‘जो खो चुके हैं, उसे वापस लाएंगे’ मिथुन का बड़ा दांव, बंगाल की सियासत में अब संस्कृति के रास्ते BJP का नया नैरेटिव

‘जो खो चुके हैं, उसे वापस लाएंगे’ मिथुन का बड़ा दांव, बंगाल की सियासत में अब संस्कृति के रास्ते BJP का नया नैरेटिव

Mithun Chakraborty Latest News: भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती ने बंगाल की खोई सांस्कृतिक और फिल्मी पहचान वापस लाने का संकल्प जताया है। उन्होंने फिल्म शूटिंग के लिए 30% सब्सिडी और उत्तम कुमार के नाम पर फिल्म संस्थान बनाने की योजना की जानकारी दी। 

West Bengal Politics: ‘हम जो खो चुके हैं, उसे वापस लाने की कोशिश करेंगे।’ अभिनेता और भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती का यह बयान सिर्फ बंगाल की फिल्म इंडस्ट्री को लेकर किया गया सामान्य ऐलान नहीं है। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद मिथुन को सांस्कृतिक सलाहकार की जिम्मेदारी मिलना और उसके बाद बंगाल की कला, सिनेमा और सांस्कृतिक पहचान को लेकर सरकार की योजनाएं सामने आना अपने आप में राजनीतिक तौर पर भी महत्वपूर्ण है।

मिथुन ने कोलकाता में कहा कि बंगाल की फिल्म इंडस्ट्री को दोबारा मजबूत करने की कोशिश की जाएगी। इसके लिए पूरे देश के फिल्म निर्माताओं को बंगाल में शूटिंग के लिए बुलाया जाएगा और 30 फीसदी सब्सिडी देने की बात कही गई है। मिथुन ने बंगाल की प्राकृतिक खूबसूरती का जिक्र करते हुए कहा कि यहां पहाड़ भी हैं, समुद्र भी और फिल्मों के लिए जरूरी रोमांस और अलग-अलग तरह की लोकेशन भी मौजूद हैं।

मिथुन के बयान में दिखा ‘बंगाल कनेक्ट’

राजनीति में मिथुन की पहचान अब किसी परिचय की मोहताज नहीं है। वह लंबे समय से भाजपा के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं और बंगाल की राजनीति में पार्टी के लिए एक बड़ा लोकप्रिय चेहरा माने जाते हैं। ऐसे में उन्हें संस्कृति से जुड़ी जिम्मेदारी देना सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि बंगाल के सांस्कृतिक वोटर और खासकर सिनेमा से जुड़े वर्ग तक पहुंच बनाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा सकता है।

मिथुन ने जिस तरह ‘जो खो चुके हैं’ उसे वापस लाने की बात कही, उसमें बंगाल के उस पुराने दौर की झलक दिखाई देती है जब राज्य का सिनेमा और सांस्कृतिक जगत देशभर में अपनी अलग पहचान रखता था।

उत्तम कुमार के नाम पर संस्थान का ऐलान

सरकार की योजना में महानायक उत्तम कुमार के नाम पर फिल्म संस्थान बनाए जाने की बात भी सामने आई है। मिथुन ने कहा कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की ओर से जो घोषणाएं की जा रही हैं, उन्हें जमीन पर उतारने की दिशा में काम होगा। उनका दावा था कि सरकार अपने वादों को पूरा करेगी और वह खुद भी इस काम के लिए पूरी तरह साथ खड़े हैं।

यही वह हिस्सा है जहां फिल्म और राजनीति एक-दूसरे से जुड़ती दिखाई देती हैं। उत्तम कुमार बंगाली सिनेमा की सबसे बड़ी सांस्कृतिक पहचान में से एक रहे हैं। ऐसे नाम को सरकारी पहल से जोड़ना बंगाल की पुरानी सांस्कृतिक विरासत को नए राजनीतिक दौर से जोड़ने की कोशिश भी माना जा सकता है।

पुरानी पहचान लौटाने की कोशिश कितनी सफल होगी?

मिथुन का पूरा संदेश यही है कि बंगाल को सिर्फ राजनीतिक बहसों तक सीमित नहीं रखा जाए, बल्कि उसकी सांस्कृतिक ताकत को भी दोबारा सामने लाया जाए। 30 फीसदी सब्सिडी के जरिए दूसरे राज्यों के फिल्म निर्माताओं को आकर्षित करना इसी रणनीति का हिस्सा है।

अब असली परीक्षा घोषणा से आगे की है। अगर शूटिंग बढ़ती है, स्थानीय कलाकारों और तकनीशियनों को काम मिलता है और बंगाल फिर बड़े फिल्म प्रोजेक्ट्स का पसंदीदा ठिकाना बनता है, तो मिथुन की यह पहल राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों मोर्चों पर सरकार के लिए बड़ा संदेश बन सकती है।

फिलहाल मिथुन का ‘जो खो चुके हैं, उसे वापस लाएंगे’ वाला बयान बंगाल की राजनीति में एक नए सांस्कृतिक नैरेटिव की शुरुआत जरूर करता दिख रहा है।

  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *