जालंधर में अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी के संविदा कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन धरना आज दूसरे दिन भी जारी रहा। कर्मचारियों के बस स्टैंड और डिपो पर चक्का जाम करने के कारण करीब 200 बसों की आवाजाही पूरी तरह ठप्प हो चुकी है। इस हड़ताल का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है, जिससे बस स्टैंड पर सन्नाटा पसरा हुआ है और दैनिक यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जालंधर के मुख्य बस स्टैंड पर, जहां हर वक्त बसों की लंबी कतारें और यात्रियों की चहल-पहल देखने को मिलती थी, अब यात्रियों की भीड़ देखने को मिल रही है। पनबस मुलाजिम डिपो के अंदर बसें खड़ी कर कर्मचारियों ने धरने का मोर्चा खोल दिया है। हड़ताल के कारण बसों की कमी से यात्री घंटों बस स्टैंड पर इंतजार करने को मजबूर हैं। बस यात्री मनप्रीत कौर ने बताया कि बसों की हड़ताल के कारण गाड़ियां कई-कई घंटे देरी से मिल रही हैं, जिससे कामकाजी लोगों और छात्रों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
पनबस और पीआरटीसी के संविदा कर्मचारियों तीन प्रमुख मांगे कर्मचारियों की पहली मांग है कि संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) पर कार्यरत कर्मचारियों को सर्विस रूल्स के तहत जल्द से जल्द पक्का (रग्युलर) किया जाए। कर्मचारियों की दूसरी मांग कि आउटसोर्सिंग के जरिए भर्ती किए गए कर्मचारियों को कॉन्ट्रैक्ट आधारित व्यवस्था में लाया जाए। कर्मचारियों की तीसरी मांग है कि पिछले आंदोलनों और प्रदर्शनों के दौरान कर्मचारियों पर दर्ज किए गए सभी पुलिस मुकदमों को तुरंत रद्द कर उन्हें बाइज्जत बरी किया जाए।
पनबस के मुलाजिम 2026 में छ बार धरने पर बैठ चुके है
सरकारी आंकड़ों और यूनियन के पिछले रिकॉर्ड के मुताबिक, मुलाजिम नेता अपनी मांगों को लेकर 2026 में छ बार धरने में बैठ चुके है। लेकिन सरकार से हर बार केवल आश्वासन ही हाथ लगता है। कई बार यूनियन बड़े प्रदर्शनों का ऐलान करती है और फिर सरकार के साथ बातचीत के बाद हड़ताल को अगले महीने के लिए टाल देती है। इस खींचतान के बीच मुफ्त यात्रा की सुविधा का लाभ लेने वाली महिलाओं और आम यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है।

