नेस्ले के बेबी फूड में बायोटिन की मात्रा कम:लैब टेस्ट में फॉर्मूला फेल होने और भ्रामक विज्ञापन के लिए FSSAI ने नोटिस दिया

नेस्ले के बेबी फूड में बायोटिन की मात्रा कम:लैब टेस्ट में फॉर्मूला फेल होने और भ्रामक विज्ञापन के लिए FSSAI ने नोटिस दिया

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने नेस्ले इंडिया के खिलाफ बच्चों के खाने-पीने के प्रोडक्ट्स और उनके विज्ञापनों में गड़बड़ी पाए जाने पर कार्रवाई की है। FSSAI ने इंस्टाग्राम पर नोटिस जारी कर बताया कि कंपनी के बेबी फूड्स में पोषक तत्वों (न्यूट्रिएंट्स) की कमी और भ्रामक दावों को लेकर 3 अलग-अलग केस दर्ज किए गए हैं। इस पूरे मामले को सवाल-जवाब समझें … सवाल 1: FSSAI ने नेस्ले इंडिया पर क्या कार्रवाई की है? जवाब: FSSAI ने ई-कॉमर्स साइट्स पर बिकने वाले नेस्ले के बच्चों के प्रोडक्ट्स और उनके प्रचार-प्रसार के विज्ञापनों की जांच की थी। जांच में पाया गया कि कंपनी नियमों का पालन नहीं कर रही थी और विज्ञापनों में ऐसे दावे कर रही थी जो कानून के खिलाफ हैं। सवाल 2: नेस्ले के किन प्रोडक्ट्स पर सवाल उठे हैं? जवाब: FSSAI की जांच के दायरे में नेस्ले इंडिया के तीन मुख्य प्रोडक्ट्स हैं… सवाल 3: नान एक्सीला प्रो और लैक्टोजेन प्रो 1 पर FSSAI को क्या आपत्ति थी? जवाब: नान एक्सीला प्रो स्टेज 1 के पैक और विज्ञापनों पर 5 HMOs और वे प्रोटीन जैसे दावे लिखे गए थे। वहीं, लेक्टोजन प्रो लैक्टोजेन प्रो 1 पर लिखा गया था कि इसमें मौजूद वे प्रोटीन ‘आसानी से पचने योग्य’ है। FSSAI के मुताबिक, इस तरह के दावे उत्पाद की बिक्री बढ़ाने के मकसद से प्रचार के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे थे। सवाल 4: इन दावों से सुरक्षा मानकों या कानून का उल्लंघन कैसे हुआ? जवाब: FSSAI ने नेस्ले से स्पष्टीकरण मांगा था। जवाब से असंतुष्ट होकर रेगुलेटर ने पाया कि यह ‘खाद्य सुरक्षा और मानक (शिशु पोषण के लिए भोजन) विनियम, 2020’ के नियम 4(2) का सीधा उल्लंघन है। यह नियम शिशु आहार की बिक्री बढ़ाने के लिए किसी भी तरह के प्रमोशनल क्लेम पर रोक लगाता है। इसके अलावा, ‘इन्फेंट मिल्क सब्स्टीट्यूट्स (IMS) एक्ट, 1992’ की धारा 3 भी ऐसे प्रोडक्ट्स के किसी भी प्रकार के विज्ञापन या प्रचार को पूरी तरह से प्रतिबंधित करती है। सवाल 5: लैब टेस्ट में नेस्ले के किस प्रोडक्ट में क्या कमी पाई गई? जवाब: FSSAI की प्राइमरी लैब जांच में नेस्ले के ‘फॉलो-अप फॉर्मूला’ के सैंपल में ‘बायोटिन’ (विटामिन B7) की मात्रा तय मानकों से कम मिली। इसके बाद सैंपल को दोबारा पुष्टि के लिए ‘रेफरल लैबोरेटरी’ भेजा गया। दूसरी स्वतंत्र लैब जांच में भी यह प्रोडक्ट बायोटिन की निर्धारित मात्रा के मानकों पर खरा नहीं उतरा और सब-स्टैंडर्ड पाया गया। सवाल 6: क्या नेस्ले इंडिया पर कोई जुर्माना या पेनल्टी लगाई जा चुकी है? जवाब: नहीं, FSSAI के नोटिस के अनुसार अभी कंपनी पर कोई अंतिम जुर्माना या पेनल्टी नहीं लगाई गई है। मामला फिलहाल दर्ज किए गए तीन अलग-अलग न्यायनिर्णयन केसों के तहत कानूनी प्रक्रिया में है। सवाल 7: इस कार्रवाई पर नेस्ले इंडिया का क्या पक्ष या बयान आया है? जवाब: खबर लिखे जाने तक नेस्ले इंडिया ने इस नोटिस या दर्ज मामलों को लेकर शेयर बाजारों या सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया था। सवाल 8: आम उपभोक्ताओं और अभिभावकों पर इस खबर का क्या असर पड़ेगा? जवाब: शिशु आहार का मामला होने के कारण यह सीधे तौर पर छोटे बच्चों की सेहत से जुड़ा है। FSSAI का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कंपनियां माता-पिता को विज्ञापनों के जरिए गुमराह न करें और शिशु आहार में सभी जरूरी पोषक तत्व तय मात्रा के अनुसार ही उपलब्ध हों।

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