गोरखपुर में नागपंचमी के पर्व पर गोरखनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। दूर-दूर से श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और नाग देवता की पूजा-अर्चना की। भक्तों ने नाग देवता को दूध और लावा चढ़ाया। इस दौरान गोरखपुर समेत आस पास के जिले से हजारों लोग पहुचे। वहीं कुछ लोग बिहार, राजस्थान, मध्यप्रदेश और नेपाल से आए हुए थे। लोगों ने परिवार की खुशहाली, सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। इसके साथ मंदिर परिसर में सालों से पहलवानों की कुस्ती का आयोजन किया जाता है। मान्यता है कि नागपंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं। कई श्रद्धालु नाग दोष और कालसर्प दोष से मुक्ति की कामना को लेकर भी पूजा-अर्चना करते हैं। देखिए 3 तस्वीरें गुरु गोरखनाथ और नागपंचमी का खास संबंध गोरखनाथ मंदिर में नागपंचमी का पर्व धार्मिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है। गुरु गोरखनाथ को भगवान शिव का अंशावतार माना जाता है। भगवान शिव के आभूषणों में नाग का विशेष स्थान है। इसी वजह से नाथ परंपरा में नागपंचमी को प्रकृति, जीव-जंतुओं और भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और समर्पण के पर्व के रूप में देखा जाता है। गोरखनाथ मंदिर में इस पर्व की धार्मिक परंपरा के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व भी जुड़ा हुआ है। सदियों पुरानी है कुश्ती दंगल की परंपरा नागपंचमी के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में केवल पूजा-अर्चना ही नहीं होती, बल्कि सदियों पुरानी कुश्ती दंगल की परंपरा भी निभाई जाती है। मंदिर परिसर में भव्य कुश्ती महादंगल का आयोजन किया जाता है। इस दंगल में हिस्सा लेने और इसे देखने के लिए दूर-दूर से पहलवान और खेल प्रेमी पहुंचते हैं। अखाड़े में पहलवान अपनी ताकत, तकनीक और कौशल का प्रदर्शन करते हैं। दंगल के दौरान मंदिर परिसर का माहौल उत्साह और जोश से भर जाता है। प्रदेशभर से पहुंचते हैं पहलवान गोरखनाथ मंदिर की इस परंपरा को लंबे समय से आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में यहां प्रदेश स्तर की कुश्ती प्रतियोगिता को और भव्य रूप दिया गया है। इसमें उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहलवान पहुंचते हैं और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। प्रतियोगिता के दौरान पहलवानों के बीच जोरदार मुकाबले देखने को मिलते हैं। इन मुकाबलों के जरिए प्रदेश के बेहतरीन पहलवान का चयन किया जाता है। विजेता पहलवान को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सम्मानित और पुरस्कृत किया जाता है। युवाओं को बल और अनुशासन का संदेश नाथ पंथ की परंपरा में शारीरिक मजबूती और साधना का विशेष महत्व माना जाता है। योग और हठयोग के साथ शरीर को स्वस्थ और मजबूत रखने पर भी जोर दिया जाता है। इसी परंपरा का हिस्सा अखाड़ा और कुश्ती भी है। गोरखनाथ मंदिर का दंगल युवाओं को शारीरिक मजबूती के साथ-साथ साहस, अनुशासन, मेहनत और आत्मविश्वास का संदेश देता है। कुश्ती के जरिए युवा अपनी प्रतिभा को आगे बढ़ाने का अवसर भी हासिल करते हैं। धार्मिक आस्था के साथ संस्कृति और परंपरा का संगम गोरखनाथ मंदिर में नागपंचमी का पर्व धार्मिक आस्था, नाथ परंपरा और भारतीय खेल संस्कृति का अनूठा संगम दिखाई देता है। एक ओर जहां श्रद्धालु नाग देवता की पूजा कर दूध और लावा चढ़ाते हैं, वहीं दूसरी ओर अखाड़े में पहलवान अपनी ताकत और हुनर का प्रदर्शन करते हैं। यही वजह है कि नागपंचमी के दिन गोरखनाथ मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के साथ खेल प्रेमियों और स्थानीय लोगों की भी भीड़ जुटती है। सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उसी उत्साह और श्रद्धा के साथ आगे बढ़ रही है।

