अलवर शहर की सरकार बनाने व हटाने में 26 हजार ‘फर्स्ट टाइम’ वोटर की बड़ी भूमिका रहेगी। ये पहली बार के वोटर ही अलवर नगर-निगम का पहला महापौर चुनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। बतादें, अब तक नगर परिषद सभापति चुने जा रहे थे। पिछली बार नगर निगम बनने के बाद सभापति को ही महापौर बनाया था। लेकिन चुनकर पहली बार महापौर बनेगा। 400 वोटों से कम रहा जीत का अंतर शहर के कुल 65 वार्डों में करीब 64.6% (42 वार्ड) ऐसे हैं जहां पिछले चुनावों में जीत का अंतर 400 वोटों से कम रहा। वहीं, इस बार हर वार्ड में औसतन 400 नए जेन-जी वोटर बढ़े रहे हैं। इनका झुकाव जिधर भी रहेगा उसकी जीत तय है। यह संख्या के केवल पहली बार के वोटरों की है। यदि हम 29 साल तक के वोटर जोड़े जाएं तो यह संख्या करीब 2 से 3 गुना हो सकती है। कैंडिडेट को बदलना होगा प्रचार का अंदाज अब तक जो उम्मीदवार पुराने रसूख और पारंपरिक चुनावी गणित के भरोसे मैदान में उतरते थे। उन्हें इस बार अपनी रणनीति बदलनी पड़ेगी। जेन-जी वोटर सड़क, बिजली और नाली जैसे बुनियादी मुद्दों के साथ-साथ शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार, सुरक्षा और डिजिटल सुविधाओं पर ध्यान देता है। सोशल मीडिया कैम्पेन और युवाओं के मुद्दों से दूरी बनाना प्रत्याशियों को भारी पड़ सकता है। पिछली बार वार्ड-65 तक कौन-कितने वोट से जीता ? वार्ड 13 से 27 तक भाग 3: वार्ड 28 से 48 तक

