नवरात्र में कीर्ति और गौरी को मिला स्नेह:बेहतर भविष्य की जगी उम्मीद, आकांक्षा समिति अध्यक्ष ने दिए उपहार

नवरात्र में कीर्ति और गौरी को मिला स्नेह:बेहतर भविष्य की जगी उम्मीद, आकांक्षा समिति अध्यक्ष ने दिए उपहार

सोनभद्र मे अपनों के स्नेह और परिवार की छांव से दूर दो मासूम बच्चियों के जीवन में खुशियां भरने की पहल की जा रही है। लावारिस हालत में मिली कीर्ति और गौरी की बेहतर परवरिश और सुरक्षित भविष्य के लिए जिले में ‘हमारी कीर्ति अभियान’ चलाया जा रहा है। नवरात्र के पावन अवसर पर इस अभियान के तहत आकांक्षा समिति की अध्यक्ष आरुषी मिश्रा ने वन स्टॉप सेंटर स्थित दत्तक ग्रहण इकाई पहुंचकर दोनों बच्चियों से मुलाकात की। उन्होंने बच्चियों को उपहार भेंट किए और उनके साथ समय बिताकर स्नेह और अपनत्व का एहसास कराया। मासूम बच्चियों से मुलाकात के दौरान भावुक हुईं आरुषी मिश्रा ने उनके सुखद भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को प्यार, सुरक्षा और परिवार का स्नेह पाने का अधिकार है। बचपन में मिलने वाला सुरक्षित और स्नेहिल वातावरण बच्चों के व्यक्तित्व और भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में इन बच्चियों को भी ऐसा परिवार मिलना चाहिए, जहां उन्हें भरपूर प्यार और देखभाल मिल सके। नियमानुसार दत्तक ग्रहण प्रक्रिया तेज करने पर जोर मिशन शक्ति के अंतर्गत आयोजित इस पहल का उद्देश्य बच्चियों को अपनत्व का एहसास कराने के साथ उनके बेहतर भविष्य की राह तैयार करना है। आरुषी मिश्रा ने संबंधित प्रक्रिया को नियमानुसार शीघ्र आगे बढ़ाने पर जोर दिया, ताकि दोनों बच्चियों को जल्द से जल्द स्नेहिल परिवार मिल सके। हालांकि, दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत ही पूरी की जाएगी। समाज से सहयोग की अपील आकांक्षा समिति की अध्यक्ष आरुषी मिश्रा ने जनपदवासियों से ‘हमारी कीर्ति अभियान’ से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोग अपनी सामर्थ्य और इच्छानुसार बच्चियों के लिए उपहार भेंट कर इस पहल में सहयोग कर सकते हैं। समाज की छोटी-छोटी कोशिशें भी इन मासूमों के जीवन में बड़ी खुशियां ला सकती हैं। नवरात्र के अवसर पर शुरू की गई यह पहल समाज को संवेदनशीलता और मानवीय जिम्मेदारी का संदेश देती है। जरूरत है कि लोग आगे आएं और कीर्ति व गौरी के जीवन को खुशहाल बनाने में अपनी भूमिका निभाएं, ताकि दोनों बच्चियों को सुरक्षित भविष्य और परिवार के स्नेह का सहारा मिल सके।

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