कि निजी स्तर पर भी एक-दूसरे से पूरी तरह बंध चुके थे। सूत्रों का दावा है कि अजीत के पहले से शादीशुदा होने के बावजूद दोनों बहुत जल्द औपचारिक रूप से वैवाहिक बंधन में बंधने की तैयारी कर रहे थे। विभाग में भी उनकी इस करीबी की चर्चा दबी जुबान से हर कोई करता था। तीन साल पहले तक पुष्पा का ‘दो नंबर’ का अवैध कारोबार और वसूली का नेटवर्क कोई दूसरा सिंडिकेट संभालता था। लेकिन पुष्पा के संपर्क में आने के बाद अजीत ने उस पुराने सिंडिकेट को पूरी तरह बेदखल कर दिया। पिछले तीन सालों से पुष्पा के हर अवैध धंधे, वसूली के बंटवारे,तस्करों से सांठगांठ और लेन-देन का पूरा प्रबंधन अकेले अजीत कुमार ही देख रहा था। दोनों मिलकर विभाग के भीतर एक ऐसा समानांतर तंत्र चला रहे थे, जिसकी भनक आला अधिकारियों को होते हुए भी सब मौन साधे हुए थे।
जेल में मिलने वालों का तांता, मीडिया की सुर्खियों के चलते मुलाकातों पर सख्त पहरा फिलहाल पुष्पा कुमारी जेल की सलाखों के पीछे है, लेकिन जेल के बाहर उसके नेटवर्क में बेचैनी साफ देखी जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक, जेल में बंद पुष्पा से मिलने के लिए उसके करीबी सफेदपोश, विभाग के कुछ पुराने सहयोगी और उसके सिंडिकेट के पैरोकार लगातार चक्कर काट रहे हैं। हालांकि, सिपाही हत्याकांड का यह मामला लगातार मीडिया की सुर्खियों में बना हुआ है और शासन स्तर से इस पर कड़ी नजर रखी जा रही है। यही वजह है कि जेल प्रशासन अत्यधिक सतर्कता बरत रहा है और फिलहाल पुष्पा से किसी भी बाहरी या संदिग्ध व्यक्ति की सीधी मुलाकात पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। नालंदा में एक्साइज डिपार्टमें के ईआईबी यानी इकोनॉमिक इंटेलिजेंस ब्यूरो के सिपाही अजीत कुमार पर फायरिंग के दौरान आरोपी होमगार्ड जवान नशे में धुत्त था। मुख्य आरोपी सब इंस्पेक्टर पुष्पा कुमारी के सहयोगियों के मुताबिक, ये सिर्फ एक मुठभेड़ या अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि इसकी स्क्रिप्ट काफी पहले ही लिखी जा चुकी थी। नाम न छापने की शर्त पर पुष्पा के सहयोगियों ने बताया कि उसके अवैध शराब के कारोबार, सौदेबाजी, सरकारी हथियारों का अवैध इस्तेमाल के साथ-साथ अन्य काले कारनामों की देखरेख अजीत कुमार ही संभालता था। ये भी दावा किया गया कि वारदात के पहले ही ताबड़तोड़ फायरिंग के लिए पुष्पा और अन्य आरोपियों की ओर से अवैध तरीके से गोलियों का जुगाड़ कर लिया गया था। पुष्पा के सहयोगियों ने दैनिक भास्कर से बातचीत में और क्या-क्या बताया? जेल जाने से पहले पुष्पा ने अपने गुर्गों के लिए क्या मैसेज भिजवाया? अजीत और पुष्पा के बीच का रिश्ता कैसा था? पढ़िए, एक्सक्लूसिव रिपोर्ट। सबसे पहले पढ़िए, पुष्पा के सहयोगियों ने दैनिक भास्कर से बातचीत में और क्या-क्या बताया? दैनिक भास्कर के पड़ताल में सामने आया है कि गिरफ्तारी और जेल की सलाखों के पीछे जाने से ठीक पहले पुष्पा कुमारी ने अपने