Ahmedabad. गुजरात में बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और यौन अपराधों के विरुद्ध कड़ी एवं त्वरित न्यायिक कार्रवाई के लिए राज्य सरकार ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति लागू है। इसके चलते राज्य में पॉक्सो के तहत दर्ज मामलों में तेजी से न्याय प्रक्रिया बढ़ रही है।
इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अगस्त 2026 महीने में ही 48 पॉक्सो मामलों में सजा के फैसले आए हैं। इनमें 35 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।हाल ही में गांधीनगर के कलोल में पॉक्सो कोर्ट ने 15 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी को चार्जशीट प्रस्तुत किए जाने के मात्र 72 घंटे में अंतिम सास तक के आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
पांच साल में 1785 फैसले
राज्य में वर्ष 2022 से अगस्त 2026 के दौरान पॉक्सो अदालतों की ओर से 1,785 फैसले सुनाए गए हैं। इनमें 908 अपराधियों को आजीवन कारावास, 16 को फांसी की सजा सुनाई गई है। फैसलों की संख्या में वर्ष-प्रतिवर्ष वृद्धि हुई है। 2022 में 194 फैसलों में 107 आरोपियों को आजीवन कारावास, वर्ष 2025 में 499 फैसलों में 340 आरोपियों को आजीवन कारावास, वर्ष 2026 में अगस्त तक यानी आठ माह में 346 फैसलों में 241 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
सालों, महीनों में नहीं गिने,चुने दिनों में न्याय: संघवी
उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि गुजरात में बेटियों पर बुरी नजर रखने वाले किसी भी आरोपी के लिए कोई दया या रियायत हो ही नहीं सकती। राज्य सरकार ने पॉक्सो मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट और सुदृढ़ कानूनी ढांचा तैयार किया है, जिससे आज पीड़िता और उसके परिवार को महीनों या वर्षों में नहीं, बल्कि गिने-चुने दिनों में त्वरित न्याय मिल रहा है। मात्र 72 घंटे में चार्जशीट से फैसले तक पहुंचना गुजरात पुलिस की उत्कृष्ट एवं वैज्ञानिक जांच, न्यायपालिका के कड़े और प्रशंसनीय दृष्टिकोण का परिणाम है।
40 मामलों में एक दिन से लेकर 15 दिन में चार्जशीट
पुलिस महानिदेशक ज्ञानेन्द्र सिंह मलिक ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में 140 पॉक्सो अपराधों में पुलिस ने एक दिन से लेकर 15 दिनों में चार्जशीट की है। 16 से 30 दिनों में जांच पूरी करके 1,339 अपराधों में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। इसी तरह 31 से 45 दिनों में चार्जशीट दाखिल किए गए 5,463 अपराध हैं। यह पुलिस की गंभीरता, जांच की गति को दर्शाता है।

