children saving money India: भारत में 16 साल से कम उम्र के बच्चे अब सिर्फ खिलौनों और गेम्स तक सीमित नहीं हैं। ये बच्चे पैसे कमाने के तरीके खोज रहे हैं, बचत कर रहे हैं और घर के खर्चों में राय दे रहे हैं। वेंचर कैपिटल कंपनी Rukam Capital की एक ताजा रिपोर्ट यही बताती है कि भारत की Gen Alpha यानी साल 2010 के बाद जन्मी पीढी, पैसों को लेकर अपनी पिछली पीढियों से कहीं ज्यादा जागरूक और सक्रिय है।
Rukam Capital ने “Gen Alpha Decoded: The Consumer-Brand Dynamic” नाम से एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के 70 फीसदी किशोर पैसे कमाने के तरीकों को लेकर जिज्ञासु हैं। ये बच्चे घर के काम-काज, क्रिएटिव एक्टिविटी और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कमाई के रास्ते तलाश कर रहे हैं। रिपोर्ट कहती है कि यह बदलाव बेहद अहम है क्योंकि यह पीढी सिर्फ पैसे खर्च करने वाली नहीं बल्कि खुद कमाई करने की सोच रखने वाली पीढी बन रही है।
पॉकेट मनी बचाते हैं बच्चे
रिपोर्ट के मुताबिक 31 फीसदी बच्चे और किशोर अपनी पॉकेट मनी का ज्यादातर हिस्सा बचाते हैं। यह आंकडा इसलिए खास है क्योंकि इतनी कम उम्र में बचत की यह आदत पहले इस स्तर पर नहीं देखी गई थी। इसके अलावा 25 फीसदी बच्चे कोई भी खर्च करने से पहले अपने माता-पिता की राय लेते हैं। वहीं 17 फीसदी बच्चे छोटी-छोटी चीजों पर तुरंत पैसे खर्च कर देते हैं, जो कि इम्पल्स स्पेंडिंग की आदत को दर्शाता है। 14 फीसदी बच्चे अपना पैसा गेम्स या डिजिटल सब्सक्रिप्शन पर खर्च करते हैं।
स्मार्टफोन ने बदली पैसों को देखने की नजर
रिपोर्ट में एक और अहम बात सामने आई है। 70 फीसदी से ज्यादा Gen Alpha बच्चों के पास स्मार्टफोन की पहुंच है। यह डिजिटल एक्सपोजर उनकी पैसों को लेकर सोच को सीधे प्रभावित कर रहा है। यूट्यूब क्रिएटर्स, गेमिंग स्ट्रीमर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म देखकर ये बच्चे समझ रहे हैं कि कमाई सिर्फ नौकरी से नहीं बल्कि क्रिएटिविटी और डिजिटल स्किल्स से भी होती है। रिपोर्ट के मुताबिक इन बच्चों के लिए “कमाई अब कोई अमूर्त चीज नहीं रही, वह क्रिएटर्स, गेमिंग और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए साफ दिखती है।”
भविष्य के लिए क्या मायने रखता है यह बदलाव
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि इस पीढी में जो आर्थिक जागरूकता अभी से दिख रही है, उसके दूरगामी असर होंगे। अगर बचपन से ही बच्चों को सही दिशा में फाइनेंशियल गाइडेंस मिले तो वे भविष्य में ज्यादा समझदार और जिम्मेदार वयस्क बन सकते हैं। इसके साथ ही रिपोर्ट यह भी चेतावनी देती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढते खर्च के साथ इम्पल्सिव और बिना निगरानी के होने वाले ट्रांजेक्शन का खतरा भी बढ रहा है।


