सेंट्रल यूनिवर्सिटी झारखंड (CUJ) के चेरी मनातू कैंपस में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। मेस की लगातार बढ़ती फीस, खाने की खराब गुणवत्ता और छात्र प्रतिनिधित्व नहीं होने के विरोध में करीब 200 छात्र धरने पर बैठ गए हैं। छात्रों का आंदोलन रविवार सुबह से ही जारी है। यूनिवर्सिटी के दो छात्र अनिल कुमार और मृत्युंजय कुमार अनशन पर बैठे हैं। धरने पर बैठे छात्रों ने साफ कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। प्रशासन को मेस फीस में बढ़ोतरी का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने के साथ खाने की गुणवत्ता में सुधार और छात्रों की समस्याओं पर ठोस निर्णय लेना होगा। छात्रों का कहना है कि मेस में लगातार बढ़ती फीस के बावजूद भोजन की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। इससे छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। उन्हें बेहतर सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं। आंदोलन अधिकार और पारदर्शिता के लिए छात्रों ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्थान के खिलाफ नहीं है। यह स्टूडेंट्स के अधिकार, पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वविद्यालय के निर्णयों में छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित कराने के लिए है। छात्रों के मुताबिक सीयूजे एक्ट में स्टूडेंट यूनियन के गठन का प्रावधान है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण बैठकों और निर्णय लेने की प्रक्रिया में छात्रों के प्रतिनिधि शामिल नहीं होते हैं। छात्रों का आरोप है कि प्रतिनिधित्व नहीं होने के कारण प्रशासन कई फैसले छात्रों की राय जाने बिना ले रहा है। छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। उनका कहना है कि फीस, भोजन की गुणवत्ता और छात्र प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे सीधे विद्यार्थियों के हितों से जुड़े हैं। जब तक इन मांगों पर स्पष्ट और लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी गई है। छात्रों ने प्रशासन से तत्काल वार्ता कर समाधान निकालने की मांग की है। एक साल में मेस फीस 1179 रुपए बढ़ी आंदोलन का बड़ा मुद्दा हॉस्टल मेस की बढ़ती फीस है। छात्रों के मुताबिक ग्रीष्मावकाश 2025 से पहले मेस शुल्क करीब 2,621 रुपए प्रति माह था। इसमें शाम का स्नैक्स भी शामिल था। इसके बाद शुल्क बढ़कर 3,071 (यूजी हॉस्टल) और 3,377 (पीजी व पीएचडी हॉस्टल) तक पहुंच गया। छात्रों का कहना है कि अब शुल्क 3,800 रुपए प्रतिमाह करने की बात सामने आई है। खास बात यह है कि इस शुल्क में शाम का स्नैक्स भी शामिल नहीं बताया जा रहा है। छात्रों ने सवाल उठाया कि शुल्क में बढ़ोतरी का आधार क्या है। खाने की लागत कितनी आती है और एजेंसी को कितना भुगतान किया जाता है। उन्होंने इसे सार्वजनिक करने की मांग की। सिर्फ आश्वासन मिला… कोई कार्रवाई नहीं चल रहे धरने के बीच छात्रों से बातचीत के लिए वार्डन सुभाष कुमार बैठा, एसोसिएट डीएसडब्ल्यू शैलेंद्र कुमार और चीफ प्रॉक्टर अमरेंद्र कुमार पहुंचे। अधिकारियों ने धरने पर बैठे छात्रों से बातचीत की और उनकी मांगों को कुलपति और अन्य विवि अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। हालांकि, छात्रों के अनुसार रात 9 बजे तक उनकी मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई थी। परीक्षा से रोके जाने पर दो छात्र अनशन पर इधर सीयूजे के पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड गणित पाठ्यक्रम के दो छात्र आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। मनु कुमार और ऋषि कुमार का आरोप है कि कम अटेंडेंस के कारण उन्हें परीक्षा में शामिल होने से रोका जा रहा है। जबकि उन्होंने अपनी बीमारी से संबंधित मेडिकल दस्तावेज विश्वविद्यालय में जमा किए थे। इसके बावजूद उनकी समस्या पर अपेक्षित विचार नहीं किया