महात्मा गांधी के लिए स्वच्छता केवल दूसरों को समझाने का विषय नहीं, बल्कि व्यक्तिगत आचरण और जिम्मेदारी का हिस्सा थी। रांची के दो लोग इसी सोच को अपनी दिनचर्या में उतार रहे हैं। न वे किसी संस्था के सदस्य हैं, न सरकारी कर्मचारी। खेलगांव के दीपाटोली निवासी डॉ. सुरेश शर्मा पिछले 8 साल से रोज सुबह सड़क पर पड़ा कचरा खुद उठाते हैं। वहीं मधुकम के रंजीत साहु 12 साल से साइकिल से करीब 30 किमी घूमकर दिन में जल रही स्ट्रीट लाइटें बुझाते हैं। दोनों का मकसद व्यवस्था पर सवाल उठाना नहीं, बल्कि यह संदेश देना है कि शहर को बेहतर व सुंदर बनाना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। 8 साल से रोज सड़क पर कहीं भी कचरा दिखे तो जमा कर जला देते हैं डॉ. सुरेश न्यू नगर रोड नंबर-6 निवासी डॉ. सुरेश शर्मा रोज सुबह 5 बजे मोहल्ले की सड़कों पर निकलते हैं। प्लास्टिक, कागज या अन्य सूखा कचरा दिखाई देने पर उसे खुद उठाकर एक जगह जमा करते हैं और आग लगाकर नष्ट कर देते हैं। जेब में माचिस रखना उनकी आदत में शामिल है। उनका कहना है कि गांधीजी के विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने सफाई को किसी अभियान या विशेष दिन तक सीमित नहीं रखा। केवल शहर साफ रखने की बात करने से बदलाव नहीं आएगा, हर व्यक्ति को अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभानी होगी।
12 साल से रोज साइकिल पर 30 किमी, दिन में जलती लाइटें बुझाते हैं रंजीत मधुकम निवासी रंजीत साहु रोज अपनी साइकिल से शहर में करीब 30 किमी घूमते हैं। इस दौरान दिन में जलती स्ट्रीट लाइट दिखाई देने पर उसे बुझा देते हैं। उनका मानना है कि सार्वजनिक संसाधनों की देखभाल की जिम्मेदारी हर एक नागरिक की है। पिछले 12 साल से वे किसी अभियान का इंतजार किए बिना सामने दिखने वाली समस्या को अपनी क्षमता के अनुसार दूर कर रहे हैं। कहीं स्विच खराब होने पर अपनी जेब से नया स्विच खरीदकर लगाते भी हैं, ताकि बिजली की बर्बादी न हो। महात्मा गांधी के लिए स्वच्छता केवल दूसरों को समझाने का विषय नहीं, बल्कि व्यक्तिगत आचरण और जिम्मेदारी का हिस्सा थी। रांची के दो लोग इसी सोच को अपनी दिनचर्या में उतार रहे हैं। न वे किसी संस्था के सदस्य हैं, न सरकारी कर्मचारी। खेलगांव के दीपाटोली निवासी डॉ. सुरेश शर्मा पिछले 8 साल से रोज सुबह सड़क पर पड़ा कचरा खुद उठाते हैं। वहीं मधुकम के रंजीत साहु 12 साल से साइकिल से करीब 30 किमी घूमकर दिन में जल रही स्ट्रीट लाइटें बुझाते हैं। दोनों का मकसद व्यवस्था पर सवाल उठाना नहीं, बल्कि यह संदेश देना है कि शहर को बेहतर व सुंदर बनाना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। 8 साल से रोज सड़क पर कहीं भी कचरा दिखे तो जमा कर जला देते हैं डॉ. सुरेश न्यू नगर रोड नंबर-6 निवासी डॉ. सुरेश शर्मा रोज सुबह 5 बजे मोहल्ले की सड़कों पर निकलते हैं। प्लास्टिक, कागज या अन्य सूखा कचरा दिखाई देने पर उसे खुद उठाकर एक जगह जमा करते हैं और आग लगाकर नष्ट कर देते हैं। जेब में माचिस रखना उनकी आदत में शामिल है। उनका कहना है कि गांधीजी के विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने सफाई को किसी अभियान या विशेष दिन तक सीमित नहीं रखा। केवल शहर साफ रखने की बात करने से बदलाव नहीं आएगा, हर व्यक्ति को अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभानी होगी।
12 साल से रोज साइकिल पर 30 किमी, दिन में जलती लाइटें बुझाते हैं रंजीत मधुकम निवासी रंजीत साहु रोज अपनी साइकिल से शहर में करीब 30 किमी घूमते हैं। इस दौरान दिन में जलती स्ट्रीट लाइट दिखाई देने पर उसे बुझा देते हैं। उनका मानना है कि सार्वजनिक संसाधनों की देखभाल की जिम्मेदारी हर एक नागरिक की है। पिछले 12 साल से वे किसी अभियान का इंतजार किए बिना सामने दिखने वाली समस्या को अपनी क्षमता के अनुसार दूर कर रहे हैं। कहीं स्विच खराब होने पर अपनी जेब से नया स्विच खरीदकर लगाते भी हैं, ताकि बिजली की बर्बादी न हो।

