बेतिया में पुलिस हिरासत में दिलशाद अंसारी की मौत का मामला बढ़ता जा रहा है। घटना के 24 घंटे से ज्यादा बीतने के बाद भी शव का अंतिम संस्कार नहीं हुआ है। मृतक की पत्नी नगमा खातून ने पुलिस पर हत्या का आरोप लगाया है। उन्होंने सभी शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या (धारा 302) की FIR दर्ज करने और दोषी पाए जाने पर फांसी की सजा देने की मांग की है। नगमा खातून ने अपनी चार महीने की बेटी के भविष्य के लिए सरकारी नौकरी और उचित मुआवजे की भी मांग की है। सिर पर गंभीर चोट के निशान मिलने के आरोप परिजनों के मुताबिक, 12 अक्टूबर की रात करीब 2 बजे बानूछापर और सहोदरा थाने की पुलिस औरैया के बढ़ई टोला से दिलशाद अंसारी को हिरासत में लेकर गई थी। सुबह करीब 5 बजे परिजनों को फोन पर दिलशाद की तबीयत खराब होने की सूचना मिली। जब वे जीएमसीएच पहुंचे, तो दिलशाद मृत मिला। परिजनों का आरोप है कि उसके सिर पर गंभीर चोट के निशान थे, जिससे पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ गए हैं। पुलिसकर्मियों को कड़ी सजा देने की मांग पत्नी नगमा खातून का कहना है कि जिस मामले में पति को हिरासत में लिया गया था, उसमें उनका नाम नहीं था। पुलिस ने दिलशाद को NDPS कांड संख्या 65/25 का आरोपी बताया है और कहा है कि वह गाड़ी से कूद गया था। नगमा ने पुलिस के इस दावे को साजिश बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों को कड़ी सजा देने की मांग की है। नगमा खातून का दर्द उस वक्त और छलक पड़ा, जब उन्होंने अपनी चार महीने की बेटी के भविष्य का सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उनकी मासूम बच्ची के सिर से पिता का साया उठ गया है। अब उसकी परवरिश कैसे होगी और परिवार का भरण-पोषण कैसे चलेगा? इसी को लेकर उन्होंने सरकार से सरकारी नौकरी और उचित मुआवजा देने की मांग की है। फिलहाल, दिलशाद अंसारी की मौत को लेकर परिजनों के आरोप, पुलिस का पक्ष और हिरासत के दौरान हुई घटना की परिस्थितियां जांच का विषय हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दिलशाद की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उसके सिर पर गंभीर चोटें कैसे आईं? इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच और आधिकारिक तथ्यों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। बेतिया में पुलिस हिरासत में दिलशाद अंसारी की मौत का मामला बढ़ता जा रहा है। घटना के 24 घंटे से ज्यादा बीतने के बाद भी शव का अंतिम संस्कार नहीं हुआ है। मृतक की पत्नी नगमा खातून ने पुलिस पर हत्या का आरोप लगाया है। उन्होंने सभी शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या (धारा 302) की FIR दर्ज करने और दोषी पाए जाने पर फांसी की सजा देने की मांग की है। नगमा खातून ने अपनी चार महीने की बेटी के भविष्य के लिए सरकारी नौकरी और उचित मुआवजे की भी मांग की है। सिर पर गंभीर चोट के निशान मिलने के आरोप परिजनों के मुताबिक, 12 अक्टूबर की रात करीब 2 बजे बानूछापर और सहोदरा थाने की पुलिस औरैया के बढ़ई टोला से दिलशाद अंसारी को हिरासत में लेकर गई थी। सुबह करीब 5 बजे परिजनों को फोन पर दिलशाद की तबीयत खराब होने की सूचना मिली। जब वे जीएमसीएच पहुंचे, तो दिलशाद मृत मिला। परिजनों का आरोप है कि उसके सिर पर गंभीर चोट के निशान थे, जिससे पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ गए हैं। पुलिसकर्मियों को कड़ी सजा देने की मांग पत्नी नगमा खातून का कहना है कि जिस मामले में पति को हिरासत में लिया गया था, उसमें उनका नाम नहीं था। पुलिस ने दिलशाद को NDPS कांड संख्या 65/25 का आरोपी बताया है और कहा है कि वह गाड़ी से कूद गया था। नगमा ने पुलिस के इस दावे को साजिश बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों को कड़ी सजा देने की मांग की है। नगमा खातून का दर्द उस वक्त और छलक पड़ा, जब उन्होंने अपनी चार महीने की बेटी के भविष्य का सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उनकी मासूम बच्ची के सिर से पिता का साया उठ गया है। अब उसकी परवरिश कैसे होगी और परिवार का भरण-पोषण कैसे चलेगा? इसी को लेकर उन्होंने सरकार से सरकारी नौकरी और उचित मुआवजा देने की मांग की है। फिलहाल, दिलशाद अंसारी की मौत को लेकर परिजनों के आरोप, पुलिस का पक्ष और हिरासत के दौरान हुई घटना की परिस्थितियां जांच का विषय हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दिलशाद की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उसके सिर पर गंभीर चोटें कैसे आईं? इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच और आधिकारिक तथ्यों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

