उत्तर प्रदेश में कृषि योजनाओं की धीमी रफ्तार और लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्रों को लेकर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने नाराजगी जाहिर की है। विभागीय अधिकारियों से उन्होंने कहा है कि योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिए अधिकारी केवल कार्यालयों में बैठकर समीक्षा न करें, बल्कि खुद मौके पर जाकर काम की हकीकत देखें। कृषि मंत्री ने मौसम सूचना नेटवर्क डाटा प्रणाली (विण्ड्स) के क्रियान्वयन में लापरवाही पर कार्यदायी संस्था के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करें। कृषि मंत्री सोमवार को कृषि भवन, लखनऊ में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (पीएम-आरकेवीवाई), राज्य कृषि विकास योजना (एसएडीपी) और विकसित उत्तर प्रदेश-2047 के कृषि रोडमैप की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में योजनाओं के बजट खर्च, लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्रों और कृषि विकास की दीर्घकालिक रणनीति पर चर्चा हुई। पीएम-आरकेवीवाई में 66 फीसदी बजट खर्च वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत विभिन्न घटकों के लिए 1,364.01 करोड़ रुपये के केंद्रीय आवंटन के सापेक्ष राज्य सरकार ने 680.32 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसमें से अब तक 447.65 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। यह जारी धनराशि का करीब 66 प्रतिशत है। योजना के प्रमुख घटक आरकेवीवाई-डीपीआर के तहत कृषि विभाग ने 140.19 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति के मुकाबले 122.47 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस मद में 87 प्रतिशत बजट का उपयोग हो चुका है। हालांकि, गन्ना विभाग, बीज विकास निगम और शोध संस्थानों में खर्च की रफ्तार धीमी मिलने पर मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को प्रगति तेज करने के निर्देश दिए। वहीं, वर्ष 2025-26 तक के 117.97 करोड़ रुपये के उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित हैं। कृषि मंत्री ने इनका जल्द निस्तारण करने को कहा, ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में वित्तीय और प्रशासनिक बाधाएं दूर हो सकें। राज्य कृषि विकास योजना में भी खर्च बढ़ाने के निर्देश राज्य सरकार की शत-प्रतिशत वित्तपोषित राज्य कृषि विकास योजना के तहत 62.95 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि के सापेक्ष अब तक 30.61 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसमें कृषि विभाग ने 21.49 करोड़ रुपये और उद्यान विभाग ने 8.55 करोड़ रुपये व्यय किए हैं। इस योजना में भी स्वीकृत परियोजनाओं पर काम तेज करने की जरूरत बताई गई। कृषि मंत्री ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करें। साथ ही, पिछले वर्षों के 54.51 करोड़ रुपये के लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्रों का निस्तारण भी निर्धारित समयसीमा में किया जाए। विण्ड्स कार्यक्रम में लापरवाही पर कार्रवाई मौसम की सटीक जानकारी किसानों तक पहुंचाने और फसल क्षति का आकलन करने के लिए संचालित विण्ड्स कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान कार्यदायी संस्था स्काईमेट वेदर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की कार्यप्रणाली पर मंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने संस्था के काम में अत्यधिक सुस्ती पर असंतोष व्यक्त करते हुए लापरवाही के लिए दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए। इस कार्यक्रम का उद्देश्य मौसम संबंधी आंकड़ों और सूचनाओं को मजबूत करना है, ताकि किसानों को समय पर जानकारी मिल सके और फसल क्षति का आकलन करने में मदद मिले। मंत्री ने व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर दिया। 2047 तक कृषि में अग्रणी राज्य बनाने का लक्ष्य बैठक में विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के अनुरूप विकसित उत्तर प्रदेश-2047 के कृषि रोडमैप पर भी विस्तार से चर्चा हुई। प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में कृषि क्षेत्र की भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया। कृषि मंत्री ने किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने, उन्नत बीजों की उपलब्धता, मृदा स्वास्थ्य सुधारने और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने पर जोर दिया। इसके साथ ही कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण, भंडारण और विपणन व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई गई। रोडमैप में प्राकृतिक खेती, जलवायु-अनुकूल कृषि और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। उद्देश्य वर्ष 2047 तक उत्तर प्रदेश को कृषि क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाना है। बैठक में कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, प्रमुख सचिव कृषि एमके शनमुगा सुंदरम, विशेष सचिव संजीव रंजन, ओपी वर्मा और टीके शिबू, कृषि निदेशक त्रियंबक मणि त्रिपाठी, उत्तर प्रदेश बीज प्रमाणीकरण की निदेशक कनीज फातिमा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी और डिलाइट टीम के सदस्य मौजूद रहे।

