अष्टमी-रोहिणी का संयोग, संतान प्राप्ति व सुख-शांति के लिए शुभ

अष्टमी-रोहिणी का संयोग, संतान प्राप्ति व सुख-शांति के लिए शुभ

भास्कर न्यूज | पानीपत भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मनाया जाने वाला श्रीकृष्ण जन्मोत्सव इस वर्ष 4 सितंबर को मनाया जाएगा। इस बार जन्माष्टमी पर एक बेहद दुर्लभ और शुभ खगोलीय योग निर्मित हो रहा है। इस दिन अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का अद्भुत मेल रहेगा, साथ ही चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृष में विराजमान रहेगा। शास्त्रों के अनुसार, जब भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का एक साथ संयोग बनता है, तो इसे श्रीकृष्ण जयंती योग कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में भगवान श्रीहरि विष्णु के आठवें अवतार बाल गोपाल श्रीकृष्ण का प्राकट्य भी ठीक इसी तिथि, नक्षत्र और मध्यरात्रि के शुभ काल में हुआ था। यही कारण है कि इस विशेष जयंती योग में जन्माष्टमी का पर्व मनाना और व्रत-पूजन करना अत्यंत पावन तथा फलदायी माना गया है। आचार्य लाल मणि पांडे ने बताया िक, मान्यता है कि श्रीकृष्ण जयंती योग के दौरान की गई भक्ति, मंत्र जाप ॐ नमो भगवते वासुदेवाय और उपवास से व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के कष्ट दूर होते हैं। यह दुर्लभ खगोलीय संयोग विशेष रूप से संतान प्राप्ति, आरोग्य, पारिवारिक सुख-शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अत्यंत कल्याणकारी माना गया है।

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