भास्कर न्यूज | पूर्णिया पूर्णिया विश्वविद्यालय के स्नातक थर्ड सेमेस्टर की परीक्षा में छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ का एक बड़ा मामला सामने आया है। परीक्षा फॉर्म भरने से वंचित रह गए दर्जनों छात्रों को साइबर कैफे संचालकों ने अपनी ठगी का शिकार बनाया है। कैफे संचालकों ने इन छात्रों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे मोटी रकम वसूली और बदले में उन्हें फर्जी एडमिट कार्ड थमा दिए। मामले का खुलासा तब हुआ जब ये छात्र फर्जी एडमिट कार्ड लेकर विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे। प्रवेश के समय जब केंद्र अधीक्षकों ने बार कोड और रोल नंबर का मिलान किया, तो एडमिट कार्ड फर्जी पाए गए। इस फर्जीवाड़े के कारण कई केंद्रों पर छात्र पकड़े गए, जिन्हें परीक्षा में बैठने से तुरंत रोक दिया गया। विवि प्रशासन ने छात्रों को आगाह किया है कि वे किसी भी अनाधिकृत स्रोत से दस्तावेज न लें। एडमिट कार्ड केवल विवि के आधिकारिक पोर्टल से डाउनलोड किए जा सकते हैं। छात्रों ने जल्दबाजी में साइबर कैफे पर भरोसा किया और अपने शैक्षणिक सत्र को जोखिम में डाल दिया। केन्द्राधीक्षकों को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश साइबर कैफे संचालकों ने तकनीक का दुरुपयोग कर हुबहू असली दिखने वाले प्रवेश पत्र तैयार किए थे। जांच के दौरान जैसे ही डिजिटल मिलान किया गया, रिकॉर्ड में उन रोल नंबरों का कोई अस्तित्व ही नहीं मिला। ठगी का शिकार हुए छात्रों ने अब दोषी साइबर कैफे संचालकों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस इस गिरोह के तार खंगालने में जुट गई है। ^परीक्षार्थियों के सभी दस्तावेजों की गहन जांच के निर्देश दिए गए हैं। फर्जी कागजातों के साथ परीक्षा केन्द्र में प्रवेश करना ही एक गंभीर और दंडनीय अपराध है। ऐसे फर्जी छात्रों और उनके पीछे सक्रिय गिरोह पर तुरंत प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश सभी केन्द्राधीक्षकों को दिया गया है। – प्रो. विवेकानन्द सिंह, कुलपति, पूर्णिया विश्वविद्यालय भास्कर न्यूज | पूर्णिया पूर्णिया विश्वविद्यालय के स्नातक थर्ड सेमेस्टर की परीक्षा में छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ का एक बड़ा मामला सामने आया है। परीक्षा फॉर्म भरने से वंचित रह गए दर्जनों छात्रों को साइबर कैफे संचालकों ने अपनी ठगी का शिकार बनाया है। कैफे संचालकों ने इन छात्रों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे मोटी रकम वसूली और बदले में उन्हें फर्जी एडमिट कार्ड थमा दिए। मामले का खुलासा तब हुआ जब ये छात्र फर्जी एडमिट कार्ड लेकर विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे। प्रवेश के समय जब केंद्र अधीक्षकों ने बार कोड और रोल नंबर का मिलान किया, तो एडमिट कार्ड फर्जी पाए गए। इस फर्जीवाड़े के कारण कई केंद्रों पर छात्र पकड़े गए, जिन्हें परीक्षा में बैठने से तुरंत रोक दिया गया। विवि प्रशासन ने छात्रों को आगाह किया है कि वे किसी भी अनाधिकृत स्रोत से दस्तावेज न लें। एडमिट कार्ड केवल विवि के आधिकारिक पोर्टल से डाउनलोड किए जा सकते हैं। छात्रों ने जल्दबाजी में साइबर कैफे पर भरोसा किया और अपने शैक्षणिक सत्र को जोखिम में डाल दिया। केन्द्राधीक्षकों को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश साइबर कैफे संचालकों ने तकनीक का दुरुपयोग कर हुबहू असली दिखने वाले प्रवेश पत्र तैयार किए थे। जांच के दौरान जैसे ही डिजिटल मिलान किया गया, रिकॉर्ड में उन रोल नंबरों का कोई अस्तित्व ही नहीं मिला। ठगी का शिकार हुए छात्रों ने अब दोषी साइबर कैफे संचालकों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस इस गिरोह के तार खंगालने में जुट गई है। ^परीक्षार्थियों के सभी दस्तावेजों की गहन जांच के निर्देश दिए गए हैं। फर्जी कागजातों के साथ परीक्षा केन्द्र में प्रवेश करना ही एक गंभीर और दंडनीय अपराध है। ऐसे फर्जी छात्रों और उनके पीछे सक्रिय गिरोह पर तुरंत प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश सभी केन्द्राधीक्षकों को दिया गया है। – प्रो. विवेकानन्द सिंह, कुलपति, पूर्णिया विश्वविद्यालय


