टॉयलेट में नहाना व बर्तन मांजना मजबूरी:रिम्स में महिला होमगार्ड्स के कमरों में दरवाजा नहीं

टॉयलेट में नहाना व बर्तन मांजना मजबूरी:रिम्स में महिला होमगार्ड्स के कमरों में दरवाजा नहीं

माणिक बोस/रितु लकड़ा की रिपोर्ट राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में हजारों मरीजों, डॉक्टरों और अस्पताल की हिफाजत का जिम्मा संभालने वाली महिला होमगार्ड जवान खुद घोर असुरक्षा और उपेक्षा के साए में जीने को मजबूर हैं। जिस बैरक में 450 से अधिक महिला जवानों और उनके मासूम बच्चों के ठहरने का इंतजाम किया गया है, वहां बुनियादी सुविधाओं का नामोनिशान नहीं है। कमरों में किवाड़ तक नहीं हैं, जबकि ठीक ऊपरी तल्ले पर पुरुष जवान रहते हैं। कमरे में कई बेड टूटे पड़े हैं और फर्श पर सोने की मजबूरी है। गलियारों और बरामदों में रिम्स स्टोर के सैकड़ों भारी-भरकम बॉक्स डंप कर दिए गए हैं, जिससे रास्ता इतना संकरा हो गया है कि आए दिन बक्से गिरने से मार्ग अवरुद्ध हो जाता है। महिला जवानों का कहना है कि वे बीते तीन वर्षों से इस नारकीय स्थिति को झेल रही हैं और कई बार उच्च स्तर पर गुहार लगाने के बावजूद अब तक कोई सुध नहीं ली गई। बाथरूम के दरवाजों के टूटे होने के कारण महिला जवान टॉयलेट के भीतर ही नहाने को मजबूर हैं। 450 जवानों के बीच शौचालयों की भारी कमी के कारण ड्यूटी पर जाने से कई घंटे पहले कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। टॉयलेट सीट के पास बर्तन धोना पड़ता है कमरों के बाहर लगे वॉशबेसिन में निकासी पाइप ही नहीं है। पानी की निकासी न होने के कारण मजबूरी में महिला जवानों को टॉयलेट सीट के पास बैठकर जूठे बर्तन धोने पड़ते हैं। नहाने के बाद बाल्टी से गंदा पानी बाहर फेंकना पड़ता है। खिड़कियों के टूटे हुए कांच लटके पड़े हैं, जो तेज हवा चलने पर गिरकर बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।
फिसलन इतनी कि बिना सहारे चलना मुश्किल बाथरूम के फर्श पर गंदा पानी जमा रहता है। फिसलन इतनी कि बिना सहारे के अंदर जाना मुश्किल है। अस्थाई गेट के सहारे किसी तरह अंदर जाना पड़ता है। महिला होमगार्ड्स ने बताई व्यथा… तीन साल से इसी स्थिति में, 4 माह से वेतन भी नहीं : एक महिला जवान ने कहा कि शुरुआत में बहुत खुशी थी कि रांची जैसे बड़े शहर में सेवा देने जा रही हूं। लेकिन यहां आकर नारकीय व्यवस्था में रहने को विवश हैं। पिछले चार महीनों से वेतन भी नहीं मिला है। इतनी कम आमदनी में बाहर किराए पर कमरा लेकर रहना भी मुमकिन नहीं है। रात में बिजली कटी तो अंधेरे में रहना पड़ता है: एक अन्य महिला जवान ने बताया कि​ चारों तरफ बड़े-बड़े बॉक्स डंप कर दिए गए हैं और पीछे का गेट बंद कर दिया गया है। चारों ओर से यह इतना बंद है कि लगता है किसी जेल में रह रहे हों। नाइट ड्यूटी से लौटते वक्त अगर बिजली न रहे, तो पूरे बैरक में अंधेरा छा जाता है। प्रबंधन जल्द इसे ठीक करेगा
