चिड़ियाघर को केंद्र सरकार से मिली सभी मंजूरी, अब प्रदेश सरकार से मांगी 180 करोड़ के टेंडर की अनुमति

चिड़ियाघर को केंद्र सरकार से मिली सभी मंजूरी, अब प्रदेश सरकार से मांगी 180 करोड़ के टेंडर की अनुमति

कटीघाटी में बनने वाले चिड़ियाघर की सभी बाधाएं केंद्र सरकार से दूर हो गई हैं। अब अलवर वन मंडल ने 180 करोड़ के इस प्रोजेक्ट के टेंडर करने के लिए प्रदेश सरकार से अनुमति मांगी है। इसी माह में यह प्रस्ताव पास होने की संभावना है। जून में काम शुरू हो जाएगा। वन विभाग ने इस प्रोजेक्ट के पूरे होने की मियाद वर्ष 2029 रखी है।
प्रदेश सरकार की ओर से जनवरी में चिड़ियाघर व लायन सफारी प्रोजेक्ट को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की तकनीकी कमेटी के पास भेजा गया था, जिसे मंजूरी मिल गई। इसके अलावा अक्टूबर 2025 में मास्टर प्लान भी केंद्र सरकार से पास हो गया था। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अब इस प्रोजेक्ट के लिए टेंडर लगाया जाएगा। उसी के लिए प्रदेश सरकार से अनुमति वन विभाग ने मांगी है।
104 हेक्टेयर में बनेगा
चिड़ियाघर 104 हेक्टेयर में बनेगा। 81 प्रजातियों के 443 जानवर यहां लाए जाएंगे। लुप्तप्राय 13 प्रजातियों के 74 जानवर भी पर्यटक देख सकेंगे। लायन सफारी समेत इस प्रोजेक्ट पर 180 करोड़ रुपए खर्च होंगे, जिसमें पहले चरण में सरकार 96 करोड़ रुपए जारी करेगी। तीन चरणों में काम होगा।
यह निर्धारित हुआ किराया, साल में 10.09 करोड़ की आय होगी
चिड़ियाघर में 50 रुपए का टिकट लगेगा। लायन सफारी का टिकट 300 रुपए का होगा। छात्र चिड़ियाघर में 20 रुपए के टिकट के साथ घूम सकेंगे। वहीं जंगल सफारी के लिए उन्हें 50 रुपए देने होंगे। विदेशी पर्यटकों को चिड़ियाघर के लिए 300 और लायन सफारी के लिए 600 रुपए देने होंगे। सरकार को चिड़ियाघर के जरिए 2.32 करोड़ रुपए की आय होगी। लायन सफारी के जरिए सालाना 4.44 करोड़ रुपए आएंगे। शाकाहारी सफारी के जरिए 3.33 करोड़ रुपए आएंगे। शाकाहारी सफारी का किराया भी लायन सफारी के बराबर ही होगा। इस तरह सरकार को साल में 10 करोड़ 9 लाख रुपए की आय होगी।
इस तरह एरिया बांटा, 8 लाख आएंगे पर्यटक
कटीघाटी में चिड़ियाघर बनाया जाएगा, जिसमें पहाड़ी व समतल एरिया है। पहाड़ी एरिया में 50 हेक्टेयर में चिड़ियाघर बनाया जाएगा। वहीं 54 हेक्टेयर में जंगल सफारी बनेगी। इस पूरे एरिया को 8 जोन में बांटा गया है। यहां जनसुविधाएं 10 तरह की होंगी। यहां 160 अधिकारी व कर्मचारियों का स्टाफ तैनात होगा। वन विभाग के मुताबिक हर साल करीब 8 लाख पर्यटक आएंगे।

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