एशियन गेम्स 2026 में बिहार के खिलाड़ी को आज दूसरा मेडल मिलेगा। वहीं, आज एशियन गेम्स में मेंस क्रिकेट का फाइनल भारत और पाकिस्तान के बीच खेला जाएगा। यह मुकाबला सुबह 10:30 बजे से शुरू होगा। इसमें बिहार के खिलाड़ी ईशान किशन और वैभव सूर्यवंशी खेलते नजर आयेंगे। गोल्ड के लिए भारत का मुकाबला पाकिस्तान से होगा। हालांकि, खिताबी मुकाबले में पहुंचकर भारत ने अपना रजत पदक पक्का कर लिया है। वैभव सूर्यवंशी ने पिछले मैच में 21 गेंद पर 38 रन बनाए 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने सेमीफाइनल में श्रीलंका के खिलाफ 21 गेंद पर 38 रन की पारी खेली थी। उन्होंने अपनी पारी में 6 चौके और 2 छक्के लगाए। उनके अलावा ईशान किशन ने नाबाद 80 रन बनाए। उन्होंने 173.91 की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की। पिछले मैच में ईशान किशन सबसे हाई स्कोरर थे। वहीं, वैभव सेकंड हाईएस्ट स्कोरर थे। कल बिहार के खिलाड़ी को मिला था ब्रॉन्ज मेडल कल ही भारतीय टीम ने सेपकटकरा में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। इस एशियन गेम्स में बिहार के खिलाड़ी को यह पहला मेडल था। बिहार के बॉबी कुमार सेपकटकरा टीम में खेल रहे थे। भारतीय टीम सेपकटकरा के मेंस क्वाड्रेंट सेमीफाइनल हार गई और उसे ब्रॉन्ज मेडल से ही संतोष करना पड़ा। भारतीय टीम ने इस गेम में दूसरा मेडल जीता है। टीम पहली बार 2018 में चैंपियन बनी थी। वहीं, एशियन गेम्स में अबतक बिहार के खिलाड़ी को मिला यह चौथा मेडल है। एशियन गेम्स में बिहार के 4 खिलाड़ी जीत चुके पदक एशियन गेम्स में अब तक बिहार के 4 खिलाड़ी देश के लिए पदक जीत चुके हैं। 2006 में दोहा एशियन गेम्स में भारतीय कबड्डी टीम ने स्वर्ण पदक जीता था। उस समय प्रदेश के राजीव कुमार टीम के सदस्य थे। 2010 में चीन में हुए एशियन खेल में सोना जीतने वाली टीम में मोकामा की स्मिता कुमारी शामिल थीं। 2014 में साउथ कोरिया में संपन्न प्रतियोगिता की ट्रैप शूटिंग टीम स्पर्धा में भारत को कांस्य पदक मिला था। टीम में वर्तमान में बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह भी शामिल थी। इसके साथ ही कल की सेपकटकरा में ब्रॉन्ज मेडल की जीत से बिहार के खिलाड़ी को चौथा मेडल मिला। भारतीय क्रिकेटर ईशान से टीचर रहते थे परेशान ईशान किशन भारतीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर है। ईशान आक्रामक बल्लेबाजी, तेज रन बनाने की क्षमता और विकेटकीपिंग के लिए पहचाने जाते हैं। ईशान ने बेहद कम उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया। ईशान के बड़े भाई ने उनके लिए क्रिकेट छोड़ दिया। ईशान की क्रिकेट के प्रति दीवानगी से टीचर भी परेशान थे। टीचर ने साफ कह दिया कि पढ़ाई और क्रिकेट एकसाथ नहीं चल सकता है। ईशान ने टीचर से साफ कह दिया कि वह खेल के लिए पढ़ाई भी छोड़ सकते हैं। ईशान क्रिकेट को लेकर दीवाने थे, वह खाना-पीना भी सब भूल जाते थे। बिहार में क्रिकेट की संभावना कम दिखी तो झारखंड गए बिहार में क्रिकेट की संभावना कम दिखी तो ईशान झारखंड की ओर कूच कर गए। 4-5 सालों में किशन ने झारखंड टीम में अहम भूमिका निभाई। 