गाजीपुर में बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित निकालने और आवागमन में मदद कर रहे नाविकों ने प्रशासन पर पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाया है। रेवतीपुर क्षेत्र से शुक्रवार सुबह एक नाविक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में नाविक करीब 7-8 साथियों के साथ बाढ़ क्षेत्र में फंसे होने और रातभर बिना भोजन के रहने की बात कह रहा है। डीजल और भोजन नहीं मिलने का आरोप वायरल वीडियो में नाविक ने बताया कि वे 3 सितंबर दोपहर करीब 12 बजे नाव लेकर बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए पहुंचे थे। उनका आरोप है कि नाव चलाने के लिए पर्याप्त डीजल और खाने-पीने के लिए राशन उपलब्ध नहीं कराया गया। नाविक के मुताबिक, उसे और उसके साथियों को रातभर बिना खाना खाए नाव पर ही गुजारना पड़ा। उसने बताया कि वह और उसके साथी वीरऊपुर और हसनपुरा क्षेत्र में बाढ़ के बीच फंसे हुए हैं। ताड़ीघाट निवासी नाविक बबलू चौधरी ने भी इसी तरह की शिकायत की। बबलू के अनुसार, लेखपाल ने उन्हें और उनके साथियों को बाढ़ क्षेत्र में ड्यूटी के लिए भेजा है। उनके दल में करीब 8 से 9 नावें हैं। आरोप है कि नाविकों को पर्याप्त डीजल, भोजन के साथ-साथ लाइफ जैकेट, टॉर्च और बारिश से बचने के लिए तिरपाल तक उपलब्ध नहीं कराया गया। तेज बारिश और बिजली के बीच नाव पर गुजारी रात बबलू ने बताया कि गुरुवार रात तेज बारिश और बिजली चमकने के दौरान नाविक नावों पर ही फंसे रहे। बारिश से बचने के लिए नावों को आपस में जोड़कर फटे तिरपाल के सहारे रात गुजारनी पड़ी। उनका कहना है कि डीजल की कमी के कारण कई नाविक सुरक्षित स्थान तक भी नहीं जा सके। बबलू के मुताबिक, गुरुवार शाम नाविक हसनपुरा के प्रधान से मिलने पहुंचे थे और नावों के लिए डीजल तथा भोजन उपलब्ध कराने की मांग की थी, लेकिन दोनों की व्यवस्था नहीं हो सकी। कुछ ग्रामीणों ने नाविकों के लिए खाना उपलब्ध कराया, लेकिन सभी लोगों के लिए पर्याप्त भोजन की व्यवस्था नहीं हो पाई। वीरऊपुर में भी सामने आई ऐसी ही शिकायत वीरऊपुर क्षेत्र में तैनात नाविकों ने भी इसी तरह की समस्याएं होने की बात कही है। उनका कहना है कि बाढ़ में फंसे लोगों की मदद करने के बावजूद उन्हें खुद मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है। प्रधान प्रतिनिधि बोले- सरकार से कोई व्यवस्था नहीं मिली नाविकों के आरोपों पर वीरऊपुर प्रधान मुरहिया देवी के प्रतिनिधि नाखड़ू राम ने कहा कि सरकार की ओर से गांव में कोई व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। ऐसे में ग्राम प्रधान अपनी तरफ से डीजल और अन्य खर्च कहां से उठाएं। उन्होंने बताया कि गांव में दो नावें हैं, जिनमें एक बड़ी नाव और दूसरी डेगी नाव है। नाखड़ू राम के मुताबिक, 3 सितंबर को राहत पैकेट बांटने पहुंचे भाजपा नेता पीयूष राय से भी उन्होंने एक और नाव उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि नाव के तेल, पानी और अन्य खर्च की व्यवस्था भी वहीं से होनी चाहिए, क्योंकि ग्राम प्रधान के स्तर से इतना खर्च उठाना संभव नहीं है। प्रधान प्रतिनिधि ने कहा कि प्रशासन मौके पर पहुंचकर पूरी स्थिति की जांच कर सकता है। उन्होंने दावा किया कि जांच में मौके पर उपलब्ध और अनुपलब्ध व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी। बाढ़ राहत में जुटे नाविकों की सुरक्षा पर उठे सवाल बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नाविक लोगों को सुरक्षित निकालने और जरूरी सामान पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में उनके पास डीजल, भोजन और सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं होने के आरोपों ने राहत व्यवस्था में लगे नाविकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं। वायरल वीडियो और नाविकों की शिकायतों के बीच उनकी मांग है कि उन्हें तत्काल पर्याप्त डीजल, भोजन, लाइफ जैकेट, टॉर्च और बारिश से बचाव के लिए तिरपाल समेत अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे खुद की सुरक्षा के साथ बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद कर सकें।

