जबलपुर में माता का विसर्जन रोकने पर विवाद:दो समाज आमने-सामने, 5 घंटे सड़क पर खड़ी रही झांकी; SDOP बोले- संकरी गली से रुका जुलूस

जबलपुर में माता का विसर्जन रोकने पर विवाद:दो समाज आमने-सामने, 5 घंटे सड़क पर खड़ी रही झांकी; SDOP बोले- संकरी गली से रुका जुलूस

जबलपुर मुख्यालय से करीब 65 किलोमीटर दूर ग्राम कुंडा कला में बुधवार देर रात दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन को लेकर विवाद की स्थिति बन गई। आरोप है कि पहली बार माता की स्थापना करने वाले सिलावट समाज के लोगों को विसर्जन के लिए जाते समय राजपूत समाज के लोगों ने रोक दिया। हालांकि, एसडीओपी आशुतोष द्विवेदी ने कहा कि किसी को नहीं रोका गया था। गली सकरी होने के कारण एक साथ दो प्रतिमाओं के जुलूस नहीं निकल सकते थे। पुलिस की मौजूदगी में शांतिपूर्वक विसर्जन कराया गया। रात 3 बजे विसर्जन के लिए निकले थे लोग ग्राम कुंडा कला में सिलावट समाज के लोगों ने इस साल पहली बार दुर्गा माता की स्थापना की थी। बुधवार रात करीब 3 बजे समाज के लोग झांकी के साथ प्रतिमा को विसर्जन के लिए नदी की ओर ले जा रहे थे। आरोप है कि इस दौरान राजपूत समाज के लोगों ने यह कहते हुए उन्हें रोक लिया कि गांव में अब तक एक ही स्थान पर माता की स्थापना होती आई है। विवाद बढ़ने पर बेलखेड़ा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बावजूद विसर्जन को लेकर सहमति नहीं बनी। नाराज लोग थाने पहुंचे, शिकायत दर्ज कराई और बाहर धरने पर बैठ गए। जानकारी मिलने पर समाजसेवी अभय प्रताप सिंह भी थाने पहुंचे और घटना का विरोध करते हुए कार्रवाई की मांग की। 5 घंटे सड़क पर खड़ी रही झांकी गांव के निवासी रमेश चौधरी ने बताया कि कुंडा कला की आबादी करीब 2500 से 3000 है। यहां हर साल राजपूत समाज के लोग दुर्गा माता की प्रतिमा स्थापित करते आ रहे हैं। इस साल सिलावट समाज के बच्चों ने भी माता की स्थापना करने का विचार किया। रमेश के मुताबिक, गांव के टीटू ठाकुर, रोहित ठाकुर और अन्य लोगों ने इसका विरोध किया। इसके बाद किसी तरह माता की स्थापना की गई। रमेश ने बताया कि बुधवार को सिलावट समाज के लोग जुलूस के साथ माता की प्रतिमा को गांव में घुमा रहे थे, तभी राजपूत समाज के लोगों ने उन्हें रोक लिया। करीब 4 से 5 घंटे तक प्रतिमा सड़क पर खड़ी रही। आगे जाने की अनुमति नहीं मिलने पर रमेश चौधरी और अन्य लोग बेलखेड़ा थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई। गुरुवार को पुलिस की मौजूदगी में दोनों प्रतिमाओं का शांतिपूर्वक विसर्जन हो गया। ‘एक साथ जुलूस निकलने पर विवाद की आशंका थी’ राजकुमार सिंह राजपूत ने कहा कि उन्होंने किसी को माता के विसर्जन से नहीं रोका। उनकी आपत्ति सिर्फ इतनी थी कि अगर दोनों जुलूस एक साथ निकलते हैं, तो विवाद की स्थिति बन सकती है। उन्होंने बताया कि जब वे लोग माता की प्रतिमा को पंडाल से ट्रैक्टर-ट्रॉली में रख रहे थे, उसी दौरान सिलावट समाज के लोग जुलूस लेकर सामने आ गए। इसके बाद उन्होंने अपना जुलूस स्थगित कर दिया। राजकुमार ने कहा कि अगर उन्हें आपत्ति करनी होती, तो वे 10 दिन पहले ही कर देते, जब माता की स्थापना की जा रही थी। समाजसेवी ने की कार्रवाई की मांग समाजसेवी अभय प्रताप सिंह ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि आधुनिक युग में भी किसी समाज को धार्मिक आस्था और परंपराओं के अनुसार देवी विसर्जन जैसे आयोजन करने से रोकना दुखद और चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि धर्म और आस्था के सम्मान में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। प्रशासन की जिम्मेदारी सभी समाजों की धार्मिक भावनाओं, परंपराओं और सम्मान की रक्षा करना है। एसडीओपी बोले- सकरी गली के कारण हुई स्थिति एसडीओपी आशुतोष द्विवेदी ने कहा कि गांव में किसी तरह का विवाद नहीं हुआ और न ही माता के विसर्जन से किसी को रोका गया। उनके मुताबिक, गली सकरी थी और एक साथ दो प्रतिमाओं के जुलूस नहीं निकल सकते थे। पुलिस की मौजूदगी में शांतिपूर्वक विसर्जन करा दिया गया। स्थानीय विधायक नीरज सिंह ने कहा कि उन्हें घटना की जानकारी मिली थी। पुलिस की मौजूदगी में माता की प्रतिमाओं का विसर्जन कराया गया है।

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