2016-17 में रणजी ट्रॉफी मैच में दिल्ली की अच्छी गेंदबाजी के खिलाफ 273 रन बनाए। ईशान ने 14 सिक्सर जड़े, जो किसी रणजी ट्रॉफी की पारी में किसी बल्लेबाज के सबसे ज्यादा सिक्सर हैं। 2017-18 में किशन 6 मैचों में 484 रन के साथ झारखंड के लिए सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी बने। 2018-19 देवघर ट्रॉफी के लिए इंडिया सी टीम में शामिल किया गया और फाइनल में एक महत्वपूर्ण शतक बनाया, जिसने भारत सी को अपना पहला खिताब जीतने में मदद की। डिफिनिट के नाम से बुलाते हैं दोस्त ईशान के दोस्त उसे डिफिनिट का नाम से बुलाते हैं। यह उपनाम फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर में जिशान कादरी द्वारा निभाए गए डिफिनिट खान के किरदार से आया था। डिफिनिट खान के किरदार से ईशान का चरित्र मिलता है इसलिए लोग उन्हें इसी नाम से पुकारते हैं। ईशान एडम गिलक्रिस्ट, राहुल द्रविड़ और धोनी के बहुत बड़े प्रशंसक हैं। क्रिकेट के अलावा, ईशान को टेबल टेनिस और बिलियर्ड्स खेलना काफी पसंद है। सौराष्ट्र के खिलाफ मैच में मिला टर्निंग पॉइंट ईशान के करियर का टर्निंग पॉइंट सौराष्ट्र के खिलाफ रणजी ट्रॉफी मैच में आया। पिच में पहले ही ओवर से धूल आ रही थी। ईशान ने महज 69 गेंदों में 87 रनों की तूफानी पारी खेली। किशन को आउट करने के बाद, रवींद्र जडेजा ने उनसे अपनी पीठ थपथपाई। 2 साल बाद हुआ था इंडियन टीम में कमबैक ईशान ने 2021 में इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से डेब्यू किया। उन्होंने कई मैच खेलते हुए रिकॉर्ड बनाएं। मगर 2023 से लगता है 2 साल तक ईशान भारतीय क्रिकेट टीम से बाहर चल रहे थे। टी-20 वर्ल्ड कप 2026 से उनका इंडियन टीम में कम बैक हुआ। ईशान ने तनाव से निकलने के लिए भगवद्ग गीता का लिया था सहारा भारतीय क्रिकेट टीम में वापसी के मुश्किल दौर में ईशान किशन ने श्रीमद्भगवद्गीता का सहारा लिया। उनके पिता प्रणव कुमार पांडेय ने बताया कि उन्होंने ईशान को तनाव और परेशानियों के बीच गीता पढ़ने की सलाह दी थी। ईशान अब अपनी किट बैग में पॉकेट गीता रखते हैं। जब भी वे तनाव में होते हैं या किसी सवाल का जवाब नहीं मिलता, तो गीता का कोई पन्ना खोलकर पढ़ते हैं। प्रेक्टिस करने के लिए समस्तीपुर से पटना आते थे वैभव समस्तीपुर के ताजपुर में जन्मे वैभव सूर्यवंशी ने 4 साल की उम्र से ही क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। उनके पिता संजीव सूर्यवंशी ने क्रिकेट करियर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे समस्तीपुर से वैभव को प्रशिक्षण के लिए पटना लेकर आते थे। समस्तीपुर से पटना तक आने-जाने में परिवार को काफी समय और पैसा खर्च करना पड़ता था। कई बार परिवार बस से सफर करता था, तो कभी किराये की गाड़ी लेकर पटना पहुंचता था। मां सुबह 3 बजे उठकर वैभव के लिए खाना तैयार करती थी। लॉकडाउन के दौरान जब अकादमी जाना संभव नहीं था, तब भी उन्होंने घर की छत पर अभ्यास जारी रखा। सचिन से भी कम उम्र में डेब्यू करने वाले खिलाड़ी वैभव वैभव ने जनवरी 2024 में बिहार की ओर से रणजी ट्रॉफी में डेब्यू किया था। वैभव ने पटना के मोइनुल हक स्टेडियम में बिहार और मुंबई के बीच रणजी ट्राफी में