औरंगाबाद में सड़क हादसे में घायल महिला की इलाज के दौरान सदर अस्पताल में मौत हो गई। जिसके बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। डॉक्टरों में लापरवाही का आरोप लगाया है। मृतका की पहचान रिसियप के सड़सी गांव निवासी दिलीप सिंह की पत्नी गिरिजा देवी(60) के तौर पर हुई है। चार घंटे बाद भी कोई सुधार नहीं जानकारी के अनुसार शुक्रवार की रात गांव के पास सड़क किनारे टहल रही थी। इस दौरान तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने रौंद दिया। हादसे के बाद ड्राइवर फरार हो गया। सूचना मिलते ही परिवार के सदस्य मौके पर पहुंचे। इलाज के लिए अस्पताल लेकर गए। इमरजेंसी वार्ड में एडमिट कराया। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर प्रवीण अग्रवाल ने उनका इलाज शुरू किया। परिजनों के अनुसार करीब चार घंटे तक इलाज चलता रहा। इसके बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ। लापरवाही के चलते गई जान मृतका के बेटे नीतीश कुमार ने आरोप लगाते हुए कहा कि मां का समुचित इलाज नहीं किया गया। अगर उनकी स्थिति गंभीर थी तो उन्हें समय रहते किसी बड़े अस्पताल के लिए रेफर कर देना चाहिए था। काफी देर बाद जब हालत बिगड़ गई, तब डॉक्टरों ने रेफर करने की बात कही। एंबुलेंस के पहुंचने से पहले उन्होंने दम तोड़ दिया। पोस्टमार्टम कराने से इनकार मौत के बाद डॉक्टरों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए विरोध किया। हालांकि बाद में स्थिति शांत हुई, लेकिन परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पोस्टमार्टम कराए बिना ही शव को घर लेकर चले गए। औरंगाबाद में सड़क हादसे में घायल महिला की इलाज के दौरान सदर अस्पताल में मौत हो गई। जिसके बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। डॉक्टरों में लापरवाही का आरोप लगाया है। मृतका की पहचान रिसियप के सड़सी गांव निवासी दिलीप सिंह की पत्नी गिरिजा देवी(60) के तौर पर हुई है। चार घंटे बाद भी कोई सुधार नहीं जानकारी के अनुसार शुक्रवार की रात गांव के पास सड़क किनारे टहल रही थी। इस दौरान तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने रौंद दिया। हादसे के बाद ड्राइवर फरार हो गया। सूचना मिलते ही परिवार के सदस्य मौके पर पहुंचे। इलाज के लिए अस्पताल लेकर गए। इमरजेंसी वार्ड में एडमिट कराया। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर प्रवीण अग्रवाल ने उनका इलाज शुरू किया। परिजनों के अनुसार करीब चार घंटे तक इलाज चलता रहा। इसके बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ। लापरवाही के चलते गई जान मृतका के बेटे नीतीश कुमार ने आरोप लगाते हुए कहा कि मां का समुचित इलाज नहीं किया गया। अगर उनकी स्थिति गंभीर थी तो उन्हें समय रहते किसी बड़े अस्पताल के लिए रेफर कर देना चाहिए था। काफी देर बाद जब हालत बिगड़ गई, तब डॉक्टरों ने रेफर करने की बात कही। एंबुलेंस के पहुंचने से पहले उन्होंने दम तोड़ दिया। पोस्टमार्टम कराने से इनकार मौत के बाद डॉक्टरों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए विरोध किया। हालांकि बाद में स्थिति शांत हुई, लेकिन परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पोस्टमार्टम कराए बिना ही शव को घर लेकर चले गए।


