रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) को 4 साल से ज़्यादा समय बीत चुका है, लेकिन अभी भी इसके खत्म होने की उम्मीद लगभग न के बराबर है। दोनों देश एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं। रूस ज़्यादा हमले कर रहा है, लेकिन यूक्रेन भी हाथ पर हाथ रखने के बजाय जवाबी कार्रवाई कर रहा है। युद्ध को रोकने के लिए कई देश कोशिशों में जुटे हुए हैं। इसी बीच अमेरिका (United States of America) के विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) ने इस मामले में एक बड़ा बयान दिया है।
“हमारा लक्ष्य इस युद्ध को खत्म करना”
एक कार्यक्रम में जब रुबियो से यूक्रेन के मामले पर पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “यूक्रेन की नाटो (NATO) सदयस्ता पर कोई बात नहीं हो रही है। हमारा पूरा लक्ष्य इस युद्ध को खत्म करना है, अगर ऐसा संभव हो सके।”
क्या चाहता है यूक्रेन?
यूक्रेन काफी समय से नाटो का सदस्य बनना चाहता है। वो कई मौकों पर इस बारे में कह भी चुका है। हालांकि रूस इसके खिलाफ है क्योंकि दोनों देशों की बॉर्डर एक-दूसरे से लगती है और अगर यूक्रेन को नाटो की सदस्यता मिल जाती है, तो उसकी बॉर्डर पर नाटो के सैनिक तैनात हो जाएंगे। यूक्रेन अपनी सुरक्षा के लिए ऐसा ही चाहता है, लेकिन रूस ऐसा नहीं चाहता, क्योंकि बॉर्डर पर नाटो के सैनिकों की तैनाती को रूस अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता है। यूक्रेन के खिलाफ युद्ध की यह मुख्य वजह है। हालांकि युद्ध शुरू होने के बाद यूक्रेन की तरफ से अलग-अलग मौकों पर नाटो की सदयस्ता लेने से इनकार भी किया गया है, जिससे युद्ध को रोका जा सके, लेकिन उसका कोई फायदा नहीं हुआ।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भी कई मौकों पर कहा है कि यूक्रेन को नाटो की सदस्यता नहीं दी जाएगी। हालांकि नाटो देशों ने अभी तक इस युद्ध में रूस के खिलाफ यूक्रेन की काफी मदद की है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नाटो में 30 यूरोपीय देश और 2 नॉर्थ अमेरिकी देश शामिल हैं। नाटो के सभी मेंबर देश सैन्य मामलों में एक-दूसरे की मदद करते हैं। इसका सबसे ज़्यादा फायदा नाटो में शामिल छोटे देशों को मिलता है।