जब डेब्यू किया था तब उनकी उम्र सिर्फ 12 साल 9 महीने 14 दिन की थी। वैभव सबसे कम उम्र में रणजी में डेब्यू करने वाले दूसरे खिलाड़ी बन गए हैं। उनसे कम उम्र में अलीमुद्दीन ने (12 साल, 2 महीने 18 दिन) डेब्यू किया था। सचिन तेंदुलकर ने 15 साल और 7 महीने 22 दिन की उम्र में डेब्यू किया था। IPL में शतक लगाकर वैभव ने बनाया था रिकॉर्ड बिहार के वैभव सूर्यवंशी IPL इतिहास के सबसे कम उम्र के खिलाड़ी हैं। राजस्थान रॉयल्स ने वैभव को 1.10 करोड़ रुपए में खरीद था। वे शानदार प्रदर्शन करते हुए IPL में फिफ्टी और सेंचुरी लगाने वाले सबसे युवा प्लेयर बने थे। वैभव ने 35 गेंद पर शतक लगाया था। यह IPL में किसी भारतीय खिलाड़ी का सबसे कम गेंदों पर शतक है। उनके इस प्रदर्शन के कारण RR ने उन्हें इस साल रिटेन किया था। वैभव इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू करने वाले दूसरे सबसे युवा खिलाड़ी 15 साल 99 दिन के वैभव सूर्यवंशी इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू करने वाले दुनिया के दूसरे सबसे युवा खिलाड़ी हैं। उनसे आगे सिर्फ पाकिस्तान के हसन रजा हैं, जिन्होंने 1996 में 14 साल 227 दिन की उम्र में जिम्बाब्वे के खिलाफ डेब्यू किया था। भारत की बात करें तो वैभव ने सचिन तेंदुलकर का 37 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। सचिन ने 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ 16 साल 205 दिन की उम्र में इंटरनेशनल डेब्यू किया था। शेफाली वर्मा ने 15 साल 239 दिन की उम्र में भारत के लिए पहला मैच खेला था। एशियन गेम्स 2026 में बिहार के खिलाड़ी को आज दूसरा मेडल मिलेगा। वहीं, आज एशियन गेम्स में मेंस क्रिकेट का फाइनल भारत और पाकिस्तान के बीच खेला जाएगा। यह मुकाबला सुबह 10:30 बजे से शुरू होगा। इसमें बिहार के खिलाड़ी ईशान किशन और वैभव सूर्यवंशी खेलते नजर आयेंगे। गोल्ड के लिए भारत का मुकाबला पाकिस्तान से होगा। हालांकि, खिताबी मुकाबले में पहुंचकर भारत ने अपना रजत पदक पक्का कर लिया है। वैभव सूर्यवंशी ने पिछले मैच में 21 गेंद पर 38 रन बनाए 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने सेमीफाइनल में श्रीलंका के खिलाफ 21 गेंद पर 38 रन की पारी खेली थी। उन्होंने अपनी पारी में 6 चौके और 2 छक्के लगाए। उनके अलावा ईशान किशन ने नाबाद 80 रन बनाए। उन्होंने 173.91 की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की। पिछले मैच में ईशान किशन सबसे हाई स्कोरर थे। वहीं, वैभव सेकंड हाईएस्ट स्कोरर थे। कल बिहार के खिलाड़ी को मिला था ब्रॉन्ज मेडल कल ही भारतीय टीम ने सेपकटकरा में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। इस एशियन गेम्स में बिहार के खिलाड़ी को यह पहला मेडल था। बिहार के बॉबी कुमार सेपकटकरा टीम में खेल रहे थे। भारतीय टीम सेपकटकरा के मेंस क्वाड्रेंट सेमीफाइनल हार गई और उसे ब्रॉन्ज मेडल से ही संतोष करना पड़ा। भारतीय टीम ने इस गेम में दूसरा मेडल जीता है। टीम पहली बार 2018 में चैंपियन बनी थी। वहीं, एशियन गेम्स में अबतक बिहार के खिलाड़ी को मिला यह चौथा मेडल है। एशियन गेम्स में बिहार के 4 खिलाड़ी जीत चुके पदक एशियन गेम्स में अब तक बिहार के 4 खिलाड़ी देश के लिए पदक जीत चुके हैं। 