14 अगस्त को प्रदेश में खाद की बिक्री रोकने के फैसले के बाद आज से दोबारा बिक्री शुरू कर दी गई है। किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग ने इसके आदेश जारी कर सभी संबंधित खाद विक्रय एजेंसियों को खा की बिक्री करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि सरकार ने अभी इस मामले में यह खुलासा नहीं किया है कि खाद वितरण व्यवस्था में खाद के मिलान को लेकर जो रोक लगाई गई थी, उसमें किसी तरह की गड़बड़ी मिली है या नहीं मिली है। किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग ने 14 अगस्त को जारी आदेश में खाद वितरण का काम पहले आगामी आदेश तक के लिए बंद करने की बात कही थी लेकिन इस मामले में किसान संगठनों के विरोध की जानकारी सामने आने के बाद सरकार ने 15 अगस्त को सफाई देते हुए कहा था कि 17 अगस्त से खाद की बिक्री शुरू करा दी जाएगी। इसी तारतम्य में आज फिर किसान कल्याण विभाग के सचिव निशांत वरवड़े ने खाद बिक्री शुरू करने के आदेश जारी कर दिए हैं। 15 अगस्त को सरकार की ओर से दी गई सफाई में कहा गया था कि भारत सरकार के iFMS पोर्टल और प्रदेश के खाद विक्रेताओं के स्टॉक का Reconciliation (मिलान) 16 अगस्त की शाम तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद 17 अगस्त से खाद का वितरण शुरू होगा। खाद बिक्री रोकने के फैसले का सीधा असर प्रदेश के 82 लाख किसानों पर पड़ रहा था। यह रोक विपणन संघ, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों, एमपी एग्रो और निजी उर्वरक विक्रेताओं के बिक्री केंद्रों पर लागू की गई थी। आदेश का पालन कराने की जिम्मेदारी कलेक्टरों और संबंधित विभागीय अधिकारियों को दी गई थी। खरीफ सीजन में 82 लाख किसानों पर असर प्रदेश में करीब 82 लाख पंजीकृत किसान हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत पात्र और सक्रिय किसानों की संख्या 82 से 83 लाख के बीच दर्ज की गई है। राज्य में करीब 152 लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है। खरीफ फसलों की बोनी हो चुकी है। फसल बढ़ने के साथ किसानों को यूरिया समेत अन्य खाद की जरूरत होगी। खासकर धान उगाने वाले किसानों के लिए खाद की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। सरकार ने अब 17 अगस्त से वितरण शुरू करने की बात कही है। किसान संगठन ने बिक्री रोकने को गलत बताया था राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा कक्काजी ने खाद बिक्री रोकने के फैसले को गलत बताया था। उन्होंने कहा कि इस समय किसानों को यूरिया और अमोनियम सल्फेट की जरूरत है। फसल खाद की जरूरत के हिसाब से चलती है, वह सरकार के आगामी आदेश का इंतजार नहीं करती। कक्काजी ने कहा था कि समय पर खाद नहीं मिलने से फसल की पैदावार प्रभावित हो सकती है। उनका कहना था कि स्टॉक मिलान को बिक्री रोकने का आधार बनाना उचित नहीं है और इसका सीधा असर किसानों पर पड़ेगा। बिक्री बंद रहने के दौरान खाद की उपलब्धता को लेकर किसानों की परेशानी बढ़ने पर कालाबाजारी की आशंका भी जताई गई थी।

