हर साल की तरह इस साल भी जबलपुर के गौरीघाट में नर्मदा नदी के तट पर विदेशी प्रवासी पक्षियों की अठखेलियां शुरू हो गई हैं। सर्दी आते ही हजारों किलोमीटर दूर से ये पक्षी नर्मदा का रुख करते हैं। पानी की लहरों के बीच तैरते और नदी के ऊपर उड़ान भरते इन खूबसूरत परिंदों को देखने के लिए बड़ी संख्या में शहरवासी घाट पर पहुंच रहे हैं। अक्टूबर की शुरुआत से ही हजारों पक्षियों की चहल-पहल शुरू हो जाती है। ठंडे देशों से लंबा सफर तय करके आने वाले ये मेहमान पक्षी घाटों की रौनक बढ़ा देते हैं। इनकी मौजूदगी से नर्मदा के घाटों और आसपास के जलाशयों की प्राकृतिक खूबसूरती भी बढ़ जाती है। शहर के आसपास पक्षियों की 400 प्रजातियां बर्ड वॉचर जगत फ्लोरा के मुताबिक, शहर की भौगोलिक स्थिति और यहां मौजूद जलस्रोत पक्षियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करते हैं। शहर के आसपास करीब 400 प्रजातियों के पक्षी देखे जाते हैं। इनमें 100 से अधिक विदेशी प्रजातियों के पक्षी हैं। उन्होंने बताया कि ये पक्षी ठंड से बचने के लिए यहां आते हैं, जबकि प्रजनन अपने मूल देश में करते हैं। अक्टूबर से मार्च-अप्रैल तक रहती है मौजूदगी एक्सपर्ट सुधीर जैन के मुताबिक, माइग्रेटरी बर्ड ठंडे देशों से अनुकूल मौसम और भोजन की तलाश में भारत आते हैं। सर्दियों का समय बिताने के बाद मौसम बदलने पर अपने मूल क्षेत्रों की ओर लौट जाते हैं। अक्टूबर की शुरुआत में हजारों की संख्या में ये पक्षी नर्मदा के घाटों पर पहुंचते हैं और मार्च-अप्रैल तक यहां किनारों पर दिखाई देते हैं। पक्षियों को नमकीन-आटा खिलाना नुकसानदायक गौरीघाट पर पक्षियों को करीब से देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। कई लोग उन्हें नमकीन, आटा और दूसरी खाने-पीने की चीजें खिलाते हैं। हालांकि, पक्षियों के प्रति अपनापन दिखाने का यह तरीका उनकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे इकोसिस्टम में पक्षियों की भूमिका भी प्रभावित हो सकती है। एक्सपर्ट विजय सिंह के मुताबिक, अधिक नमक और तेल वाले खाद्य पदार्थ पक्षियों के प्राकृतिक भोजन का विकल्प नहीं हैं। ऐसे में उन्हें खाना खिलाने के बजाय उनके प्राकृतिक व्यवहार को दूर से देखना और घाटों को साफ रखना ज्यादा जरूरी है। प्रवासी पक्षियों से जुड़ी खास बातें प्रमुख प्रजातियां: माइग्रेटरी बर्ड में ब्लैक हेडेड गल और ब्राउन हेडेड गल शामिल हैं। लोगों के लिए आकर्षण: नदी में पक्षियों की अठखेलियां लोगों को आकर्षित करती हैं। रात का ठिकाना: अंधेरा होने पर ये पक्षी बरगी डैम की ओर रुख करते हैं और वहां शांत पानी में रात बिताते हैं।