2006 में दोहा एशियन गेम्स में भारतीय कबड्डी टीम ने स्वर्ण पदक जीता था। उस समय प्रदेश के राजीव कुमार टीम के सदस्य थे। 2010 में चीन में हुए एशियन खेल में सोना जीतने वाली टीम में मोकामा की स्मिता कुमारी शामिल थीं। 2014 में साउथ कोरिया में संपन्न प्रतियोगिता की ट्रैप शूटिंग टीम स्पर्धा में भारत को कांस्य पदक मिला था। टीम में वर्तमान में बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह भी शामिल थी। इसके साथ ही कल की सेपकटकरा में ब्रॉन्ज मेडल की जीत से बिहार के खिलाड़ी को चौथा मेडल मिला। भारतीय क्रिकेटर ईशान से टीचर रहते थे परेशान ईशान किशन भारतीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर है। ईशान आक्रामक बल्लेबाजी, तेज रन बनाने की क्षमता और विकेटकीपिंग के लिए पहचाने जाते हैं। ईशान ने बेहद कम उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया। ईशान के बड़े भाई ने उनके लिए क्रिकेट छोड़ दिया। ईशान की क्रिकेट के प्रति दीवानगी से टीचर भी परेशान थे। टीचर ने साफ कह दिया कि पढ़ाई और क्रिकेट एकसाथ नहीं चल सकता है। ईशान ने टीचर से साफ कह दिया कि वह खेल के लिए पढ़ाई भी छोड़ सकते हैं। ईशान क्रिकेट को लेकर दीवाने थे, वह खाना-पीना भी सब भूल जाते थे। बिहार में क्रिकेट की संभावना कम दिखी तो झारखंड गए बिहार में क्रिकेट की संभावना कम दिखी तो ईशान झारखंड की ओर कूच कर गए। 4-5 सालों में किशन ने झारखंड टीम में अहम भूमिका निभाई। 2016-17 में रणजी ट्रॉफी मैच में दिल्ली की अच्छी गेंदबाजी के खिलाफ 273 रन बनाए। ईशान ने 14 सिक्सर जड़े, जो किसी रणजी ट्रॉफी की पारी में किसी बल्लेबाज के सबसे ज्यादा सिक्सर हैं। 2017-18 में किशन 6 मैचों में 484 रन के साथ झारखंड के लिए सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी बने। 2018-19 देवघर ट्रॉफी के लिए इंडिया सी टीम में शामिल किया गया और फाइनल में एक महत्वपूर्ण शतक बनाया, जिसने भारत सी को अपना पहला खिताब जीतने में मदद की। डिफिनिट के नाम से बुलाते हैं दोस्त ईशान के दोस्त उसे डिफिनिट का नाम से बुलाते हैं। यह उपनाम फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर में जिशान कादरी द्वारा निभाए गए डिफिनिट खान के किरदार से आया था। डिफिनिट खान के किरदार से ईशान का चरित्र मिलता है इसलिए लोग उन्हें इसी नाम से पुकारते हैं। ईशान एडम गिलक्रिस्ट, राहुल द्रविड़ और धोनी के बहुत बड़े प्रशंसक हैं। क्रिकेट के अलावा, ईशान को टेबल टेनिस और बिलियर्ड्स खेलना काफी पसंद है। सौराष्ट्र के खिलाफ मैच में मिला टर्निंग पॉइंट ईशान के करियर का टर्निंग पॉइंट सौराष्ट्र के खिलाफ रणजी ट्रॉफी मैच में आया। पिच में पहले ही ओवर से धूल आ रही थी। ईशान ने महज 69 गेंदों में 87 रनों की तूफानी पारी खेली। किशन को आउट करने के बाद, रवींद्र जडेजा ने उनसे अपनी पीठ थपथपाई। 