पूरे नेटवर्क को एक्टिवर कर दिया था। उसने फोन और गुर्गों के जरिए अपने गैंग के सभी सदस्यों और बिचौलियों से सीधा संपर्क किया था। पुष्पा का सभी को क्लियर मैसेज था कि फिलहाल कुछ दिनों के लिए सभी लोग पूरी तरह अंडरग्राउंड हो जाओ। किसी भी तरीके से किसी का फोन ऑन नहीं रहना चाहिए, न कोई फोन से एक दूसरे से संपर्क करेगा और न कोई पुराने ठिकाने पर दिखेगा। पुष्पा के करीबी सूत्र का दावा है कि कानून की गिरफ्त में आने के बावजूद उसका हौसला जरा भी नहीं डगमगाया। उसने अपने नेटवर्क को आश्वस्त करते हुए यहां तक कहा था कि ये तूफान चंद दिनों का है। सूत्र के मुताबिक, पुष्पा का दावा था कि वो तीन महीने के अंदर जमानत पर बाहर आ जाएगी और अगले छह महीने के अंदर पैरवी, रसूख के बल पर दोबारा किसी मलाईदार थाने या जिले में अपनी पोस्टिंग भी करवा लेगी। सूत्र ने व्यवस्था पर तंज कसते हुए कहा कि सिस्टम में बैठे लोगों को ‘रिझाना’ पुष्पा के लिए कोई नई बात नहीं है; वो अक्सर कहा करती थी कि सही कीमत चुकाकर किसी भी फाइल का रुख मोड़ा जा सकता है। नवादा में वसूली के दौरान रंगेहाथों पकड़ाई थी, कोई आंच नहीं आई दरअसल, पुष्पा कुमारी का ट्रैक रिकॉर्ड शुरू से ही दागदार और विवादों से घिरा रहा है। नालंदा में पदस्थापना से पहले वह नवादा जिले में तैनात थी। नवादा में पोस्टिंग के दौरान शराब तस्करों से मोटी रकम और घूस की वसूली करते हुए उसे रंगे हाथों पकड़ा गया था। उस वक्त विभाग में उसकी भारी किरकिरी हुई थी और निलंबन तय माना जा रहा था। मगर, राजनीतिक रसूख और सफेदपोश आकाओं से सीधी पैठ के चलते उसके ऊपर कोई आंच तक नहीं आई। जांच फाइलों को दबा दिया गया और उसे किसी सजा या विभागीय दंड के बजाय उल्टे नालंदा जैसे महत्वपूर्ण जिले में ट्रांसफर कर दिया गया। यह ट्रांसफर इस बात का सीधा सबूत था कि विभाग के भीतर पुष्पा की जड़ें कितनी गहरी थीं। नवादा में उसने शराब तस्करों, मुखबिरों और स्थानीय बदमाशों का जो कॉकस बनाया था, नालंदा पहुंचते ही उसने उसी पुराने ब्लूप्रिंट पर काम शुरू कर दिया। वहां भी उसने अपने वफादार गुर्गों की एक नई फौज खड़ी कर ली थी, जो उसके इशारे पर अवैध वसूली का सिंडिकेट चलाते थे। घटना की रात: नशे में धुत था रिशु, दीनानाथ की राइफल से चलाई गोली वारदात वाली रात के घटनाक्रम को लेकर भी चौंकाने वाली बातें सामने आई है। सूत्र बताते हैं कि जिस वक्त उत्पाद विभाग की टीम शराब तस्करों की गाड़ी का पीछा कर रही थी, उस समय पुष्पा की गाड़ी में मौजूद रिशु पूरी तरह नशे की हालत में धुत था। जब स्थिति तनावपूर्ण हुई, तो रिशु ने सिपाही दीनानाथ की सरकारी राइफल अपने कब्जे में ले ली और तबाड़तोड़ फायरिंग करने लगा। ये पूरी कार्रवाई पुष्पा कुमारी के ही इशारे पर हुई थी। इस खुलासे में सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि सरकारी राइफल के लिए गोलियों का अवैध जुगाड़ पहले ही सुनियोजित तरीके से कर लिया गया था। यानी