जयपुर सचिवालय के सहायक शासन सचिव पर अलवर में FIR:महिला ने बेटे को अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर 66 हजार रुपए मांगने का लगाया आरोप

जयपुर सचिवालय के सहायक शासन सचिव पर अलवर में FIR:महिला ने बेटे को अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर 66 हजार रुपए मांगने का लगाया आरोप

अलवर शहर के अरावली विहार थाना पुलिस ने जयपुर सचिवालय में कार्यरत सहायक शासन सचिव दुर्गा सिंह के खिलाफ अनुकंपा नियुक्ति दिलाने के नाम पर रुपए लेने और धोखाधड़ी करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। अलवर निवासी स्वर्गीय पुलिसकर्मी मनोज कुमार यादव की पत्नी बिमला देवी की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार- विवेकानंद नगर निवासी बिमला देवी के पति मनोज कुमार यादव पुलिस विभाग में करौली जिले में कार्यरत थे और ड्यूटी के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद बिमला देवी ने अपने बेटे कुलदीप यादव की मृतक आश्रित के तौर पर अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। इसी सिलसिले में महिला और उसके जेठ धारा सिंह यादव की मुलाकात सचिवालय में कार्यरत दुर्गा सिंह से हुई। महिला का आरोप है कि दुर्गा सिंह ने मेरे बेटे की अनुकंपा नियुक्ति जल्द करवाने का भरोसा दिया। इसके बाद दस्तावेजों की प्रक्रिया और अधिकारियों के चाय-पानी के खर्च के नाम पर अलग-अलग समय पर रुपए लिए। परिवाद के अनुसार अप्रैल 2024 से दिसंबर 2024 के बीच फोन-पे के जरिए कुल 51 हजार रुपए दिए गए। इसके बाद भी 15 हजार रुपए मांगे। इस तरह महिला के अनुसार कुल 66 हजार रुपए दिए गए। बिमला देवी के जैठ धारासिंह यादव का आरोप है कि रकम लेने के बावजूद बेटे की नियुक्ति नहीं करवाई गई। जब उन्होंने पैसे वापस मांगे तो पहले आश्वासन दिए गए और बाद में उनका फोन ब्लॉक कर दिया गया। महिला ने लेन-देन का रिकॉर्ड और बातचीत की रिकॉर्डिंग भी होने की बात कही है। दुर्गा सिंह बोली- उधार लिए थे रुपए इस मामले में दुर्गा सिंह का कहना है कि उन्होंने बिमला देवी से कई साल पहले 65 हजार रुपए उधार लिए थे, जिसे अब वह वापस करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा- एक फाइल से जुड़ा मामला भी था, लेकिन वर्तमान में उन्हें उस फाइल के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर रकम लेने के आरोप से अलग अपना पक्ष रखा है। महिला ने इस मामले में पहले पुलिस को शिकायत दी थी। अब अरावली विहार थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस जांच में ही आरोपों और लेन-देन से जुड़े तथ्यों की स्थिति स्पष्ट होगी।

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