2 साल बाद हुआ था इंडियन टीम में कमबैक ईशान ने 2021 में इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से डेब्यू किया। उन्होंने कई मैच खेलते हुए रिकॉर्ड बनाएं। मगर 2023 से लगता है 2 साल तक ईशान भारतीय क्रिकेट टीम से बाहर चल रहे थे। टी-20 वर्ल्ड कप 2026 से उनका इंडियन टीम में कम बैक हुआ। ईशान ने तनाव से निकलने के लिए भगवद्ग गीता का लिया था सहारा भारतीय क्रिकेट टीम में वापसी के मुश्किल दौर में ईशान किशन ने श्रीमद्भगवद्गीता का सहारा लिया। उनके पिता प्रणव कुमार पांडेय ने बताया कि उन्होंने ईशान को तनाव और परेशानियों के बीच गीता पढ़ने की सलाह दी थी। ईशान अब अपनी किट बैग में पॉकेट गीता रखते हैं। जब भी वे तनाव में होते हैं या किसी सवाल का जवाब नहीं मिलता, तो गीता का कोई पन्ना खोलकर पढ़ते हैं। प्रेक्टिस करने के लिए समस्तीपुर से पटना आते थे वैभव समस्तीपुर के ताजपुर में जन्मे वैभव सूर्यवंशी ने 4 साल की उम्र से ही क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। उनके पिता संजीव सूर्यवंशी ने क्रिकेट करियर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे समस्तीपुर से वैभव को प्रशिक्षण के लिए पटना लेकर आते थे। समस्तीपुर से पटना तक आने-जाने में परिवार को काफी समय और पैसा खर्च करना पड़ता था। कई बार परिवार बस से सफर करता था, तो कभी किराये की गाड़ी लेकर पटना पहुंचता था। मां सुबह 3 बजे उठकर वैभव के लिए खाना तैयार करती थी। लॉकडाउन के दौरान जब अकादमी जाना संभव नहीं था, तब भी उन्होंने घर की छत पर अभ्यास जारी रखा। सचिन से भी कम उम्र में डेब्यू करने वाले खिलाड़ी वैभव वैभव ने जनवरी 2024 में बिहार की ओर से रणजी ट्रॉफी में डेब्यू किया था। वैभव ने पटना के मोइनुल हक स्टेडियम में बिहार और मुंबई के बीच रणजी ट्राफी में जब डेब्यू किया था तब उनकी उम्र सिर्फ 12 साल 9 महीने 14 दिन की थी। वैभव सबसे कम उम्र में रणजी में डेब्यू करने वाले दूसरे खिलाड़ी बन गए हैं। उनसे कम उम्र में अलीमुद्दीन ने (12 साल, 2 महीने 18 दिन) डेब्यू किया था। सचिन तेंदुलकर ने 15 साल और 7 महीने 22 दिन की उम्र में डेब्यू किया था। IPL में शतक लगाकर वैभव ने बनाया था रिकॉर्ड बिहार के वैभव सूर्यवंशी IPL इतिहास के सबसे कम उम्र के खिलाड़ी हैं। राजस्थान रॉयल्स ने वैभव को 1.10 करोड़ रुपए में खरीद था। वे शानदार प्रदर्शन करते हुए IPL में फिफ्टी और सेंचुरी लगाने वाले सबसे युवा प्लेयर बने थे। वैभव ने 35 गेंद पर शतक लगाया था। यह IPL में किसी भारतीय खिलाड़ी का सबसे कम गेंदों पर शतक है। उनके इस प्रदर्शन के कारण RR ने उन्हें इस साल रिटेन किया था। वैभव इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू करने वाले दूसरे सबसे युवा खिलाड़ी 15 साल 99 दिन के वैभव सूर्यवंशी इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू करने वाले दुनिया के दूसरे सबसे युवा खिलाड़ी हैं। उनसे आगे सिर्फ पाकिस्तान के हसन रजा हैं, जिन्होंने 1996 में 14 साल 227 दिन की उम्र में जिम्बाब्वे के खिलाफ डेब्यू किया था। भारत की बात करें तो वैभव ने सचिन तेंदुलकर का 37 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। सचिन ने 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ 16 साल 205 दिन की उम्र में इंटरनेशनल डेब्यू किया था। शेफाली वर्मा ने 15 साल 239 दिन की उम्र में भारत के लिए पहला मैच खेला था।