सरकारी हथियारों का इस्तेमाल निजी रंजिश, दबाव बनाने और अवैध वसूली के लिए करने का खाका पहले से तैयार था। पटना में ही तय हो चुकी थी जब्ती और शराब खपाने की ‘डील’ जांच की कड़ियां जोड़ते हुए ये बात भी पुख्ता हुई है कि शराब तस्करों को पकड़ने की ये कार्रवाई अचानक हुई कोई छापेमारी नहीं थी। दरअसल, शराब की खेप को पकड़ने, उसे कागजों पर कम दिखाने या नहीं दिखाने और जब्त माल को गुप्त रूप से बाजार में खपाने की पूरी स्क्रिप्ट पटना में ही लिख दी गई थी। रेड करने से ठीक पहले सिपाही अजीत कुमार और एसआई पुष्पा कुमारी के बीच लंबी बातचीत हुई थी। दोनों के बीच इस बात की पूरी ‘डील’ फाइनल हो चुकी थी कि तस्करों को किस जगह घेरा जाएगा, कितना माल दिखाया जाएगा और बाकी बची शराब को किस सिंडिकेट के जरिए ठिकाने लगाकर मोटी रकम बनाई जाएगी। अजीत पूरी तरह पुष्पा के दिशा-निर्देशों पर ही फील्ड में मोहरे की तरह काम कर रहा था।
अजीत ही संभाल रहा था पूरा ‘दो नंबर’ का धंधा पुष्पा और मृतक सिपाही अजीत कुमार के रिश्तों की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि दोनों पिछले करीब तीन वर्षों से एक-दूसरे के बेहद करीबी संपर्क में थे। वे न केवल पेशेवर तौर पर बल्कि निजी स्तर पर भी एक-दूसरे से पूरी तरह बंध चुके थे। सूत्रों का दावा है कि अजीत के पहले से शादीशुदा होने के बावजूद दोनों बहुत जल्द औपचारिक रूप से वैवाहिक बंधन में बंधने की तैयारी कर रहे थे। विभाग में भी उनकी इस करीबी की चर्चा दबी जुबान से हर कोई करता था। तीन साल पहले तक पुष्पा का ‘दो नंबर’ का अवैध कारोबार और वसूली का नेटवर्क कोई दूसरा सिंडिकेट संभालता था। लेकिन पुष्पा के संपर्क में आने के बाद अजीत ने उस पुराने सिंडिकेट को पूरी तरह बेदखल कर दिया। पिछले तीन सालों से पुष्पा के हर अवैध धंधे, वसूली के बंटवारे,तस्करों से सांठगांठ और लेन-देन का पूरा प्रबंधन अकेले अजीत कुमार ही देख रहा था। दोनों मिलकर विभाग के भीतर एक ऐसा समानांतर तंत्र चला रहे थे, जिसकी भनक आला अधिकारियों को होते हुए भी सब मौन साधे हुए थे।
जेल में मिलने वालों का तांता, मीडिया की सुर्खियों के चलते मुलाकातों पर सख्त पहरा फिलहाल पुष्पा कुमारी जेल की सलाखों के पीछे है, लेकिन जेल के बाहर उसके नेटवर्क में बेचैनी साफ देखी जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक, जेल में बंद पुष्पा से मिलने के लिए उसके करीबी सफेदपोश, विभाग के कुछ पुराने सहयोगी और उसके सिंडिकेट के पैरोकार लगातार चक्कर काट रहे हैं। हालांकि, सिपाही हत्याकांड का यह मामला लगातार मीडिया की सुर्खियों में बना हुआ है और शासन स्तर से इस पर कड़ी नजर रखी जा रही है। यही वजह है कि जेल प्रशासन अत्यधिक सतर्कता बरत रहा है और फिलहाल पुष्पा से किसी भी बाहरी या संदिग्ध व्यक्ति की सीधी मुलाकात पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।  

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