साहिबगंज जिले में गंगा नदी का जलस्तर इस साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। बुधवार शाम 5 बजे केंद्रीय जल आयोग ने गंगा का जलस्तर 28.65 मीटर दर्ज किया।आयोग ने गुरुवार से जलस्तर के और बढ़ने की संभावना जताई है। साहिबगंज में गंगा की चेतावनी रेखा 26.25 मीटर है, जबकि खतरे का निशान 27.25 मीटर पर है। पिछले चार सालों में 2022 में अधिकतम जलस्तर 28.60 मीटर, 2023 में 27.38 मीटर, 2024 में 28.06 मीटर और 2025 में 28.70 मीटर तक रहा था। बाढ़ और कटाव के कारण दियारा और तराई इलाकों में रहने वाले लोगों को काफी परेशानी हो रही है। पानी से घिरे दियारा इलाके के लोगों को अभी तक राहत नहीं मिल पाई है। शहर के निचले इलाकों में भी घरों में पानी घुस गया है,जिससे लोग अपना सामान बचाने में जुटे हैं। एनडीआरएफ की टीम लोगों को राहत पहुंचा रही बाढ़ की स्थिति को देखते हुए पटना से एनडीआरएफ की 9वीं बटालियन और रांची के रीजनल रिस्पांस केंद्र से 30 सदस्यों की टीम साहिबगंज पहुंच गई है। एनडीआरएफ की टीम बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों को राहत पहुंचा रही है। बीते दिनों गंगा में डूबी 6 साल की बच्ची कंचन कुमारी का अब तक कोई पता नहीं चला है, टीम उसकी तलाश में जुटी है। साहिबगंज जिले के उधवा प्रखंड में एक दर्जन से ज्यादा सरकारी स्कूलों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ा है। सदर एसडीओ अमर जॉन आईद और अंचल अधिकारी बासुकीनाथ टुडू ने बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच राहत सामग्री बांटी है। राजमहल और मडरो प्रखंड के कुछ टोले भी बाढ़ से प्रभावित हैं। मडरो प्रखंड के नया टोला गांव के दर्जनों घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे यह गांव पूरी तरह जलमग्न हो गया है। बाढ़ के कारण इलाके में कई और समस्याएं भी पैदा हुई हैं। पशुओं को चारा नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी परेशानी बढ़ गई है। राजनीतिक दल और सामाजिक कार्यकर्ता भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों के बीच राहत सामग्री बांट रहे हैं। वही, बाढ़ से बचने के लिए लोग घर के छत और मचान का सहारा भी लेते देखे जा रहे हैं। साहिबगंज जिले में गंगा नदी का जलस्तर इस साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। बुधवार शाम 5 बजे केंद्रीय जल आयोग ने गंगा का जलस्तर 28.65 मीटर दर्ज किया।आयोग ने गुरुवार से जलस्तर के और बढ़ने की संभावना जताई है। साहिबगंज में गंगा की चेतावनी रेखा 26.25 मीटर है, जबकि खतरे का निशान 27.25 मीटर पर है। पिछले चार सालों में 2022 में अधिकतम जलस्तर 28.60 मीटर, 2023 में 27.38 मीटर, 2024 में 28.06 मीटर और 2025 में 28.70 मीटर तक रहा था। बाढ़ और कटाव के कारण दियारा और तराई इलाकों में रहने वाले लोगों को काफी परेशानी हो रही है। पानी से घिरे दियारा इलाके के लोगों को अभी तक राहत नहीं मिल पाई है। शहर के निचले इलाकों में भी घरों में पानी घुस गया है,जिससे लोग अपना सामान बचाने में जुटे हैं। एनडीआरएफ की टीम लोगों को राहत पहुंचा रही बाढ़ की स्थिति को देखते हुए पटना से एनडीआरएफ की 9वीं बटालियन और रांची के रीजनल रिस्पांस केंद्र से 30 सदस्यों की टीम साहिबगंज पहुंच गई है। एनडीआरएफ की टीम बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों को राहत पहुंचा रही है। बीते दिनों गंगा में डूबी 6 साल की बच्ची कंचन कुमारी का अब तक कोई पता नहीं चला है, टीम उसकी तलाश में जुटी है। साहिबगंज जिले के उधवा प्रखंड में एक दर्जन से ज्यादा सरकारी स्कूलों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ा है। सदर एसडीओ अमर जॉन आईद और अंचल अधिकारी बासुकीनाथ टुडू ने बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच राहत सामग्री बांटी है। राजमहल और मडरो प्रखंड के कुछ टोले भी बाढ़ से प्रभावित हैं। मडरो प्रखंड के नया टोला गांव के दर्जनों घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे यह गांव पूरी तरह जलमग्न हो गया है। बाढ़ के कारण इलाके में कई और समस्याएं भी पैदा हुई हैं। पशुओं को चारा नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी परेशानी बढ़ गई है। राजनीतिक दल और सामाजिक कार्यकर्ता भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों के बीच राहत सामग्री बांट रहे हैं। वही, बाढ़ से बचने के लिए लोग घर के छत और मचान का सहारा भी लेते देखे जा रहे हैं।