महिला होमगार्ड जहां रह रहीं हैं, वह दरअसल एक डोरमेट्री जैसा एरिया है। महिला जवानों की सुरक्षा-सुविधा की जिम्मेदारी एडमिनिस्ट्रेशन की ही है। अगर महिला होमगार्ड को किसी भी तरह की दिक्कत हो रही है तो प्रबंधन जल्द से जल्द इसे ठीक करेगा। – डॉ. शिशिर कुमार महतो, पीआरओ, रिम्स माणिक बोस/रितु लकड़ा की रिपोर्ट राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में हजारों मरीजों, डॉक्टरों और अस्पताल की हिफाजत का जिम्मा संभालने वाली महिला होमगार्ड जवान खुद घोर असुरक्षा और उपेक्षा के साए में जीने को मजबूर हैं। जिस बैरक में 450 से अधिक महिला जवानों और उनके मासूम बच्चों के ठहरने का इंतजाम किया गया है, वहां बुनियादी सुविधाओं का नामोनिशान नहीं है। कमरों में किवाड़ तक नहीं हैं, जबकि ठीक ऊपरी तल्ले पर पुरुष जवान रहते हैं। कमरे में कई बेड टूटे पड़े हैं और फर्श पर सोने की मजबूरी है। गलियारों और बरामदों में रिम्स स्टोर के सैकड़ों भारी-भरकम बॉक्स डंप कर दिए गए हैं, जिससे रास्ता इतना संकरा हो गया है कि आए दिन बक्से गिरने से मार्ग अवरुद्ध हो जाता है। महिला जवानों का कहना है कि वे बीते तीन वर्षों से इस नारकीय स्थिति को झेल रही हैं और कई बार उच्च स्तर पर गुहार लगाने के बावजूद अब तक कोई सुध नहीं ली गई। बाथरूम के दरवाजों के टूटे होने के कारण महिला जवान टॉयलेट के भीतर ही नहाने को मजबूर हैं। 450 जवानों के बीच शौचालयों की भारी कमी के कारण ड्यूटी पर जाने से कई घंटे पहले कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। टॉयलेट सीट के पास बर्तन धोना पड़ता है कमरों के बाहर लगे वॉशबेसिन में निकासी पाइप ही नहीं है। पानी की निकासी न होने के कारण मजबूरी में महिला जवानों को टॉयलेट सीट के पास बैठकर जूठे बर्तन धोने पड़ते हैं। नहाने के बाद बाल्टी से गंदा पानी बाहर फेंकना पड़ता है। खिड़कियों के टूटे हुए कांच लटके पड़े हैं, जो तेज हवा चलने पर गिरकर बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।
फिसलन इतनी कि बिना सहारे चलना मुश्किल बाथरूम के फर्श पर गंदा पानी जमा रहता है। फिसलन इतनी कि बिना सहारे के अंदर जाना मुश्किल है। अस्थाई गेट के सहारे किसी तरह अंदर जाना पड़ता है। महिला होमगार्ड्स ने बताई व्यथा… तीन साल से इसी स्थिति में, 4 माह से वेतन भी नहीं : एक महिला जवान ने कहा कि शुरुआत में बहुत खुशी थी कि रांची जैसे बड़े शहर में सेवा देने जा रही हूं। लेकिन यहां आकर नारकीय व्यवस्था में रहने को विवश हैं। पिछले चार महीनों से वेतन भी नहीं मिला है। इतनी कम आमदनी में बाहर किराए पर कमरा लेकर रहना भी मुमकिन नहीं है। रात में बिजली कटी तो अंधेरे में रहना पड़ता है: एक अन्य महिला जवान ने बताया कि​ चारों तरफ बड़े-बड़े बॉक्स डंप कर दिए गए हैं और पीछे का गेट बंद कर दिया गया है। चारों ओर से यह इतना बंद है कि लगता है किसी जेल में रह रहे हों। नाइट ड्यूटी से लौटते वक्त अगर बिजली न रहे, तो पूरे बैरक में अंधेरा छा जाता है। प्रबंधन जल्द इसे ठीक करेगा
महिला होमगार्ड जहां रह रहीं हैं, वह दरअसल एक डोरमेट्री जैसा एरिया है। महिला जवानों की सुरक्षा-सुविधा की जिम्मेदारी एडमिनिस्ट्रेशन की ही है। अगर महिला होमगार्ड को किसी भी तरह की दिक्कत हो रही है तो प्रबंधन जल्द से जल्द इसे ठीक करेगा। – डॉ. शिशिर कुमार महतो, पीआरओ, रिम्स  

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