डिंडौरी जिले के एक पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) से जुड़े मामले में आरोपी शेख साहिक को जबलपुर हाईकोर्ट से 30 सिंतबर को अग्रिम जमानत मिल गई है। न्यायमूर्ति रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की एकल पीठ ने आरोपी को 50 हजार रुपए के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश जारी किया। इस राहत की जानकारी मंगलवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी गई। सिटी कोतवाली में आरोपी के खिलाफ BNS और पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत 8 सिंतबर को केस दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने अधिवक्ता गिरीश राव के माध्यम से हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। कोर्ट में वकील की दलील सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल को इस मामले में झूठा फंसाया गया है। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि पुलिस अभियोजन के अनुसार आरोपी पर अश्लील मैसेज वायरल करने का आरोप लगाया गया है, लेकिन पीड़िता के बयानों में आरोपी के खिलाफ सीधे तौर पर कोई स्पष्ट आरोप नहीं है। इसके अलावा आरोपी का पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं रहा है। इन दलीलों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत मंजूर कर ली। परिजन बोले- राजनीतिक दबाव में फंसाया गया प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जामा मस्जिद के सदर शेख सफीक ने बताया कि उनका बेटा शेख साहिक फिलहाल भोपाल में रहकर एमसीए (MCA) की पढ़ाई कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय राजनीतिक प्रभाव वाले लोग उन पर दबाव बनाने की नीयत से उनके बेटे को झूठे मुकदमे में घसीट रहे हैं। शेख सफीक ने यह भी दावा किया कि करीब 12 साल पहले उनके बड़े भाई को भी इसी तरह एक झूठे मामले में फंसाया गया था।

