विदिशा कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने जिले के विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से आईटीआई में प्रवेश लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि रोजगारोन्मुखी तकनीकी शिक्षा युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम है। यह अपील कक्षा 8वीं, 10वीं और 12वीं उत्तीर्ण छात्रों के लिए की गई है। कलेक्टर ने बताया कि आईटीआई में प्रवेश प्रक्रिया 26 मई से शुरू हो चुकी है। इच्छुक छात्र-छात्राएं अपनी रुचि के अनुसार विभिन्न ट्रेडों में दाखिला ले सकते हैं। आईटीआई की फीस लगभग 6 हजार रुपये है, जिससे यह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए भी एक बेहतर विकल्प है। छात्रावास की सुविधा भी उपलब्ध
जिले में शासकीय आईटीआई संस्थान संचालित हैं, जहां छात्रों के लिए छात्रावास की सुविधा भी उपलब्ध है। इन संस्थानों में ड्रोन टेक्नीशियन, मोटर व्हीकल टेक्नीशियन, फिटर, वेल्डर और इलेक्ट्रिशियन जैसे कई आधुनिक और रोजगारपरक ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को उद्योगों से जुड़ने और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने के अवसर भी मिलते हैं। कलेक्टर गुप्ता ने यह भी बताया कि कई विद्यार्थी आठवीं या दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं। ऐसे छात्रों के लिए आईटीआई एक सुनहरा अवसर है, जहां वे तकनीकी प्रशिक्षण के साथ अपनी शिक्षा भी जारी रख सकते हैं। दसवीं के बाद आईटीआई करने वाले विद्यार्थियों को 12वीं के समकक्ष मान्यता प्राप्त होती है, जिससे उनके लिए आगे की पढ़ाई और रोजगार के रास्ते खुल जाते हैं। अग्निवीर भर्ती में 20 अंक मिलते हैं
उन्होंने विशेष रूप से अग्निवीर भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं का उल्लेख किया। आईटीआई उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया में अतिरिक्त 20 अंकों का लाभ मिलता है, जिससे उनके चयन की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। कलेक्टर ने अभिभावकों और विद्यार्थियों से अधिक से अधिक संख्या में आईटीआई में प्रवेश लेने का आग्रह करते हुए कहा कि कौशल आधारित प्रशिक्षण युवाओं को रोजगार, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत आधार प्रदान करता है।