गया। सेंट्रल यूनिवर्सिटी झारखंड (CUJ) के चेरी मनातू कैंपस में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। मेस की लगातार बढ़ती फीस, खाने की खराब गुणवत्ता और छात्र प्रतिनिधित्व नहीं होने के विरोध में करीब 200 छात्र धरने पर बैठ गए हैं। छात्रों का आंदोलन रविवार सुबह से ही जारी है। यूनिवर्सिटी के दो छात्र अनिल कुमार और मृत्युंजय कुमार अनशन पर बैठे हैं। धरने पर बैठे छात्रों ने साफ कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। प्रशासन को मेस फीस में बढ़ोतरी का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने के साथ खाने की गुणवत्ता में सुधार और छात्रों की समस्याओं पर ठोस निर्णय लेना होगा। छात्रों का कहना है कि मेस में लगातार बढ़ती फीस के बावजूद भोजन की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। इससे छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। उन्हें बेहतर सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं। आंदोलन अधिकार और पारदर्शिता के लिए छात्रों ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्थान के खिलाफ नहीं है। यह स्टूडेंट्स के अधिकार, पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वविद्यालय के निर्णयों में छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित कराने के लिए है। छात्रों के मुताबिक सीयूजे एक्ट में स्टूडेंट यूनियन के गठन का प्रावधान है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण बैठकों और निर्णय लेने की प्रक्रिया में छात्रों के प्रतिनिधि शामिल नहीं होते हैं। छात्रों का आरोप है कि प्रतिनिधित्व नहीं होने के कारण प्रशासन कई फैसले छात्रों की राय जाने बिना ले रहा है। छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। उनका कहना है कि फीस, भोजन की गुणवत्ता और छात्र प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे सीधे विद्यार्थियों के हितों से जुड़े हैं। जब तक इन मांगों पर स्पष्ट और लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी गई है। छात्रों ने प्रशासन से तत्काल वार्ता कर समाधान निकालने की मांग की है। एक साल में मेस फीस 1179 रुपए बढ़ी आंदोलन का बड़ा मुद्दा हॉस्टल मेस की बढ़ती फीस है। छात्रों के मुताबिक ग्रीष्मावकाश 2025 से पहले मेस शुल्क करीब 2,621 रुपए प्रति माह था। इसमें शाम का स्नैक्स भी शामिल था। इसके बाद शुल्क बढ़कर 3,071 (यूजी हॉस्टल) और 3,377 (पीजी व पीएचडी हॉस्टल) तक पहुंच गया। छात्रों का कहना है कि अब शुल्क 3,800 रुपए प्रतिमाह करने की बात सामने आई है। खास बात यह है कि इस शुल्क में शाम का स्नैक्स भी शामिल नहीं बताया जा रहा है। छात्रों ने सवाल उठाया कि शुल्क में बढ़ोतरी का आधार क्या है। खाने की लागत कितनी आती है और एजेंसी को कितना भुगतान किया जाता है। उन्होंने इसे सार्वजनिक करने की मांग की। सिर्फ आश्वासन मिला… कोई कार्रवाई नहीं चल रहे धरने के बीच छात्रों से बातचीत के लिए वार्डन सुभाष कुमार बैठा, एसोसिएट डीएसडब्ल्यू शैलेंद्र कुमार और चीफ प्रॉक्टर अमरेंद्र कुमार पहुंचे। अधिकारियों ने धरने पर बैठे छात्रों से बातचीत की और उनकी मांगों को कुलपति और अन्य विवि अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। हालांकि, छात्रों के अनुसार रात 9 बजे तक उनकी मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई थी। परीक्षा से रोके जाने पर दो छात्र अनशन पर इधर सीयूजे के पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड गणित पाठ्यक्रम के दो छात्र आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। मनु कुमार और ऋषि कुमार का आरोप है कि कम अटेंडेंस के कारण उन्हें परीक्षा में शामिल होने से रोका जा रहा है। जबकि उन्होंने अपनी बीमारी से संबंधित मेडिकल दस्तावेज विश्वविद्यालय में जमा किए थे। इसके बावजूद उनकी समस्या पर अपेक्षित विचार नहीं किया गया।

