रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पिछले हफ्ते पश्चिमी देशों को चेतावनी दी थी कि यूक्रेन मुद्दे पर तनाव बढ़ाने से बचें। उन्होंने कलिनिनग्राद की सुरक्षा के लिए परमाणु हथियार इस्तेमाल करने की बात तक कही थी।
इस चेतावनी के बाद फ्रांस ने बड़ा कदम उठाया है। फ्रांस ने अपना सबसे नया परमाणु मिसाइल टेस्ट किया है। फ्रांस के रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि एम51.3 नाम के नए पनडुब्बी से दागे जाने वाले मिसाइल का पहला परीक्षण सफलतापूर्वक हो गया।
कहां किया गया टेस्ट?
यह परीक्षण ब्रिटनी के समुद्री तट से किया गया। मिसाइल में कोई परमाणु बम नहीं था। यह सिर्फ यह देखने के लिए था कि ले विजिलेंट नाम की परमाणु पनडुब्बी में बड़े रखरखाव के बाद यह नया हथियार ठीक से काम करता है या नहीं।
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस परीक्षण को खुद देखा और एक्स पर एक वीडियो भी जारी किया। उन्होंने साफ कहा- आज हम ज्यादा मजबूत हैं। संदेश साफ और जोर से भेज दिया गया है, जहां भी पहुंचाना जरूरी था।
पहले ही हो गई थी परमाणु हथियार बढ़ाने की घोषणा
मार्च में मैक्रों ने फ्रांस के परमाणु हथियार बढ़ाने की घोषणा की थी। उन्होंने यूरोपीय सहयोगियों के साथ साझा अभ्यास और परमाणु सक्षम हथियार तैनात करने की भी बात कही थी।
नाटो ने साफ कहा है कि उसके किसी अभ्यास से रूस के इलाके को कोई खतरा नहीं है। पुतिन ने भी कहा कि रूस किसी यूरोपीय देश पर हमला नहीं करना चाहता और शांति से रहना चाहता है। फिर भी फ्रांस अपना संदेश साफ दे रहा है कि वह अपनी सुरक्षा और मूल्यों की रक्षा के लिए कीमत चुकाने को तैयार है।
फ्रांस की परमाणु ताकत कितनी बड़ी
फ्रांस अपने 290 परमाणु हथियारों को ठीक रखने में हर साल करीब 5.6 अरब यूरो खर्च करता है। ये हथियार पनडुब्बी और हवाई जहाज दोनों से दागे जा सकते हैं। दुनिया में फ्रांस का परमाणु भंडार चौथा सबसे बड़ा है।
ब्रिटेन के पास 225 हैं जबकि रूस और अमेरिका के पास पांच हजार से ज्यादा परमाणु हथियार हैं। एम51.3 फ्रांस के परमाणु मिसाइल का नया संस्करण है। यह अक्टूबर 2025 में सेवा में आया। इसकी सही रेंज फ्रांस नहीं बताता लेकिन पुराने एम51 की रेंज करीब 9 हजार किलोमीटर बताई जाती है।
अधिकारी कहते हैं कि नया वाला और दूर तक जा सकता है। फ्रांस की सुरक्षा का मुख्य आधार चार परमाणु पनडुब्बियां हैं। ये समुद्र में घूमती रहती हैं और जरूरत पड़ने पर जवाब देने के लिए तैयार रहती हैं।

