हौसले बुलंद हों तो चुनौतियां भी कामयाबी का रास्ता बन जाती हैं। अजमेर की पैरा निशानेबाज सृष्टि अरोड़ा ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। जन्म से दाएं हाथ से दिव्यांग सृष्टि ने निशानेबाजी में कॅरियर बनाने के लिए अच्छी नौकरी छोड़ दी। वर्ष 2023 तक उन्होंने कभी पिस्टल तक नहीं पकड़ी थी, लेकिन महज तीन साल के अभ्यास ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा दिया। जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियाई पैरा खेलों में सृष्टि ने महिला 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच-1 स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया। आठ निशानेबाजों के बीच हुए फाइनल में सृष्टि ने 214.7 अंक हासिल कर तीसरा स्थान प्राप्त किया। बुधवार को अजमेर पहुंचने पर नगर निगम मेयर अनामिका शर्मा ने उनका स्वागत किया। एक मुलाकात ने बदल दी जिंदगी सृष्टि के निशानेबाज बनने की कहानी भी दिलचस्प है। मथुरा-वृंदावन यात्रा के दौरान एक होटल की पार्किंग में उनकी मुलाकात स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के सचिव कन्हैया गुर्जर से हुई। बातचीत के दौरान उन्होंने सृष्टि को निशानेबाजी में कॅरियर बनाने का सुझाव दिया। यही सलाह उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बन गई। सृष्टि ने नौकरी छोड़कर अभ्यास शुरू किया और पहली ही जिला स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत लिया। इस सफलता ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। बाएं हाथ को बनाया निशाने की ताकत जन्म से दाएं हाथ से दिव्यांग होने के कारण सृष्टि ने बाएं हाथ से लिखना सीखा। इसी हाथ को उन्होंने निशानेबाजी में अपनी ताकत बनाया। नियमित अभ्यास और मेहनत के दम पर उन्होंने अपनी कमजोरी को कभी कामयाबी के आड़े नहीं आने दिया। उनके पिता शैलेश अरोड़ा रेलवे से सेवानिवृत्त हैं, जबकि मां किरण अरोड़ा गृहिणी हैं। विश्व कप में भी जीते कई पदक सृष्टि ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी शानदार प्रदर्शन किया है। मई-जून 2025 में दक्षिण कोरिया में हुए विश्व कप में उन्होंने दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता। इस प्रतियोगिता में भारतीय महिला टीम ने विश्व और एशियाई रिकॉर्ड भी बनाए। नवंबर 2025 में यूएई में आयोजित विश्व कप की मिक्स्ड और महिला टीम स्पर्धाओं में भी सृष्टि ने स्वर्ण पदक हासिल किए। इसके अलावा दक्षिण कोरिया में आयोजित वर्ल्ड शूटिंग पैरा स्पोर्ट चैंपियनशिप में मनीष नरवाल के साथ 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड स्पर्धा में कांस्य और टीम स्पर्धा में रजत पदक जीता। अब पैरालंपिक में पदक का लक्ष्य सृष्टि फिलहाल दिल्ली में भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत तैयारी कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय शूटिंग कोच पवित्र के मार्गदर्शन में उनका अभ्यास जारी है। अब उनकी नजर 2028 के पैरालंपिक खेलों पर है।

