61 साल के IIT कानपुर के एक्स स्टूडेंट गौतम देव अमेरिका के डलास शहर में रहते हैं और एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। उन्होंने 2 साल पहले नौकरी छोड़ी थी लेकिन 20 साल के अनुभव के बाद भी अब तक उन्हें कोई भी नौकरी नहीं मिल पाई है। IIT से पढ़ने के बाद भी वे एक गिग वर्कर के तौर पर काम करने को मजबूर हैं। नौकरी नहीं मिली, टैक्सी चलाई, डिलीवरी बॉय का काम किया देव को जब लंबे समय तक नौकरी नहीं मिली तो उन्होंने ऊबर (Uber) चलाई, डोरवाश (DoorDash) और वालमार्ट स्पार्क जैसे डिलीवरी प्लेटफॉर्म के लिए भी काम किया। हालांकि कमाई उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। साथ ही, भारी सामान न उठा पाने की वजह से वे हर तरह की डिलीवरी का काम नहीं कर सकते थे। इसके साथ ही उन्होंने पैसे कमाने के दूसरे तरीके भी आजमाए। उन्होंने ‘डे ट्रेडिंग’ की कोशिश की, शुरुआत में तो फायदा हुआ, लेकिन बाद में उन्हें नुकसान होने लगा। देव की अब सभी सेविंग्स खत्म होने हो गई हैं। उनका कहना है कि सोशल सिक्योरिटी का समय भी अब करीब आ रहा है तो अब वे अमेरिका में रहने और भारत वापस लौटने के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। IT सेक्टर में दो दशक का अनुभव IT सेक्टर में दो दशक से ज्यादा का अनुभव होने के बावजूद, देव को उम्मीद थी कि उन्हें कुछ ही महीनों में कोई दूसरी नौकरी मिल जाएगी। उन्होंने लिंकडिन पर भी नौकरी की तलाश की और अपने परिचितों को भी कॉन्टेक्ट किया कि किसी तरह नौकरी मिल सके। लेकिन कई लोगों ने कहा कि उनकी कंपनियां अभी हायरिंग नहीं कर रही हैं। कई सारे इंटरव्यू देने के बाद भी किसी ने भी उन्हें फुल-टाइम नौकरी ऑफर नहीं की। हालांकि गौतम मानते हैं कि उनकी उम्र और वजह से शायद उनके नौकरी पाने के मौका नहीं मिल रहा है। IIT टॉपर रहे, TCS में काम किया देव ने IIT कानपुर से MSC फिजिक्स में टॉपर रहे। इसके बाद न्यूयॉर्क की स्टोनी ब्रुक यूनिवर्सिटी से थ्योरेटिकल कंडेंस्ड मैटर फिजिक्स में PhD की। इसके बाद उन्होंने सॉफ्टवेर इंजीनियरिंग में अपना करियर बनाया। लंबे समय तक बेरोजगार रहने से उनकी आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ा है। उन्हें किराया और रोजमर्रा के दूसरे खर्चों को पूरा करने के लिए अपनी बचत खत्म करनी पड़ी और क्रेडिट कार्ड का कर्ज भी लेना पड़ा। खर्च के लिए फंड रेज भी किया वे डलास में किसी सस्ती जगह पर रहना चाहते हैं, लेकिन उन्हें चिंता है कि पक्की आमदनी न होने की वजह से उन्हें किराए पर दूसरा घर मिलना मुश्किल हो सकता है। घर बदलने के लिए उन्हें डिलीवरी के काम से समय निकालना होगा, जिससे उनकी कमाई पर असर पड़ेगा। जनवरी में, देव को अपने बिल चुकाने में मदद के लिए ‘गोफंडमी’ (GoFundMe) पर एक फंडडरेजर शुरू किया और 9,000 डॉलर से ज्यादा रकम जुटाई। उन्होंने माना कि आर्थिक मदद मांगना मुश्किल काम था, लेकिन कहा कि कुछ लोग उनकी मदद के लिए आगे आए। गिग वर्क ही आखिरी रास्ता देव जनवरी में 62 साल के हो जाएंगे। उन्हें उम्मीद है कि इन भुगतानों और अपने ‘गिग वर्क’ से होने वाली कमाई को मिलाकर वे अपने रहने-सहने का खर्च उठा पाएंगे। वे दो दशक से भी ज्यादा समय से अमेरिका में रह रहे हैं और अगर उन्हें कोई रास्ता नहीं मिलता है तो वे दोबारा भारत लौटने का ऑप्शन तलाशेंगे। —————— ये खबर भी पढ़ें.. जंतर-मंतर पर डिटेन हुए अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज कौन हैं:भारत में MGNREGA, RTI लाए; 1979 से भारत में रह रहे दिल्ली में इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर हे विरोध प्रदर्शन चल रहा है। हाल ही में इस विरोध प्रदर्शन में एक व्यक्ति को डिटेन करने का वीडियो सामने आया। पूरी खबर पढ़ें
IIT कानपुर से पढ़े, अमेरिका में टैक्सी चलाने को मजबूर:20 सालों का अनुभव, अब बेरोजगार गौतम तलाश रहे भारत लौटने का ऑप्शन

