हरियाणा के सरकारी कॉलेजों में कार्यरत प्रोफेसरों, एसोसिएट प्रोफेसरों और असिस्टेंट प्रोफेसरों के लिए पासपोर्ट (NOC) बनवाने की प्रक्रिया को लेकर उच्च शिक्षा निदेशालय (DGHE) ने सख्त कदम उठाया है। निदेशालय ने पाया है कि कॉलेजों के प्राचार्य बिना रिकॉर्ड की सही जांच किए और अधूरे दस्तावेजों के साथ पासपोर्ट NOC की फाइलें भेज रहे हैं। इससे मुख्यालय में बेवजह की लिखापढ़ी होती है और मामलों में देरी होती है। इस अव्यवस्था को खत्म करने के लिए उच्च शिक्षा महानिदेशक कार्यालय (पंचकूला) की ओर से प्रदेश के सभी सरकारी कॉलेजों के प्राचार्यों को स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। अब प्राचार्यों को 5 प्रमुख बिंदुओं की चेकलिस्ट के आधार पर फाइल की पूरी जांच करने के बाद ही NOC के केस मुख्यालय भेजने होंगे। विजिलेंस केस पर देनी होगी क्लीयरेंस निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि प्राचार्यों को यह प्रमाणित करना होगा कि आवेदक के खिलाफ नियम-7 के तहत कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई या विजिलेंस केस पेंडिंग नहीं है। साथ ही आवेदक को यह अंडरटेकिंग भी देनी होगी कि वह विदेश में जाकर छुट्टी बढ़ाने की अर्जी नहीं देगा और न ही वहां कोई नौकरी/सेवा करेगा।

