कैमूर के दुर्गावती नदी पर पुल नहीं:स्कूली बच्चे और मरीज नदी पार करने को मजबूर, DM ने लिया संज्ञान

कैमूर के दुर्गावती नदी पर पुल नहीं:स्कूली बच्चे और मरीज नदी पार करने को मजबूर, DM ने लिया संज्ञान

कैमूर जिले के मोहनिया के पास दुर्गावती नदी पर पुल नहीं होने से दर्जनों गांवों के लोग परेशानी झेल रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-19) से सिर्फ आधा किलोमीटर दूर होने के बावजूद, इन गांवों के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। स्थानीय निवासी हरिओम सिंह ने बताया कि बच्चों और महिलाओं को हर दिन जान जोखिम में डालकर नदी और कीचड़ पार करना पड़ता है। होरलापुर, बिशनपुरा, हथियाबान और बहेरा सहित 10 से ज्यादा गांवों के लोगों की यही स्थिति है। नेताओं के अनुसार, पुल की फाइल कई सालों से नाबार्ड में अटकी हुई है। सांसद मनोज तिवारी ने की थी यहीं से पढ़ाई बुजुर्ग ग्रामीण संकठा तिवारी ने बताया कि पुल नहीं होने से मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। यातायात के साधन न होने के कारण किसान अपनी फसल स्थानीय बाजार में ही सस्ते दाम पर बेचने को मजबूर हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सांसद मनोज तिवारी ने यहीं से पढ़ाई की थी, और अगर वे पुल बनवा देते तो यह उनकी ‘गुरु दक्षिणा’ होती। DM के संज्ञान में आया मामला दुघरा गांव के छात्र आदर्श ने बताया कि खराब नावों और कीचड़ भरे रास्तों के कारण उसकी स्कूल बस अक्सर छूट जाती है। लगातार उठ रही इस मांग पर अब कैमूर के जिलाधिकारी ने ध्यान दिया है। उन्होंने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में आ चुका है। वे जल्द ही ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) के इंजीनियरों के साथ बैठक करेंगे और पुल की लागत और फाइल के लंबित होने के कारणों की गहराई से जांच करेंगे, ताकि जल्द समाधान निकाला जा सके। कैमूर जिले के मोहनिया के पास दुर्गावती नदी पर पुल नहीं होने से दर्जनों गांवों के लोग परेशानी झेल रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-19) से सिर्फ आधा किलोमीटर दूर होने के बावजूद, इन गांवों के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। स्थानीय निवासी हरिओम सिंह ने बताया कि बच्चों और महिलाओं को हर दिन जान जोखिम में डालकर नदी और कीचड़ पार करना पड़ता है। होरलापुर, बिशनपुरा, हथियाबान और बहेरा सहित 10 से ज्यादा गांवों के लोगों की यही स्थिति है। नेताओं के अनुसार, पुल की फाइल कई सालों से नाबार्ड में अटकी हुई है। सांसद मनोज तिवारी ने की थी यहीं से पढ़ाई बुजुर्ग ग्रामीण संकठा तिवारी ने बताया कि पुल नहीं होने से मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। यातायात के साधन न होने के कारण किसान अपनी फसल स्थानीय बाजार में ही सस्ते दाम पर बेचने को मजबूर हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सांसद मनोज तिवारी ने यहीं से पढ़ाई की थी, और अगर वे पुल बनवा देते तो यह उनकी ‘गुरु दक्षिणा’ होती। DM के संज्ञान में आया मामला दुघरा गांव के छात्र आदर्श ने बताया कि खराब नावों और कीचड़ भरे रास्तों के कारण उसकी स्कूल बस अक्सर छूट जाती है। लगातार उठ रही इस मांग पर अब कैमूर के जिलाधिकारी ने ध्यान दिया है। उन्होंने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में आ चुका है। वे जल्द ही ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) के इंजीनियरों के साथ बैठक करेंगे और पुल की लागत और फाइल के लंबित होने के कारणों की गहराई से जांच करेंगे, ताकि जल्द समाधान निकाला जा सके।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *